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पैक्ड फूड पर लगेगा लाल ‘वॉर्निंग लेबल’: FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया ऐतिहासिक प्रस्ताव

नई दिल्ली: भारत में अत्यधिक चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट युक्त पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों पर लगाम लगाने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक ताजा हलफनामे में खाद्य नियामक ने घोषणा की है कि अस्वास्थ्यकर पैकेज्ड फूड और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों (Highly Sweetened Beverages) के फ्रंट-ऑफ-पैक (पैकेट के सामने) पर लाल रंग का हेक्सागोनल (षट्कोणीय) ‘वॉर्निंग लेबल’ लगाना अनिवार्य किया जाएगा। यह प्रस्ताव देश में तेजी से बढ़ते मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों की महामारी को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है。

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद खाद्य नियामक का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उपभोक्ता संगठनों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि “पूरी दुनिया को यह संदेश जाना चाहिए कि भारत अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य को लेकर अत्यंत गंभीर है।” कोर्ट ने भारत में इजरायल और चिली की तर्ज पर सख्त फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग प्रणाली लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया था। इस न्यायिक दबाव के बाद एफएसएसएआई ने उद्योग निकायों के विरोध को दरकिनार करते हुए यह सख्त मसौदा तैयार किया है。

नए लेबलिंग नियमों के मुख्य बिंदु और मानक

एफएसएसएआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए दिशानिर्देशों के तहत निम्नलिखित प्रमुख नियम लागू किए जाएंगे:

  • लाल हेक्सागोनल चेतावनी प्रतीक: यदि किसी उत्पाद में सैचुरेटेड फैट, शुगर या सोडियम (नमक) में से किन्हीं दो या अधिक पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक होगी, तो पैकेट के सामने स्पष्ट लाल चेतावनी चिह्न लगाना होगा।
  • स्पष्ट घोषणाएं: पैकेट पर ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’, ‘HIGH FAT’ अथवा ‘HIGHLY SWEETENED BEVERAGE’ की स्पष्ट घोषणा देवनागरी और अंग्रेजी में प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी।
  • चरणबद्ध क्रियान्वयन: 100 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय पैकेज्ड फूड उद्योग को तकनीकी समायोजन का समय देने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
  • एकल घटक उत्पादों को छूट: दालें, खाद्यान्न, दूध और शुद्ध खाद्य तेल जैसे एकल-घटक प्राकृतिक उत्पादों को इस वॉर्निंग लेबल से मुक्त रखा गया है।
घटक / पोषक तत्व मौजूदा नियम (बैक-ऑफ-पैक) प्रस्तावित नया नियम (फ्रंट-ऑफ-पैक) उपभोक्ता को सीधा लाभ
अत्यधिक चीनी (High Sugar) पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में न्यूट्रिशन टेबल सामने लाल हेक्सागोनल ‘HIGH SUGAR’ वॉर्निंग लेबल खरीदते समय तुरंत हानिकारक मात्रा की पहचान
अत्यधिक नमक/सोडियम (High Salt) सोडियम की मात्रा केवल मिलीग्राम में दर्ज सामने ‘HIGH SALT’ का स्पष्ट चेतावनी प्रतीक हाई बीपी और किडनी रोगियों के लिए त्वरित सचेतता
सैचुरेटेड फैट (High Fat) बारीक अक्षरों में फैट का विवरण सामने ‘HIGH FAT’ का बोल्ड चेतावनी बॉक्स कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिमों से बचाव
मीठे पेय (Sweetened Drinks) सामान्य ब्रांडिंग और शुगर प्रतिशत ‘HIGHLY SWEETENED BEVERAGE’ का वैधानिक लेबल बच्चों और युवाओं में सॉफ्ट ड्रिंक्स के दुष्प्रभावों पर रोक

भारत में मोटापे और लाइफस्टाइल बीमारियों का संकट

प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ (The Lancet) में प्रकाशित हालिया शोध के अनुसार, यदि खानपान की आदतों और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड पर कड़े नियम नहीं लगाए गए, तो वर्ष 2050 तक लगभग 45 करोड़ (450 मिलियन) भारतीय मोटापे या अधिक वजन की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं। चिकित्सकों और पोषण विशेषज्ञों ने एफएसएसएआई के इस कदम का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे भारतीय जनस्वास्थ्य के इतिहास का मील का पत्थर बताया है。

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