बेंगलुरु: भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में बदहाल बुनियादी ढांचे को लेकर एक अनोखा मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शहर के पॉश इलाके इंदिरानगर (Indiranagar) की 12वीं मेन रोड के बदहाल फुटपाथ और जानलेवा गड्ढों पर एक कनाडाई व्लॉगर द्वारा बनाए गए व्यंग्यात्मक वीडियो ने नगर निकाय प्रशासन की नींद उड़ा दी। वीडियो वायरल होते ही ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने महज 24 से 48 घंटे के भीतर जेसीबी, ट्रैक्टर और मजदूरों की पूरी टीम तैनात कर उस टूटे रास्ते की त्वरित मरम्मत करवा दी। हालांकि, प्रशासन की इस सुपरफास्ट कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों और करदाताओं में भारी गुस्सा फैल गया है, जो महीनों से इन गड्ढों की शिकायत कर रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
कनाडाई व्लॉगर का तंज: ‘एस्टेरॉयड टकराने से बना गड्ढा’
India Today की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रह रहे लोकप्रिय कनाडाई ट्रैवल व्लॉगर कालेब फ्रीसेन (Caleb Friesen) ने इंदिरानगर की 12वीं मेन रोड का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने पैदल चलने वाले फुटपाथ की बदहाली को बेहद चुटीले अंदाज में पेश किया। सड़क किनारे कंक्रीट के उखड़े स्लैब, निर्माण मलबे के ऊंचे ढेर, खुले नाले और जगह-जगह बने विशालकाय गड्ढों को दिखाते हुए कालेब ने चुटकी ली कि ऐसा लगता है जैसे धरती से कोई क्षुद्रग्रह (Asteroid) टकरा गया हो और अब लोग उस गड्ढे को कचरादान की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
कालेब ने अपनी पोस्ट में उठाया कि इंदिरानगर देश के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल का प्रमुख केंद्र है, जहां अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आता है और दुनिया भर से निवेशक भारतीय संस्थापकों से मिलने पहुंचते हैं। लेकिन इस तकनीकी हब के फुटपाथ किसी युद्धग्रस्त देश जैसे नजर आते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब भारत तकनीक का नेतृत्व कर रहा है, तो इस हाई-टेक शहर में सुरक्षित फुटपाथ तक क्यों नहीं हैं। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया और शहर के युवाओं में वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होते ही जागा प्रशासन: 24 घंटे में एक्शन
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) तुरंत हरकत में आ गई। निकाय ने तत्परता दिखाते हुए 12वीं मेन रोड पर चार ट्रैक्टर, एक जेसीबी और 10 मजदूरों की टीम तैनात कर दी। प्रमुख इंजीनियर सतीश और क्षेत्रीय निरीक्षक विजय हरिदास की देखरेख में काम हुआ और रातों-रात उस गड्ढे को कंक्रीट से समतल कर दिया गया।
प्रशासन ने अराकू कॉफी के सामने फुटपाथ पर पड़े मलबे को हटाया, टूटे स्लैब बदले और पास की दीवार पर ताजा पेंट भी करवा दिया। इसके बाद नगर निकाय और स्थानीय नागरिक समूह ‘वॉकलुरु’ (Walkaluru) ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें अरुण पई मरम्मत के बाद की स्थिति दिखाते नजर आए। कालेब फ्रीसेन ने भी दोबारा उस जगह पहुंचकर पुष्टि की कि जिस गड्ढे पर उन्होंने तंज कसा था, उसे अब पूरी तरह से समतल कर दिया गया है।
पूरे घटनाक्रम और मुख्य तथ्यों का विवरण
इंदिरानगर फुटपाथ विवाद के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद उपजे नागरिक आक्रोश तक के प्रमुख घटनाक्रम का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| घटनाक्रम चरण | प्रमुख विवरण व तथ्य | शामिल पक्ष / अधिकारी | सोशल मीडिया प्रभाव |
|---|---|---|---|
| वायरल वीडियो | इंदिरानगर 12वीं मेन के बदहाल फुटपाथ और गड्ढों पर व्यंग्य | कनाडाई व्लॉगर कालेब फ्रीसेन | सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज और ट्रेंड |
| प्रशासनिक एक्शन | जेसीबी, 4 ट्रैक्टर और 10 मजदूरों से 24 घंटे में मरम्मत | ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) | मरम्मत का आधिकारिक वीडियो जारी हुआ |
| नागरिक प्रतिक्रिया | महीनों पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई न होने पर आक्रोश | बेंगलुरु के करदाता व नागरिक | ‘हमारे यहां भी आओ’ मीम्स की बाढ़ |
| पुराना संदर्भ | सितंबर 2025 में मैजेस्टिक का वीडियो बनने पर आयुक्त पहुंचे थे | पूर्व आयुक्त पी. राजेंद्र चोलन | सफाई कर फुटपाथ पर खाना खाया गया |
| भविष्य की योजना | साल 2027 में ‘टेंडर श्योर’ मानकों के तहत स्थायी पुनर्विकास | कर्नाटक शहरी विकास विभाग | वर्तमान मरम्मत को केवल अस्थायी बताया |
करदाताओं में भारी गुस्सा: ‘क्या एक्शन के लिए विदेशी चेहरा जरूरी?’
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर स्थानीय नागरिकों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों का कहना है कि वे महीनों से नागरिक शिकायत पोर्टल पर शिकायतें दर्ज करा रहे थे और जनप्रतिनिधियों को लगातार टैग कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं जैसे ही एक विदेशी नागरिक ने वीडियो बनाया, पूरी सरकारी मशीनरी कुछ ही घंटों में दौड़ पड़ी।
इंटरनेट पर कई लोगों ने व्यंग्य करते हुए कालेब को अपने-अपने इलाकों में आने का न्योता दिया। यूज़र्स ने लिखा, ‘कृपया व्हाइटफील्ड, सिल्क बोर्ड और एचएसआर लेआउट भी आ जाओ, शायद हमारे गड्ढे भी भर जाएं!’ वहीं कई शहरी जानकारों ने इस काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसे ‘लीपापोती’ करार दिया और कहा कि कंक्रीट का यह पैच पहली बारिश में ही उखड़ जाएगा।
पहले भी हो चुका है ऐसा वाकया: मैजेस्टिक का पुराना किस्सा
यह पहला मौका नहीं है जब कालेब फ्रीसेन के वीडियो से बेंगलुरु प्रशासन में हलचल मची हो। सितंबर 2025 में भी उन्होंने मैजेस्टिक बस स्टैंड इलाके के बदहाल फुटपाथों पर वीडियो बनाया था। उस समय तत्कालीन आयुक्त पी. राजेंद्र चोलन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने न सिर्फ उस इलाके की सफाई करवाई, बल्कि फुटपाथ की स्वच्छता साबित करने के लिए अधिकारियों के साथ वहीं जमीन पर बैठकर खाना भी खाया था।
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और नगर निगम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय महानगरों में नागरिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। देश के प्रमुख टेक हब बेंगलुरु में भारी बजट आवंटन के बावजूद आम नागरिकों को सुरक्षित फुटपाथ के लिए तरसना पड़ता है। कालेब फ्रीसेन ने नागरिकों से अपील की নাস हैं कि वे अपनी समस्याओं को रचनात्मक तरीकों से उठाएं ताकि व्यवस्था में जवाबदेही लाई जा सके। कर्नाटक शहरी विकास विभाग और प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि वर्ष 2027 की शुरुआत में इस पूरे व्यस्त कॉरिडोर का टेंडर श्योर (Tender SURE) प्रोजेक्ट के तहत व्यापक पुनर्विकास किया जाएगा। तब तक यह देखना होगा कि क्या अन्य बदहाल इलाकों को भी सुधार के लिए किसी नए विदेशी वीडियो का इंतजार करना पड़ेगा या स्थानीय नागरिकों की आवाज सुनी जाएगी।













