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बेंगलुरु: विदेशी इन्फ्लुएंसर का वीडियो वायरल होते ही सुधरी सड़क

बेंगलुरु: देश की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु से सोशल मीडिया पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने नगर निकाय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के प्रमुख स्टार्टअप हब इंदिरा नगर के 12वीं मेन रोड (12th Main Indiranagar) पर महीनों से टूटे-फूटे फुटपाथ और गड्ढों की शिकायतें स्थानीय नागरिक लगातार कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। हालांकि, जैसे ही कनाडा के विदेशी कंटेंट क्रिएटर कालेब फ्रीसन (Caleb Friesen) ने इस बदहाल सड़क का व्यंग्यात्मक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) अचानक हरकत में आ गई और महज 24 घंटे के भीतर उस हिस्से की मरम्मत कर दी गई। प्रशासन की इस रातोंरात सक्रियता ने स्थानीय करदाताओं के भीतर तीखा आक्रोश पैदा कर दिया है。

विदेशी इन्फ्लुएंसर के वीडियो में क्या था जिसने हड़कंप मचाया?

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई व्लॉगर कालेब फ्रीसन ने इंदिरा नगर के 12वीं मेन इलाके में पैदल चलते हुए एक विस्तृत वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने फुटपाथ पर बिखरा हुआ मलबा, टूटे और गायब कंक्रीट स्लैब, खुले सीवर, सड़क किनारे बड़े गड्ढे और पेड़ों के आसपास जमा कचरे को बारीकी से दिखाया। फ्रीसन ने वीडियो में चुटकी लेते हुए कहा कि इंदिरा नगर बेंगलुरु का वह इलाका है जहां दुनिया भर से अरबों डॉलर का वेंचर कैपिटल फंड निवेश होता है और नामी टेक कंपनियों के दफ्तर स्थित हैं।

फ्रीसन ने तंज कसते हुए कहा, “शहर के इस इलाके में अरबों डॉलर का निवेश आ रहा है, लेकिन इसके फुटपाथ भी थोड़े प्यार और देखभाल के हकदार हैं।” उन्होंने आगे कहा कि किसी भी अन्य देश में बुनियादी ढांचे की ऐसी खस्ताहाल स्थिति कतई स्वीकार्य नहीं होती। उन्होंने निराशा जताते हुए टिप्पणी की कि वह भारत में नवाचार और विकास को दुनिया के सामने लाने वाले वीडियो बनाते हैं, लेकिन बेंगलुरु के जमीनी इंफ्रास्ट्रक्चर की यह दुर्दशा देखकर दुख होता है। विदेशी निवेशक यहां संस्थापकों से मिलने आते हैं, लेकिन उन्हें सड़क पर इस कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ता है।

इन्फ्लुएंसर वीडियो बनाम नागरिक शिकायतें: घटनाक्रम की तुलना

बेंगलुरु के इंदिरा नगर में वायरल वीडियो के बाद प्रशासन की तेज प्रतिक्रिया और आम नागरिकों की अनसुनी अपीलों के अंतर को नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:

तुलनात्मक बिंदु स्थानीय नागरिकों की शिकायतें विदेशी इन्फ्लुएंसर का वायरल वीडियो
शिकायत का माध्यम आधिकारिक पोर्टल, शिकायत निवारण ऐप, आरडब्ल्यूए पत्र सोशल मीडिया पर छोटा व्यंग्यात्मक वीडियो
प्रशासनिक रिस्पॉन्स टाइम महीनों तक कोई जमीनी कार्रवाई या समाधान नहीं वीडियो वायरल होने के 24 घंटे के भीतर त्वरित एक्शन
कार्यवाही का स्वरूप कार्रवाई के केवल औपचारिक आश्वासन मजदूर भेजकर गड्ढों में कंक्रीट भरकर मरम्मत
प्रचार एवं स्पष्टीकरण नागरिकों को कोई आधिकारिक स्टेटस अपडेट नहीं जीबीए ने मरम्मत कार्य का जवाबी वीडियो जारी किया
सार्वजनिक प्रतिक्रिया टैक्स चुकाने के बावजूद उपेक्षा का अहसास नागरिकों का गुस्सा और व्यंग्यात्मक मीम्स की बाढ़

रातोंरात एक्शन पर फूटा स्थानीय करदाताओं का गुस्सा

Urban Acres की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने मरम्मत का वीडियो जारी किया, नागरिकों का धैर्य जवाब दे गया। स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए ने सवाल उठाया कि क्या अब टैक्सपेयर्स की बात सुनने के लिए विदेशी पासपोर्ट और सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होना जरूरी है? नागरिकों ने कहा कि वे ईमानदारी से भारी प्रॉपर्टी टैक्स, रोड टैक्स और आयकर भरते हैं, लेकिन उनकी महीनों पुरानी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और रेडिट पर बेंगलुरु के लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक नागरिक ने लिखा, “क्या ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी को जगाने के लिए हर बार किसी विदेशी को हमारे फुटपाथों पर कटाक्ष करना पड़ेगा?” कई लोगों ने तंज कसते हुए कालेब फ्रीसन को अपने-अपने इलाकों में आने का न्योता दिया। लोगों ने कमेंट किया, “कृपया व्हाइटफील्ड, सरजापुर, एचएसआर लेआउट और आउटर रिंग रोड भी आइए, ताकि वहां के गड्ढे भी जीबीए को दिखाई दे सकें।” यह विरोध इंटरनेट पर टॉप ट्रेंड बन गया।

मरम्मत की गुणवत्ता पर भी उठे गंभीर सवाल

प्रशासन द्वारा 24 घंटे में की गई इस कथित मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर भी शहरी विशेषज्ञों और नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन ने कोई वैज्ञानिक मरम्मत প্রকৌশल मरम्मत नहीं की है, बल्कि टूटे हुए फुटपाथों और उखड़े पत्थरों के बीच केवल कच्चा कंक्रीट और सीमेंट का घोल डालकर गड्ढों को ढकने की लीपापोती की है。

विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह की फौरी लीपापोती पहली ही बारिश में बह जाएगी। पैदल चलने वालों के लिए उचित ढलान और भूमिगत सीवरेज के ढक्कनों की सही फिटिंग के बिना किया गया यह काम केवल कैमरे पर सफाई दिखाने का प्रयास है। नागरिकों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी से बचने के लिए उठाया गया दिखावटी कदम है।

मैजेस्टिक की घटना की यादें हुईं ताजा

यह पहला मौका नहीं है जब कालेब फ्रीसन के वीडियो ने बेंगलुरु के नगर निकाय को अचानक सक्रिय होने पर मजबूर किया हो। सितंबर 2025 में भी फ्रीसन ने व्यस्ततम इलाके ‘मैजेस्टिक’ में फैली गंदगी और बदहाल फुटपाथों का वीडियो साझा किया था। उस समय भी वीडियो वायरल होते ही निगम आयुक्त और ‘वाकालुरु’ की टीम ने रातभर में इलाके की सफाई कराई थी।

अधिकारियों ने अगली सुबह उसी फुटपाथ पर बैठकर नाश्ता करते हुए अपनी तस्वीरें जारी की थीं ताकि यह साबित किया जा सके कि इलाका साफ हो चुका है। तब भी नागरिकों ने इसे एक दिन का पीआर स्टंट करार दिया था क्योंकि कुछ ही हफ्तों बाद हालात फिर पहले जैसे हो गए थे। अब इंदिरा नगर की घटना ने साबित कर दिया है कि प्रशासनिक तंत्र केवल वायरलिटी के डर से संचालित हो रहा है।

डिजिटल जवाबदेही बनाम जमीनी सुशासन

यह पूरा विवाद केवल एक सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रमुख टेक हब में नागरिक जवाबदेही के संकट को उजागर करता है। जब प्रशासन आधिकारिक चैनलों और आम जनता की लिखित शिकायतों के बजाय सोशल मीडिया एल्गोरिदम और विदेशी प्रभावशाली लोगों के वीडियो पर निर्भर हो जाए, तो यह सुशासन का संकेत नहीं है।

निष्कर्ष: व्यवस्थागत सुधार ही स्थायी समाधान

इंदिरा नगर के 12वीं मेन रोड का यह मामला इस बात की मिसाल है कि सोशल मीडिया शासन की खामियों को कैसे उजागर करता है। हालांकि, कंक्रीट की एक परत बिछा देने से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट खत्म नहीं होता। बेंगलुरु को जरूरत है एक ऐसी सतत और जिम्मेदार नागरिक व्यवस्था की जो हर सड़क और हर करदाता की समस्या को समान गंभीरता से ले, न कि केवल तब जब कोई विदेशी चेहरा उस पर व्यंग्य का आईना दिखाए।

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