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कैबिनेट का बड़ा फैसला: ITLA बनेगी, एक होंगे रेल, सड़क और बंदरगाह

नई दिल्ली: भारत के परिवहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में दशकों पुरानी संस्थागत सीमाओं और विभागीय बिखराव को समाप्त करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) नामक एक शीर्ष विशेष प्रयोजन निकाय (SPV) के गठन को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह नया प्राधिकरण सड़क, रेल, बंदरगाह, शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग और शहरी गतिशीलता से संबंधित तमाम बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स को एक समग्र नेटवर्क के रूप में एकीकृत, मूल्यांकित और ट्रैक करेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की औपचारिक जानकारी देते हुए इसे देश के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को बदलने वाला युगांतरकारी सुधार बताया है。

परिवहन क्षेत्र में बिखराव का अंत: क्यों पड़ी ITLA की जरूरत?

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण और मूल्यांकन अलग-अलग मंत्रालयों की प्राथमिकताओं के आधार पर होता रहा है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे फ्रेट कॉरिडोर, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का विकास परस्पर तालमेल के अभाव में होता था। इससे माल ढुलाई नेटवर्क में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक संपर्क) की भारी कमी रह जाती थी और प्रोजेक्ट्स की लागत में अनावश्यक वृद्धि होती थी。

ITLA की स्थापना का मूल उद्देश्य इस संस्थागत विखंडन को हमेशा के लिए समाप्त करना है। अब देश की परिवहन योजना को टुकड़ों में देखने के बजाय एक ‘सिंगल नेशनल नेटवर्क’ के तौर पर देखा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस केंद्रीयकृत व्यवस्था से देश की लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वर्तमान स्तर से घटाकर वैश्विक मानकों के अनुरूप 8 प्रतिशत तक लाया जाए, जिससे भारतीय व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती मिल सके。

10 वर्षीय नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान और अनिवार्य तकनीकी जांच

The Economic Times Supply Chain की रिपोर्ट के अनुसार, ITLA का प्राथमिक कार्य 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए एक व्यापक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगा। यह मास्टर प्लान देश के सभी प्रमुख परिवहन माध्यमों को एक सूत्र में पिरोएगा। विभिन्न मंत्रालयों की 5 वर्षीय क्षेत्रीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं को इसी मास्टर प्लान के मानकों पर परखा जाएगा, ताकि देश में नई क्षमताएं सिंगल-मोड के बजाय अनिवार्य रूप से मल्टी-मॉडल दृष्टिकोण से विकसित हों。

कैबिनेट के फैसले के तहत ITLA केंद्र सरकार के ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाले सभी प्रमुख परिवहन प्रोजेक्ट्स का तकनीकी मूल्यांकन (Technical Appraisal) करेगी। वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्थाओं के पास रहेगा, लेकिन ₹500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ITLA से तकनीकी क्लीयरेंस और नेटवर्क एकीकरण प्रमाणन लेना अनिवार्य होगा। मंजूरी के बाद भी प्राधिकरण कार्यान्वयन की जमीनी निगरानी करेगा, अड़चनों को दूर करने के लिए समन्वित तंत्र चलाएगा और काम पूरा होने के बाद अनिवार्य प्रभाव आकलन (Impact Assessment) संचालित करेगा。

ITLA की संरचना, अधिकार और प्रमुख कार्यों का आधिकारिक विवरण

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) के प्रमुख दायित्वों, वित्तीय पैमानों और संस्थागत रूपरेखा का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

प्रमुख आयाम ITLA के तहत नई व्यवस्था पूर्व की व्यवस्था राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
योजना दृष्टिकोण 10+ वर्षीय नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान (मल्टी-मॉडल) विभागीय एवं एकल-मोड योजनाएं (सड़क, रेल अलग-अलग) परिवहन साधनों में निर्बाध तालमेल और दोहरीकरण पर रोक
तकनीकी मूल्यांकन सीमा ₹500 करोड़ या अधिक के सभी सरकारी प्रोजेक्ट्स अनिवार्य मंत्रालय स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन गुणवत्ता में एकरूपता और सटीक कनेक्टिविटी डिजाइन
दायरे में शामिल क्षेत्र सड़क, रेल, बंदरगाह, विमानन, जलमार्ग, शहरी मोबिलिटी प्रत्येक मंत्रालय अपने दायरे तक सीमित व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का समग्र विकास
रुकावट निवारण तंत्र समन्वित त्वरित निवारण प्रणाली (Coordinated Resolution) अंतर-मंत्रालयी पत्राचार में देरी परियोजनाओं के समय और लागत में भारी बचत
डेटा एकीकरण नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी (NTDR) की स्थापना बिखरे हुए विभागीय डेटाबेस रीयल-टाइम फ्रेट ट्रैकिंग और वैज्ञानिक नीतियां
पोस्ट-प्रोजेक्ट ऑडिट अनिवार्य प्रभाव आकलन (Impact Assessment) सीमित या तदर्थ समीक्षा सरकारी निवेश पर जवाबदेही सुनिश्चित

नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी (NTDR): डिजिटल लॉजिस्टिक्स का नया केंद्र

ITLA की एक और महत्वपूर्ण विशेषता एक विशाल नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी (NTDR) का निर्माण करना है। यह डेटा प्लेटफॉर्म देश भर में होने वाली माल और यात्री आवाजाही का रीयल-टाइम डिजिटल नक्शा तैयार करेगा। इसके लिए जीएसटी नेटवर्क के ई-वे बिल, टोल प्लाजा के फास्टैग (FASTag), वाहन (Vahan) एवं सारथी डेटाबेस, रेलवे के फ्रेट ऑपरेशंस सिस्टम और जीपीएस ट्रैकिंग से आंकड़े जुटाए जाएंगे。

इस एकीकृत डेटाबेस से नीति-निर्माताओं को यह सटीक जानकारी मिलेगी कि देश के किस औद्योगिक गलियारे या हाईवे पर दबाव अधिक है और कहां रेलवे या जलमार्गों की खाली क्षमता उपलब्ध है। इससे माल ढुलाई को सबसे सस्ते, तेज और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम की ओर मोड़ा जा सकेगा, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की समग्र दक्षता में बड़ा सुधार होगा और परिचालन लागत घटेगी。

पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को मिलेगा नया बल

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान और 2022 में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) लागू की थी। गतिशक्ति ने डिजिटल प्लानिंग में अहम भूमिका निभाई, लेकिन प्रोजेक्ट्स के जमीनी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एक वैधानिक शीर्ष प्राधिकरण की कमी महसूस की जा रही थी। ITLA उस प्रशासनिक शून्य को भरेगा और गतिशक्ति विजन को लागू करने वाली सर्वोच्च संस्था के रूप में कार्य करेगा。

उद्योग जगत के प्रमुख संगठनों—जैसे सीआईआई (CII), फिक्की (FICCI) और एसोचैम—ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क के मुकाबले रेलवे से ढुलाई लगभग 40 प्रतिशत और जलमार्गों से 60 प्रतिशत सस्ती होती है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी अनिवार्य होने से भारतीय विनिर्माताओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई मजबूती मिलेगी。

निष्कर्ष: आधुनिक बुनियादी ढांचे और विकसित भारत का रोडमैप

संक्षेप में कहा जाए तो ITLA का गठन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रशासनिक सुधारों का बड़ा मील का पत्थर है। अलग-अलग कार्य करने वाले मंत्रालयों को एक एकीकृत ढांचे के तहत लाकर और ₹500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स की सख्त तकनीकी निगरानी तय करके केंद्र सरकार ने भविष्य के आधुनिक भारत की मजबूत नींव रख दी है। यह प्राधिकरण न केवल सरकारी धन की बचत करेगा, बल्कि देश के नागरिकों और उद्योगों को विश्वस्तरीय, तेज और किफायती लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी प्रदान करेगा。

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