नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 1 करोड़ से अधिक सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों एवं पेंशन ढांचे के पुनर्गठन को लेकर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्रीय परिषद (NC-JCM) एवं कर्मचारी परिसंघों ने वेतन आयोग के समक्ष औपचारिक मांग पत्र व मॉडल प्रस्तुत किया है। Economic Times 8th Pay Commission रिपोर्ट और LiveMint के विश्लेषण के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने 7वें वेतन आयोग के वर्तमान 18 पे लेवल्स को घटाकर केवल 7 पे स्केल्स में विलय (Merger) करने और 3.833 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर न्यूनतम मूल वेतन को सीधे ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा है। इस मांग पत्र में यह स्पष्ट तर्क दिया गया है कि वर्तमान सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए वेतन गणना का आधार तीन सदस्यों के बजाय पांच यूनिट माना जाना चाहिए。
18 पे लेवल्स को घटाकर 7 पे स्केल्स में विलय का नया फॉर्मूला
7वें वेतन आयोग ने वर्ष 2016 में ग्रेड पे समाप्त कर लेवल 1 से 18 तक पे मैट्रिक्स लागू किया था। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, निचले ग्रेडों में कई लेवल्स के कार्यक्षेत्र में मामूली अंतर होने से पदोन्नति व MACP में विसंगतियां पैदा हो रही हैं। उदाहरण के लिए, लेवल 2 और 3 तथा लेवल 4 और 5 के बीच मूल वेतन का अंतर बहुत कम है, जिससे पदोन्नति मिलने पर भी कर्मचारियों के वेतन में कोई सार्थक वृद्धि नहीं दिखती。
कर्मचारी संगठनों के ड्राफ्टिंग कमेटी के अनुसार, निचले एवं मध्यवर्ती पे लेवल्स का युक्तिकरण (Rationalisation) करते हुए उन्हें 7 एकीकृत वेतनमानों में समाहित किया जाना चाहिए। इससे न केवल प्रशासनिक जटिलताएं समाप्त होंगी, बल्कि कनिष्ठ कर्मचारियों को करियर की शुरुआत में ही गरिमापूर्ण आजीविका मिल सकेगी। Upstox वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, पे लेवल विलय से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ ग्रुप ‘सी’ के उन कर्मचारियों को मिलेगा जो वर्षों से एक ही वेतन दायरे में रुके हुए हैं。
प्रस्तावित 7 पे स्केल्स बनाम 7वें वेतन आयोग का पे मैट्रिक्स (तालिका)
8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव में वर्तमान पे मैट्रिक्स के विलय और नए वेतनमानों का स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है। नीचे दी गई तालिका में 7वें वेतन आयोग के मौजूदा लेवल्स और 8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तावित पे स्केल्स की विस्तृत रूपरेखा दर्शाई गई है:
| प्रस्तावित वेतनमान (8th CPC) | 7वें वेतन आयोग का मौजूदा पे लेवल | 7वें वेतन आयोग का वर्तमान पे स्केल (₹) | 3.833 फिटमेंट पर प्रस्तावित न्यूनतम वेतन (₹) |
|---|---|---|---|
| पे स्केल-1 | लेवल-1 (न्यूनतम प्रारंभिक ग्रेड) | ₹18,000 – ₹56,900 | ₹69,000 |
| पे स्केल-2 | लेवल-2 एवं लेवल-3 का विलय | ₹21,700 – ₹69,100 | ₹83,200 |
| पे स्केल-3 | लेवल-4 एवं लेवल-5 का विलय | ₹29,200 – ₹92,300 | ₹1,12,000 |
| पे स्केल-4 | लेवल-6 (अराजपत्रित पर्यवेक्षक) | ₹35,400 – ₹1,12,400 | ₹1,35,700 |
| पे स्केल-5 | लेवल-7 एवं लेवल-8 का विलय | ₹47,600 – ₹1,51,100 | ₹1,82,500 |
| पे स्केल-6 | लेवल-9 एवं लेवल-10 का विलय | ₹56,100 – ₹1,77,500 | ₹2,15,100 |
| पे स्केल-7 से 13 | लेवल-11 से लेवल-17 (वरिष्ठ अधिकारी) | यथावत पुनः क्रमांकित संरचना | 3.833 फिटमेंट फैक्टर के अनुसार देय |
न्यूनतम वेतन ₹18,000 से ₹69,000 करने का गणितीय आधार
न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) के डॉ. आयक्रॉयड फॉर्मूले पर आधारित है। 7वें वेतन आयोग ने एक कर्मचारी के परिवार में केवल तीन उपभोग इकाइयां (पति, पत्नी और दो छोटे बच्चे = 3 यूनिट) मानी थीं। इसके विपरीत, कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि माता-पिता के भरण-पोषण अधिनियम (Senior Citizens Act) के तहत वृद्ध माता-पिता की देखभाल कर्मचारी का कानूनी दायित्व है। अतएव, एक परिवार को न्यूनतम पांच इकाइयां (5 Consumption Units) माना जाना अनिवार्य है。
दैनिक संतुलित आहार, वस्त्र, मकान किराया, बच्चों की शिक्षा व चिकित्सा के खुदरा मूल्यों पर पांच सदस्यों के परिवार का न्यूनतम निर्वाह व्यय लगभग ₹69,000 बैठता है। वर्तमान ₹18,000 के मूल वेतन पर जब 3.833 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो गणना सटीक रूप से 18,000 × 3.833 = ₹68,994 बैठती है, जिसे राउंड-ऑफ करके ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे प्रस्तावित किया गया है。
फिटमेंट फैक्टर का प्रभाव: 7वां वेतन आयोग बनाम 8वां वेतन आयोग (तालिका)
वेतन आयोग के इतिहास में फिटमेंट फैक्टर ही वह मुख्य पैमाना होता है जो कर्मचारियों के मूल वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी तय करता है। नीचे दी गई तालिका में 6वें, 7वें और 8वें वेतन आयोग के विभिन्न फिटमेंट परिदृश्यों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत है:
| वेतन आयोग का चरण | लागू / प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | न्यूनतम मूल वेतन (₹) | कर्मचारियों की वास्तविक वेतन वृद्धि |
|---|---|---|---|
| 6th CPC (वर्ष 2006) | 1.86 फिटमेंट फैक्टर | ₹7,000 | लगभग 40% से 50% की प्रभावी वृद्धि |
| 7th CPC (वर्ष 2016) | 2.57 फिटमेंट फैक्टर | ₹18,000 | केवल 14.29% वास्तविक बुनियादी वृद्धि |
| 8th CPC (सरकारी अनुमान) | 1.92 से 2.20 फिटमेंट फैक्टर | ₹34,500 – ₹39,600 | डीए समाहित करने के उपरांत संतुलित वृद्धि |
| 8th CPC (यूनियन मांग) | 3.833 फिटमेंट फैक्टर | ₹69,000 | पांच पारिवारिक इकाइयों पर आधारित पूर्ण राहत |
पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशन के लिए की गई महत्वपूर्ण सिफारिशें
वेतनमान के पुनर्गठन के साथ-साथ पेंशनभोगियों की सुरक्षा के लिए भी क्रांतिकारी बदलावों की मांग की गई है। कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पूर्ण पेंशन को उनके अंतिम आहरित वेतन (Last Pay Drawn) का 50% रखने के बजाय बढ़ाकर 67% किया जाना चाहिए। वहीं पारिवारिक पेंशन (Family Pension) को मौजूदा 30% से बढ़ाकर 50% किए जाने का प्रस्ताव है ताकि आश्रित परिवार को सम्मानजनक जीवन मिल सके。
इसके अलावा, पेंशन कम्यूटेशन की बहाली अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष करने की मांग की गई है, क्योंकि अग्रिम राशि ब्याज सहित 11 वर्षों में वसूल हो जाती है। साथ ही, 80 वर्ष की आयु पर मिलने वाले 20% अतिरिक्त पेंशन लाभ को 65 वर्ष की आयु से ही 5% की दर से चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है。
सरकार का रुख, वित्तीय चुनौतियां और आगे की राह
यद्यपि कर्मचारी संगठनों ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम वेतन की महत्वाकांक्षी मांग रखी है, किंतु वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार पर इसका अत्यधिक राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden) पड़ेगा। केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने के लक्ष्य को देखते हुए विशेषज्ञ अनुमान जता रहे हैं कि सरकार 1.92 से 2.20 के बीच संतुलित फिटमेंट फैक्टर पर विचार कर सकती है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹35,000 से ₹40,000 के दायरे में पहुंच सकता है。
फिलहाल 8वें वेतन आयोग के गठन और विचारार्थ विषयों (Terms of Reference – ToR) की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 के मध्य तक आयोग के औपचारिक गठन की उम्मीद है, जिसके बाद कर्मचारी संघों के इन प्रस्तावों पर विधिवत परामर्श और समीक्षा की जाएगी। 1 करोड़ कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए यह प्रस्ताव आर्थिक भविष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला साबित होगा。













