एच.डी. कुमारस्वामी का आरोप: कांग्रेस की गारंटी योजनाओं ने कर्नाटक और अन्य राज्यों की अर्थव्यवस्था को किया कमज़ोर
केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई गारंटी योजनाओं पर तीखा हमला बोला है। उनका दावा है कि इन योजनाओं ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और अन्य राज्यों को भी वित्तीय संकट की ओर धकेल दिया है। कुमारस्वामी ने कहा कि भले ही महिलाओं को ₹2,000 जैसी सहायता राशि आकर्षक लगे, लेकिन जनता को यह समझना चाहिए कि सरकार इसे कैसे वित्तपोषित कर रही है।
आर्थिक बोझ और बढ़ते कर्ज का दावा
कुमारस्वामी ने श्री लंका की आर्थिक तबाही का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन से कर्नाटक भी उसी राह पर जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन गारंटी योजनाओं को पूरा करने के लिए भारी कर्ज ले रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस सरकार ने अब तक ₹7.26 लाख करोड़ का कर्ज जमा कर लिया है, जिससे राज्य के प्रत्येक नागरिक पर कम से कम ₹1 लाख का बोझ पड़ा है। कुमारस्वामी ने इस दावे पर किसी भी मंच पर बहस करने की चुनौती दी है।
“इन गारंटी योजनाओं के प्रभाव से राज्य का खजाना खाली हो गया है। सरकार अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने के लिए संघर्ष कर रही है।”
उन्होंने हिमाचल प्रदेश का भी उदाहरण दिया, जहाँ कांग्रेस ने गारंटी योजनाओं के वादे पर सत्ता हासिल की, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। कुमारस्वामी ने चिंता व्यक्त की कि कर्नाटक भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर सकता है, जहाँ अधिकारियों के वेतन में कटौती की खबरें आ रही हैं।
गारंटी योजनाओं का वित्तीय प्रभाव: एक विश्लेषण
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों ने भी इन चिंताओं को बल दिया है। 2023-24 की रिपोर्टों के अनुसार, पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं – गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, अन्न भाग्य, शक्ति और युवा निधि – ने राज्य के राजस्व व्यय का लगभग 15% हिस्सा लिया। इन योजनाओं के कारण राज्य का राजस्व घाटा ₹9,271 करोड़ तक पहुँच गया, जबकि 2022-23 में राज्य अधिशेष में था। इसके परिणामस्वरूप, राज्य का राजकोषीय घाटा भी ₹46,623 करोड़ (2022-23) से बढ़कर ₹65,522 करोड़ (2023-24) हो गया।
CAG ने यह भी चेतावनी दी है कि इन योजनाओं के कार्यान्वयन से मौजूदा सब्सिडी को तर्कसंगत बनाए बिना राज्य के संसाधनों पर दबाव पड़ेगा और राजकोषीय घाटे व ऋण स्तरों को प्रभावित करेगा। रिपोर्टों से पता चलता है कि 2023-24 में राज्य का राजस्व केवल 1.86% बढ़ा, जबकि व्यय 12.54% बढ़ गया, जिसका मुख्य कारण गारंटी योजनाएं थीं।
कर्नाटक बजट में गारंटी योजनाओं का आवंटन
कर्नाटक के बजट के आंकड़ों से पता चलता है कि गारंटी योजनाओं पर भारी आवंटन किया जा रहा है। 2024-25 के बजट में इन पांचों गारंटी योजनाओं के लिए ₹53,674 करोड़ का प्रस्ताव था, जो 2023-24 के संशोधित अनुमानों से 47% अधिक था। 2025-26 के बजट में, ₹51,034 करोड़ आवंटित किए गए, जो 2024-25 के संशोधित अनुमानों से 1% कम है। हालांकि, यह आवंटन अभी भी राजस्व प्राप्तियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- गृह लक्ष्मी: ₹2,000 प्रति माह महिला मुखिया को। 2023-24 में ₹16,964.40 करोड़ आवंटित।
- गृह ज्योति: 200 यूनिट मुफ्त बिजली। 2023-24 में ₹8,900 करोड़ आवंटित।
- अन्न भाग्य: बीपीएल परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न। 2023-24 में ₹7,344.68 करोड़ आवंटित।
- शक्ति: महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा। 2023-24 में ₹3,200 करोड़ आवंटित।
- युवा निधि: स्नातकों को ₹3,000 और डिप्लोमा धारकों को ₹1,500 बेरोजगारी भत्ता। 2023-24 में ₹88.88 करोड़ आवंटित।
इन योजनाओं के लिए भारी आवंटन के बावजूद, CAG रिपोर्टों ने अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय में कमी की ओर भी इशारा किया है। 2023-24 में, इन योजनाओं ने बुनियादी ढांचे के लिए पूंजीगत व्यय को लगभग ₹5,229 करोड़ तक कम कर दिया।
सरकार का पक्ष और भविष्य की चुनौतियाँ
कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि गारंटी योजनाएं राज्य के खजाने पर एक ‘बोझ’ हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य परिवारों को वित्तीय और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मृत लाभार्थियों के नाम पर लाभ लेने जैसे मामलों को रोका जाएगा।
दूसरी ओर, कुछ आलोचकों का तर्क है कि इन योजनाओं के लिए खर्च किए गए धन को स्कूलों और अस्पतालों में सुधार जैसी आवश्यक सेवाओं में निवेश किया जा सकता था। एच.डी. कुमारस्वामी ने भी इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या ₹2,000 जैसी राशि से किसी परिवार का भरण-पोषण हो सकता है, खासकर बढ़ती महंगाई और करों के बीच।
कर्नाटक सरकार के सामने एक बड़ा संतुलन बनाने की चुनौती है – जनता से किए गए वादों को पूरा करना और साथ ही राज्य की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना। इन गारंटी योजनाओं का दीर्घकालिक प्रभाव और अर्थव्यवस्था पर इनका स्थायी बोझ आने वाले समय में गहन बहस का विषय बना रहेगा।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी का आरोप है कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं ने कर्नाटक और अन्य राज्यों की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
- उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण राज्य पर भारी कर्ज बढ़ रहा है और सरकारी खजाने पर दबाव है।
- CAG की रिपोर्टों ने भी इन योजनाओं के वित्तीय प्रभाव पर चिंता जताई है, जिससे राजस्व और राजकोषीय घाटा बढ़ा है।
- 2023-24 में, पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं पर ₹36,538 करोड़ से अधिक खर्च होने का अनुमान था, जो कुल व्यय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- रिपोर्टों से पता चलता है कि इन योजनाओं के कारण महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे बुनियादी ढांचे में पूंजीगत व्यय कम हुआ है।
- कर्नाटक सरकार ने स्वीकार किया है कि ये योजनाएं ‘बोझ’ हैं, लेकिन उन्हें जारी रखने का वादा किया है।
- आलोचकों का तर्क है कि यह धन अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में निवेश किया जा सकता था।
- कर्नाटक सरकार को सार्वजनिक कल्याण और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।













