शिवमोग्गा सांसद ने होसनगर की विधानसभा सीट बहाली की मांग संसद में उठाई
नई दिल्ली: शिवमोग्गा के सांसद बी. वाई. राघवेंद्र ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में होसनगर तालुक के निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि 2008 के परिसीमन के बाद होसनगर ने अपनी विधानसभा सीट का दर्जा खो दिया था, जिसके कारण क्षेत्र के लोगों को लगता है कि उनका प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है और उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सांसद राघवेंद्र ने विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “हसनगर तालुक के लोग अपनी विधानसभा सीट बहाल करने की मांग कर रहे हैं। परिसीमन के बाद, इस क्षेत्र को तिरुथाल्ली और सागर निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित कर दिया गया था। तब से, तालुक के निवासियों का मानना है कि उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है और उनकी आवाज अनसुनी रह जाती है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिमी घाट जैसे घनी आबादी वाले और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए परिसीमन प्रक्रिया में विशेष मानदंडों पर विचार किया जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रावधान लागू किए जाते हैं।
हसनगर के निवासियों की मांग का इतिहास
हसनगर के निवासियों द्वारा अपनी विधानसभा सीट की बहाली की मांग कोई नई बात नहीं है। यह मांग पिछले कई सालों से उठाई जा रही है। 2008 के परिसीमन से पहले, हसनगर एक अलग विधानसभा क्षेत्र था। हालाँकि, परिसीमन के बाद, इस क्षेत्र को पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्रों, विशेष रूप से तिरुथाल्ली और सागर में मिला दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप, स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके क्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं और आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं किया जा रहा है।
इस मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर कई विरोध प्रदर्शन और पदयात्राएं भी आयोजित की गई हैं। हाल ही में, अप्रैल 2026 में, हसनगर के निवासियों ने अपनी मांग के समर्थन में एक दो दिवसीय पदयात्रा निकाली थी, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। इस पदयात्रा में स्थानीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं ने भी भाग लिया था और हसनगर को एक अलग विधानसभा सीट के रूप में बहाल करने की मांग का समर्थन किया था।
सांसद राघवेंद्र का संसद में वक्तव्य
संसद में अपने संबोधन के दौरान, सांसद राघवेंद्र ने परिसीमन प्रक्रिया पर प्रकाश डाला और कहा कि हसनगर जैसे क्षेत्रों की भौगोलिक और पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “पश्चिमी घाट जैसे घनी आबादी वाले और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए परिसीमन प्रक्रिया में विशेष मानदंडों पर विचार किया जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रावधान लागू किए जाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि हसनगर की जनता पिछले कई सालों से इस मांग को उठा रही है और अब समय आ गया है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा, “हसनगर तालुक के लोगों की मांग को आगामी परिसीमन में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।”
“हसनगर तालुक के लोगों को लगता है कि उनका प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है और उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पश्चिमी घाट जैसे घनी आबादी वाले और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए परिसीमन प्रक्रिया में विशेष मानदंडों पर विचार किया जाना चाहिए।”
– बी. वाई. राघवेंद्र, सांसद, शिवमोग्गा
हसनगर की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
हसनगर, पश्चिमी घाट में स्थित एक खूबसूरत इलाका है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और महत्वपूर्ण नदियों के स्रोत के रूप में जाना जाता है। हालाँकि, इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और परिसीमन के बाद विधानसभा सीट का दर्जा खोने के कारण, इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- अपर्याप्त प्रतिनिधित्व: हसनगर के निवासियों का मानना है कि अलग विधानसभा सीट न होने के कारण, उनके मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया जाता है।
- बुनियादी सुविधाओं की कमी: कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में बिजली आपूर्ति और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक समस्या है।
- पारिस्थितिक महत्व: हसनगर पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कई नदियों का उद्गम स्थल है। इस क्षेत्र के विकास की योजना बनाते समय इसकी पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
सांसद बी. वाई. राघवेंद्र द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाए जाने से हसनगर के निवासियों की मांग को एक नई दिशा मिली है। यह उम्मीद की जाती है कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार करेगी और आगामी परिसीमन प्रक्रिया में हसनगर के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि कर्नाटक सरकार और चुनाव आयोग इस मुद्दे पर स्थानीय प्रतिनिधियों और जनता के साथ मिलकर काम करें ताकि एक ऐसा समाधान निकाला जा सके जो क्षेत्र के समग्र विकास और लोगों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करे। संसद में इस तरह के मुद्दों को उठाना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और उनकी चिंताओं को दूर करने के महत्व को रेखांकित करता है।
विशेष रूप से, 16 से 18 अप्रैल, 2026 के बीच होने वाले संसद के विशेष सत्र में, महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित ऐतिहासिक फैसलों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में, हसनगर जैसे क्षेत्रों की परिसीमन संबंधी मांगों पर भी ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- शिवमोग्गा के सांसद बी. वाई. राघवेंद्र ने संसद के विशेष सत्र में हसनगर तालुक की विधानसभा सीट बहाली की मांग उठाई।
- 2008 के परिसीमन के बाद हसनगर ने अपनी विधानसभा सीट का दर्जा खो दिया था, जिससे स्थानीय लोगों को प्रतिनिधित्व की कमी महसूस हो रही है।
- हसनगर के निवासियों ने अपनी मांग के समर्थन में पहले भी कई विरोध प्रदर्शन और पदयात्राएं की हैं।
- सांसद राघवेंद्र ने पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए परिसीमन में विशेष मानदंडों पर विचार करने का आग्रह किया।
- क्षेत्र में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियाँ हैं।
- संसद में इस मुद्दे को उठाए जाने से हसनगर के लोगों की मांग को बल मिला है और आगामी परिसीमन में इस पर विचार होने की उम्मीद है।













