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सेंसेक्स 4,320 अंक टूटा: क्या अक्टूबर में संभलेगा शेयर बाजार?

नई दिल्ली / मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर 2026 का महीना भारी बिकवाली और दबाव भरा साबित हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स बीते महीने लगभग 4,320 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 6 प्रतिशत यानी 1,450 अंक लुढ़क गया। बाजार में लगातार आठ हफ्तों की यह गिरावट पिछले 25 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार की सबसे लंबी मंदी की लकीर बन गई है। शुक्रवार के बंद सत्र में सेंसेक्स 71,910 अंक पर और निफ्टी 22,422 के स्तर पर बंद हुआ। अब अक्टूबर की शुरुआत के साथ निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या आगामी त्योहारी सीजन और कॉरपोरेट नतीजों के दम पर दलाल स्ट्रीट पर रिकवरी लौटेगी या फिर वैश्विक चुनौतियों के बीच मंदी का दबाव अभी और गहराएगा।

सितंबर में क्यों आई 25 साल की सबसे बड़ी गिरावट?

ETV Bharat की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो महीनों से भारतीय इक्विटी बाजार पर कई प्रतिकूल वैश्विक कारक एक साथ हावी रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आया ऐतिहासिक उछाल विदेशी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा निकास ट्रिगर साबित हुआ। 1 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड क्रमशः 5.3 प्रतिशत और 5.64 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। मजबूत डॉलर और रिकॉर्ड यील्ड के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सितंबर में भारतीय इक्विटी से 44,013 करोड़ रुपये की भारी शुद्ध निकासी की।

इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तरों पर टिकी रहीं, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा बना रहा। डॉलर इंडेक्स में मजबूती का असर भारतीय रुपये पर भी दिखा। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों ने एसआईपी के जरिए लगातार पूंजी डाली, लेकिन विदेशी फंडों की भारी बिकवाली के सामने यह घरेलू सहारा केवल नुकसान को सीमित करने तक ही सीमित रह सका।

अक्टूबर 2026: प्रमुख आर्थिक और बाजार आंकड़े

भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के वर्तमान परिदृश्य को समझने के लिए सितंबर के अंतिम आंकड़ों और अक्टूबर के प्रमुख संकेतकों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक वर्तमान स्थिति (अक्टूबर 2026) पिछला स्तर (अगस्त 2026) शुद्ध बदलाव बाजार प्रभाव
बीएसई सेंसेक्स (Sensex) 71,910 अंक 76,230 अंक -4,320 अंक (-5.66%) 25 वर्षों में लगातार 8 हफ्तों की गिरावट दर्ज
एनएसई निफ्टी (Nifty 50) 22,422 अंक 23,872 अंक -1,450 अंक (-6.07%) 22,200 का दायरा आगामी सत्रों में अहम सपोर्ट
विदेशी निवेशक (FII Outflow) -44,013 करोड़ रुपये सीमित निकासी पूंजी निकासी में भारी वृद्धि उभरते बाजारों से जोखिम भरी पूंजी घटाने की होड़
अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड 5.30 प्रतिशत 4.45 प्रतिशत +85 आधार अंक 2002 के बाद उच्चतम स्तर, वैल्यूएशन पर दबाव
सकल जीएसटी संग्रह 2.03 लाख करोड़ रुपये 1.77 लाख करोड़ रुपये +14.7% सालाना बढ़त घरेलू आर्थिक खपत और व्यापार में निरंतर मजबूती
जीडीपी वृद्धि (Q1 FY27) 7.8 प्रतिशत 7.2 प्रतिशत अनुमान से बेहतर बुनियादी आर्थिक ढांचे की आंतरिक स्थिरता
सरकारी पूंजीगत व्यय 12.22 लाख करोड़ रुपये 11.11 लाख करोड़ रुपये बजट आवंटन में बढ़ोतरी सड़क, रेलवे और बुनियादी ढांचे को गति

कौटिल्य कॉन्क्लेव: वित्त मंत्री ने गिनाईं भारत की उपलब्धियां

Akashvani News की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक दृढ़ता का विस्तार से उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की मजबूती पिछले एक दशक में ठोस राजकोषीय अनुशासन, इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, बैंकिंग सुधारों और बेहतर क्रियान्वयन से संभव हुई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की बुनियादी आर्थिक नींव पूरी तरह सुरक्षित रही है। पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर इस आंतरिक लचीलेपन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। आईएमएफ के अनुसार भारत का सामान्य सरकारी कर्ज वर्ष 2026 के 83.4 प्रतिशत से घटकर 2031 तक 77.7 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का भारी पूंजीगत व्यय रखा गया है, जबकि मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत हो चुके हैं।

जीएसटी संग्रह 2.03 लाख करोड़ के पार: घरेलू मांग का संबल

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ। यह चालू वित्त वर्ष में दूसरा अवसर है যখন कर संग्रह 2 लाख करोड़ के पार निकला है।

कर संग्रह में यह वृद्धि दर्शाती है कि विनिर्माण और व्यापार में निरंतर गति बनी हुई है। अक्टूबर में नवरात्र, दशहरा और दीपावली से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल खपत में जोरदार उछाल आने की संभावना है। त्योहारी सीजन की यह घरेलू मांग कंपनियों की बिक्री और लाभ को सहारा देगी, जो दलाल स्ट्रीट के लिए मजबूत रक्षात्मक ढाल बनेगी।

आरबीआई मौद्रिक नीति बैठक: क्या होगा नीतिगत फैसला?

आगामी सप्ताह में निवेशकों का ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 5 से 7 अक्टूबर 2026 की बैठक पर केंद्रित रहेगा। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की अनिश्चितता और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के बीच गवर्नर की अगुवाई वाली छह-सदस्यीय समिति रेपो दर पर फैसला लेगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत घरेलू विकास और आयातित महंगाई के दबाव को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में बदलाव न करते हुए यथास्थिति बनाए रख सकता है। यह सतर्क मौद्रिक रुख मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के साथ-साथ रुपये को स्थिरता प्रदान करने में सहायक साबित होगा।

अक्टूबर में क्या लौटेगी बाजार में तेजी? विशेषज्ञों की रणनीति

बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि अक्टूबर 2026 में शेयर बाजारों में तत्काल कोई तेज वी-शेप्ड रिकवरी आने के बजाय सूचकांक सीमित दायरे में समेकित हो सकते हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं होतीं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नरम नहीं पड़ती, तब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों की आक्रामक वापसी मुश्किल है। हालांकि लार्ज-कैप बैंकों और घरेलू खपत से जुड़ी दिग्गज कंपनियों में निचले स्तरों पर स्थिरता दिख सकती है।

अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से कंपनियों के Q2 नतीजे आने शुरू होंगे, जिससे शेयरों की वास्तविक चाल तय होगी। जानकारों की सलाह है कि खुदरा निवेशकों को मौजूदा सुस्ती और गिरावट से घबराने के बजाय अनुशासित निवेश रणनीति का पालन करना चाहिए। मजबूत बैलेंस शीट और उचित वैल्यूएशन वाली लार्ज-कैप कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखना ही लंबी अवधि के लिए सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प साबित होगा।

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