सबरीमाला गोल्ड केस: पूर्व TDB अध्यक्ष ए. पद्मकुमार को जमानत मिली, जेल से रिहाई का रास्ता साफ
सबरीमाला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित गोल्ड केस में केरल की एक अदालत ने पूर्व त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार को सांविधिक जमानत (statutory bail) दे दी है। यह जमानत उन्हें द्वारपालक (guardian deity) मूर्तियों से सोने की कथित हेराफेरी से संबंधित मामले में मिली है। इससे पहले उन्हें मंदिर के गर्भगृह (Sreekovil) के दरवाजे के फ्रेम से सोने की हेराफेरी के मामले में भी जमानत मिल चुकी है। इन दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद पद्मकुमार के आज शाम तक जेल से बाहर आने की उम्मीद है।
गोल्ड केस में अब तक की जांच और जमानत का इतिहास
सबरीमाला गोल्ड केस, जिसमें सोने की कथित हेराफेरी और गबन के आरोप शामिल हैं, ने केरल में काफी सुर्खियां बटोरी हैं। इस मामले की जांच केरल हाई कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है। पूर्व TDB अध्यक्ष ए. पद्मकुमार इस मामले में कई आरोपियों में से एक हैं।
मुख्य आरोप और जांच की दिशा
सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम और द्वारपालक मूर्तियों से सोने की कथित हेराफेरी के दो मुख्य मामले हैं। आरोप है कि इन कीमती कलाकृतियों से सोने को गलत तरीके से हटाया गया और संभवतः रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निकाला गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन कृत्यों के पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें बोर्ड के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की मिलीभगत हो सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में नौ जनवरी 2026 को एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी। ईडी की प्रारंभिक जांच में पता चला कि सोने से ढकी पवित्र कलाकृतियों को आधिकारिक रिकॉर्ड में जानबूझकर ‘तांबे की प्लेट’ के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और 2019-2025 की अवधि के दौरान मंदिर परिसर से अवैध रूप से हटा दिया गया। आरोप है कि सोने को चेन्नई और कर्नाटक की निजी सुविधाओं में रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निकाला गया, जिससे अपराध की आय उत्पन्न हुई जिसे बरकरार रखा गया, स्थानांतरित किया गया और छिपाया गया।
इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच जारी है। पद्मकुमार, जो कथित तौर पर 2019 में जब कलाकृतियों को फिर से प्लेटिंग के लिए सौंपा गया था, तब TDB अध्यक्ष थे, इस मामले में 11वें आरोपी हैं।
सांविधिक जमानत का क्या अर्थ है?
सांविधिक जमानत, जिसे ‘वैधानिक जमानत’ भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार है। यह तब मिलता है जब जांच एजेंसी निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र (chargesheet) दाखिल करने में विफल रहती है। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 167(2) के तहत, यदि किसी आरोपी को गिरफ्तारी के बाद एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 60 या 90 दिन, मामले की गंभीरता के आधार पर) के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जाता है, तो वह जमानत का हकदार हो जाता है।
इस मामले में, विशेष जांच दल (SIT) द्वारा निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाने के कारण ए. पद्मकुमार को सांविधिक जमानत मिली। यह जमानत उन्हें डिफ़ॉल्ट रूप से मिली है, क्योंकि जांच प्रक्रिया में देरी हुई।
जेल से रिहाई की प्रक्रिया
ए. पद्मकुमार को पहले गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम से सोने की हेराफेरी के मामले में 20 फरवरी 2026 को सशर्त जमानत मिली थी। हालांकि, उस समय वह द्वारपालक मूर्ति मामले में अपनी हिरासत के कारण जेल में ही रहे। अब, द्वारपालक मूर्ति मामले में सांविधिक जमानत मिलने के बाद, उनके जेल से रिहा होने की उम्मीद है। वह इस मामले में जमानत पाने वाले आठवें आरोपी हैं।
इस मामले में अब तक कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों को भी जमानत मिल चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोटी, तंत्री कंदरारु राजीववरू, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू, पूर्व कार्यकारी अधिकारी डी. सुधीश कुमार और एस. श्रीकुमार, और पूर्व बोर्ड अध्यक्ष एन. वासु शामिल हैं।
सबरीमाला मंदिर और इसका महत्व
सबरीमाला भगवान अयप्पा को समर्पित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो केरल के पथनमथिट्टा जिले में पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर स्थित है। यह दुनिया भर के लाखों भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा, विशेष रूप से मंडलम और मकरविलक्कू सीज़न के दौरान, अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंदिर की संपत्ति और उसकी सुरक्षा देवस्वम बोर्ड की जिम्मेदारी होती है, जो राज्य सरकार के अधीन कार्य करता है।
सबरीमाला मंदिर अपने अनूठे अनुष्ठानों और परंपराओं के लिए जाना जाता है, जिसमें भक्तों के लिए सख्त ब्रह्मचर्य और अन्य नियमों का पालन करना शामिल है। हाल के वर्षों में, मंदिर महिलाओं के प्रवेश जैसे मुद्दों को लेकर भी चर्चा में रहा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई की है।
कानूनी पहलू और जमानत की शर्तें
केरल हाई कोर्ट ने जमानत की शर्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत की शर्तें मनमानी या अत्यधिक कठोर नहीं होनी चाहिए और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। जमानत का मुख्य उद्देश्य आरोपी को विचाराधीन अवधि के दौरान भागने से रोकना और जांच में सहयोग सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें अनुचित रूप से हिरासत में रखना।
सबरीमाला गोल्ड केस में, विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने में देरी ने कई आरोपियों को जमानत का लाभ उठाने में मदद की है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कानूनी प्रक्रिया में समय-सीमा का पालन कितना महत्वपूर्ण है।
आगे की जांच और संभावित परिणाम
हालांकि ए. पद्मकुमार को जमानत मिल गई है, सबरीमाला गोल्ड केस की जांच अभी जारी है। विशेष जांच दल (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले की तह तक जाने के लिए काम कर रहे हैं।
- जांच दल सोने की मात्रा और उसके वास्तविक मूल्य का सटीक आकलन करने के लिए सोने के नमूनों को एकत्र कर रहा है।
- मंदिर के नए गर्भगृह के दरवाजे की स्थापना की भी जांच की जा रही है, जिसमें धोखाधड़ी की आशंका जताई गई है।
- पूर्व मुख्य पुजारी और देवस्वम बोर्ड के अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले से संबंधित सोने और अन्य मंदिर संपत्तियों की हेराफेरी की जांच के संबंध में केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 21 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है।
यह मामला मंदिर की संपत्ति के प्रबंधन और उसमें पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए कड़े निगरानी तंत्र और जवाबदेही की आवश्यकता होगी।
मुख्य बातें:
- पूर्व TDB अध्यक्ष ए. पद्मकुमार को सबरीमाला गोल्ड केस में सांविधिक जमानत मिली।
- यह जमानत द्वारपालक मूर्तियों से सोने की कथित हेराफेरी से संबंधित मामले में है।
- उन्हें पहले गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम से सोने की हेराफेरी के मामले में भी जमानत मिल चुकी है।
- जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित समय सीमा में आरोप पत्र दाखिल न कर पाने के कारण जमानत मिली।
- पद्मकुमार इस मामले में जमानत पाने वाले आठवें आरोपी हैं।
- सबरीमाला मंदिर की संपत्ति की हेराफेरी का यह मामला केरल में काफी चर्चित रहा है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है।
- जांच अभी जारी है और सोने की वास्तविक क्षति का आकलन किया जा रहा है।











