नई दिल्ली: केंद्र सरकार के सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के स्वास्थ्य कल्याण तथा आश्रितों की चिकित्सा सुरक्षा को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने एक ऐतिहासिक और अत्यंत संवेदनशील नीतिगत निर्णय लिया है। मंत्रालय ने 1 सितंबर 2026 को आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी करते हुए केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) और केंद्रीय सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम [CS(MA) Rules 1944] के अंतर्गत गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे आश्रित पुत्रों और भाइयों के लिए आयु सीमा और वैवाहिक स्थिति की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश के तहत सीजीएचएस की स्थायी तकनीकी समिति (Standing Technical Committee – STC) की अनुमोदन शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है, जिससे महंगे प्रत्यारोपण (Implants) और अत्याधुनिक उपचारों की मंजूरी अब क्षेत्रीय स्तर पर ही कुछ ही दिनों में मिल सकेगी।
गंभीर बीमार आश्रितों के लिए आयु और वैवाहिक सीमा में मानवीय छूट
GovtStaff के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध स्वास्थ्य मंत्रालय के परिपत्र के अनुसार, पुराने नियमों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के आश्रित पुत्रों को केवल 25 वर्ष की आयु तक अथवा रोजगार/विवाह होने तक (जो भी पहले हो) ही सीजीएचएस लाभार्थी कार्ड की सुविधा मिलती थी। यदि 25 वर्ष की आयु के बाद कोई आश्रित पुत्र गंभीर रूप से बीमार, कैंसर, लकवा या किसी जानलेवा बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़ जाता था, तो उसे चिकित्सा कवरेज से बाहर कर दिया जाता था, जिससे कर्मचारी परिवारों पर भारी वित्तीय संकट टूट पड़ता था।
नए संशोधित नियमों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकारी सेवक या पेंशनभोगी का पुत्र अथवा अविवाहित/आश्रित भाई किसी गंभीर, असाध्य या जीवन-घातक बीमारी (Critically/Terminally Ill) से पीड़ित है और पूरी तरह कर्मचारी पर आश्रित है, तो उसे 25 वर्ष की आयु के बाद भी आजीवन सीजीएचएस कार्ड की पूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहेंगी। इसके लिए केवल अधिकृत सरकारी मेडिकल बोर्ड या सीएमओ स्तर के विशेषज्ञ चिकित्सक से बीमारी और निर्भरता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
सीजीएचएस नियमों में हुए प्रमुख बदलाव: पुराना बनाम नया नियम
नीचे दी गई तालिका में सीजीएचएस के पुराने नियमों और 1 सितंबर 2026 से लागू हुए नए मानवीय संशोधनों का बिंदुवार तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत है:
| नियम / सेवा घटक | पूर्ववर्ती नियम (Old Provision) | 1 सितंबर 2026 से लागू नया नियम (New Rule) | कर्मचारियों एवं परिवारों को लाभ |
|---|---|---|---|
| आश्रित पुत्रों की पात्रता आयु | अधिकतम 25 वर्ष की आयु तक ही कवरेज | गंभीर बीमारी की दशा में 25 वर्ष की आयु सीमा समाप्त (आजीवन कवरेज) | असाध्य बीमारियों के महंगे इलाज के भारी खर्च से परिवारों को स्थायी सुरक्षा |
| आश्रित भाइयों के लिए नियम | केवल 18 वर्ष (नाबालिग) की आयु तक | गंभीर शारीरिक/मानसिक अशक्तता होने पर पूर्ण वयस्कता में भी कवरेज जारी | परिवार के गंभीर रूप से अक्षम सदस्यों के इलाज का संकट समाप्त |
| एसटीसी (STC) अनुमोदन प्रक्रिया | सभी मामलों की फाइलें निर्माण भवन, नई दिल्ली मुख्यालय भेजी जाती थीं | शक्तियां क्षेत्रीय अपर निदेशकों (Additional Directors – ADs) को विकेंद्रीकृत | इलाज की मंजूरी का समय 3 से 6 महीने से घटकर मात्र 7 से 10 दिन हुआ |
| उच्च-स्तरीय प्रत्यारोपण (Implants) | पेसमेकर, न्यूरो-इम्प्लांट्स व कृत्रिम अंगों के लिए केंद्रीय समिति की अनिवार्यता | शहर/जोनल स्तर की तकनीकी समिति द्वारा कैशलेस अनुमोदन | इमरजेंसी और क्रिटिकल सर्जरी के मामलों में त्वरित अस्पताल भर्ती और उपचार |
एसटीसी (STC) अनुमोदन का विकेंद्रीकरण: फाइलों के चक्कर से मिली मुक्ति
Govt Staff की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के दूसरे बड़े सुधार के तहत स्थायी तकनीकी समिति (Standing Technical Committee) की निर्णय प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर दिया गया है। पूर्व व्यवस्था में पेसमेकर, घुटना/कूल्हा प्रत्यारोपण, कॉक्लियर इम्प्लांट्स, रोबोटिक सर्जरी और हृदय रोगों से संबंधित विशेष चिकित्सा उपकरणों की लागत स्वीकृत कराने के लिए देश भर से फाइलें दिल्ली स्थित सीजीएचएस महानिदेशालय आती थीं, जिससे गंभीर मरीजों को महीनों तक अप्रूवल का इंतजार करना पड़ता था।
1 सितंबर 2026 के नए दिशानिर्देशों के तहत अब प्रत्येक सीजीएचएस शहर और जोनल कार्यालय में क्षेत्रीय अपर निदेशक (AD) की अध्यक्षता में स्थानीय तकनीकी समिति कार्य करेगी, जिसके पास ₹10 लाख तक के विशेष प्रत्यारोपण और गैर-सूचीबद्ध प्रक्रियाओं को मौके पर ही कैशलेस मंजूरी देने का वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार होगा।
DoPT का बड़ा कदम: 8वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन की मांग वित्त मंत्रालय को भेजी
Staff News के प्रशासनिक बुलेटिन के अनुसार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 1 सितंबर 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्र व्यय विभाग (Department of Expenditure, वित्त मंत्रालय) को अग्रसारित किया है। इस पत्र में देश भर के केंद्रीय पेंशनर एसोसिएशनों की उस मांग को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया है, जिसमें 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8cpc.gov.in) के संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToR) में पेंशन संशोधन (Pension Revision) को स्पष्ट रूप से शामिल करने का आग्रह किया गया है।
डीओपीटी ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक 1985 के ‘डी.एस. नकारा बनाम भारत संघ’ फैसले का हवाला देते हुए रेखांकित किया है कि पेंशनरों को किसी भी स्थिति में सेवारत कर्मचारियों से अलग वर्ग नहीं माना जा सकता। अतः 1 जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों के लिए भी नॉशनल पे फिक्सेशन के जरिए पूर्ण पेंशन समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रेलवे बोर्ड का RBE No. 69/2026 आदेश: एससी/एसटी पदोन्नति में अर्हक अंकों की छूट
रेलवे बोर्ड ने भी 1 सितंबर 2026 को आधिकारिक परिपत्र RBE No. 69/2026 जारी किया है, जिसमें विभागीय पदोन्नतियों के दौरान अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के कर्मचारियों के लिए अर्हक अंकों (Qualifying Marks) में छूट के प्रावधानों को संहिताबद्ध किया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा श्रेणियों (Safety Categories) को छोड़कर अन्य सभी गैर-सुरक्षा पदों पर निर्धारित न्यूनतम अर्हक मानकों में नियमानुसार छूट प्रभावी रहेगी, जिससे आरक्षित वर्ग के बैकलॉग पदों को शीघ्रता से भरा जा सके।
निष्कर्ष एवं कर्मचारियों के लिए प्रभाव
1 सितंबर 2026 को जारी किए गए ये प्रशासनिक आदेश केंद्र सरकार के सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीवन में वास्तविक और प्रत्यक्ष सुधार लाने वाले हैं। जहां सीजीएचएस में गंभीर बीमार आश्रितों के लिए आयु सीमा हटने और एसटीसी शक्तियों के विकेंद्रीकरण से लाखों परिवारों को जीवनरक्षक चिकित्सा सुरक्षा मिली है, वहीं 8वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन को लेकर डीओपीटी की सक्रियता ने बुजुर्ग पेंशनरों के भीतर न्याय और आर्थिक सम्मान की नई उम्मीद जगा दी है।













