बेंगलुरु / नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 1 करोड़ से अधिक सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण की दिशा में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) ने अपनी क्षेत्रीय परामर्श प्रक्रिया को तेज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय आयोग पैनल ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संघों, डाक कर्मियों, रक्षा कार्मिकों और पेंशनर्स एसोसिएशनों के साथ दो दिवसीय उच्चस्तरीय परामर्श बैठकें सफलतापूर्वक संपन्न कर ली हैं। LiveMint 8th Pay Commission विशेष रिपोर्ट और Economic Times के विश्लेषण के अनुसार, बेंगलुरु बैठकों में कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष जोरदार दलील दी कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई भत्ते (DA) की दरों में हुई तीव्र वृद्धि को देखते हुए 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले कम से कम 2.86 से लेकर 3.83 का उच्च फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाना आवश्यक है। आयोग के सदस्य-सचिव पंकज जैन (पूर्व आईएएस) और आईआईएम बैंगलोर के प्रो. पुलक घोष की उपस्थिति में संपन्न इन बैठकों के बाद पैनल अब 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में वित्तीय क्षेत्र व जोनल यूनियनों के साथ अगली बैठक करेगा。
बेंगलुरु परामर्श बैठक: विभिन्न कर्मचारी संवर्गों की प्रमुख मांगें (तालिका)
आयोग के 18 महीने के कार्यकाल में क्षेत्रीय परामर्श का यह चरण नीतिगत रूप से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक माना जा रहा है। बेंगलुरु में दक्षिण भारत के केंद्रीय विभागों के प्रतिनिधियों ने वेतन विसंगतियों, भत्तों और पदोन्नति के मुद्दों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत किया। दक्षिण भारत के विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी महासंघों और प्रतिनिधिमंडलों द्वारा आयोग के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगों तथा उनके औचित्य का विस्तृत तुलनात्मक सारणीबद्ध ब्योरा नीचे दिया गया है:
| कर्मचारी संवर्ग / एसोसिएशन | प्रमुख पद / ग्रेड | प्रस्तुत की गई मुख्य मांगें | तर्क एवं आधार |
|---|---|---|---|
| अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ (AIPEU) | HSG-I एवं HSG-I (NFG) सुपरवाइजर | HSG-I को लेवल-9 तथा NFG को लेवल-10, ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित दर्जा | सब-डिवीजनल डाकघरों में प्रशासनिक उत्तरदायित्व और भारी कार्यभार |
| रेलवे तकनीकी एवं परिचालन यूनियनें | सेक्शन इंजीनियर व स्टेशन मास्टर | प्रारंभिक ग्रेड पे का उन्नयन और 10% विशेष उत्तरदायित्व भत्ता | यात्री सुरक्षा, 24×7 ट्रेन संचालन और आधुनिक तकनीक का दबाव |
| केंद्रीय रक्षा असैन्य कर्मचारी (Defence Civilian) | आयुध निर्माण व ईएमई कार्यशालाएं | जोखिम एवं कठिनाई भत्ते (Risk Allowance) का युक्तिकरण | संवेदनशील रक्षा उपकरणों के रखरखाव में उच्च जोखिम की उपस्थिति |
| अखिल भारतीय पेंशनर्स परिसंघ | सेवानिवृत्त सिविल व सैन्य पेंशनर्स | अंतिम मूल वेतन का 67% पेंशन और 11 वर्ष में कम्यूटेशन बहाली | वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती स्वास्थ्य लागत और जीवन प्रत्याशा |
महंगाई भत्ते (DA) की तेज वृद्धि और उच्च फिटमेंट फैक्टर का गणित
बेंगलुरु बैठक में कर्मचारी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन का केंद्रीय बिंदु यह था कि 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से जीवन-यापन लागत में अप्रत्याशित उछाल आया है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 53% को पार कर चुका है और आगामी किश्तों के बाद यह 60% के स्तर को छूने की ओर अग्रसर है। जब महंगाई भत्ता 50% के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और वैधानिक स्तर को पार कर जाता है, तो मुद्रास्फीति के दबाव के कारण कर्मचारियों के मूल वेतन के वास्तविक क्रय मूल्य में भारी गिरावट दर्ज की जाती है。
कर्मचारी संघों ने जस्टिस देसाई समिति को समझाया कि 7वें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित 2.57 का फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की वास्तविक आर्थिक अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा था, क्योंकि उसमें कर्मचारियों को केवल 14.29% की शुद्ध वेतन वृद्धि ही मिल पाई थी। यदि 8वें वेतन आयोग में 2.86 या 3.0 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹51,480 से ₹54,000 के स्तर पर पहुंच जाएगा। वहीं, कर्मचारी संघों की 3.833 फिटमेंट की मांग स्वीकार होने की स्थिति में न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 होगा。
फिटमेंट फैक्टर के विभिन्न परिदृश्यों में वेतन वृद्धि का आकलन (तालिका)
जस्टिस देसाई आयोग द्वारा विचार किए जा रहे संभावित मॉडलों और यूनियन की मांगों के आधार पर लेवल-1 से लेकर लेवल-10 तक के वेतनमान पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण नीचे दी गई तालिका में प्रदर्शित है:
| पे लेवल (7th CPC) | मौजूदा बेसिक पे (₹) | 2.20 फिटमेंट पर नया बेसिक (₹) | 2.86 फिटमेंट पर नया बेसिक (₹) | 3.83 फिटमेंट पर नया बेसिक (₹) |
|---|---|---|---|---|
| लेवल-1 (MTS / ग्रुप ‘डी’) | ₹18,000 | ₹39,600 | ₹51,480 | ₹68,940 |
| लेवल-2 (LDC / कनिष्ठ क्लर्क) | ₹19,900 | ₹43,780 | ₹56,914 | ₹76,217 |
| लेवल-4 (UDC / वरिष्ठ क्लर्क) | ₹25,500 | ₹56,100 | ₹72,930 | ₹97,665 |
| लेवल-6 (असिस्टेंट / सब-इंस्पेक्टर) | ₹35,400 | ₹77,880 | ₹1,01,244 | ₹1,35,582 |
| लेवल-8 (अनुभाग अधिकारी / SO) | ₹47,600 | ₹1,04,720 | ₹1,36,136 | ₹1,82,308 |
| लेवल-10 (ग्रुप ‘ए’ राजपत्रित) | ₹56,100 | ₹1,23,420 | ₹1,60,446 | ₹2,14,863 |
पेंशन विसंगतियां, कम्यूटेशन और पारिवारिक पेंशन पर विशेष जोर
बेंगलुरु परामर्श सत्र में सेवानिवृत्त अधिकारियों के संगठनों ने पेंशन सुधारों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। पेंशनर्स संघों ने रेखांकित किया कि वर्तमान में 15 वर्षों तक पेंशन कम्यूटेशन की कटौती जारी रखना पूर्णतः अतार्किक है, क्योंकि सरकारी अग्रिम राशि मय ब्याज लगभग 11 वर्षों में ही चुकता हो जाती है। अतएव पेंशन कम्यूटेशन की पूर्ण बहाली अवधि को वर्तमान 15 वर्ष से घटाकर अनिवार्य रूप से 11 वर्ष किया जाना चाहिए ताकि बुजुर्ग पेंशनभोगियों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े。
इसके अतिरिक्त, पारिवारिक पेंशन की दर को मौजूदा 30% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव रखा गया ताकि दिवंगत कर्मचारी के आश्रित जीवनसाथी को गरिमापूर्ण आर्थिक सुरक्षा मिल सके। आयोग ने इन वित्तीय बिंदुओं पर डेटा संग्रह के लिए पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) से पूर्व के 3 वर्षों का वास्तविक व्यय ब्योरा तलब किया है ताकि रिपोर्ट तैयार करते समय इसका सटीक वित्तीय मूल्यांकन किया जा सके。
आयोग की आगामी कार्ययोजना और मुंबई दौरे की रूपरेखा
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग अब तक नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, लद्दाख और कर्नाटक का आधिकारिक दौरा पूरा कर चुका है। आयोग का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव देश की वित्तीय राजधानी मुंबई है, जहां 22 और 23 अक्टूबर 2026 को पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे, आयकर, सीमा शुल्क, डाक विभाग और बैंक कर्मचारी यूनियनों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित होंगी。
आयोग के सदस्य-सचिव पंकज जैन के अनुसार, आयोग को 18 महीने की समय-सीमा के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है। केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम अनुमोदन मिलने के बाद ही वेतन आयोग की सिफारिशें आधिकारिक रूप से लागू की जाएंगी। बेंगलुरु की इस गहन और सकारात्मक परामर्श बैठक के बाद देश भर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में आगामी वेतनमान में सार्थक व ऐतिहासिक सुधार की आशाएं और अधिक बलवती हो गई हैं。













