नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों, रेलवे कर्मियों, रक्षा असैन्य कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही की सामान्य भविष्य निधि (GPF) ब्याज दरों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Budget Division) ने 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक की अवधि के लिए जीपीएफ तथा अन्य समान भविष्य निधियों पर ब्याज दर का औपचारिक संकल्प जारी कर दिया है। Department of Economic Affairs आधिकारिक संकल्प के अनुसार, सरकार ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए भी जीपीएफ ब्याज दर को 7.1 प्रतिशत (Seven point one percent) पर यथावत बनाए रखने का निर्णय लिया है। StaffNews GPF Interest Rate Q3 2026-27 विश्लेषण के मुताबिक, यह लगातार 19वीं तिमाही है जब सामान्य भविष्य निधि की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 7.1% पर स्थिर रखा गया है。
किन 10 प्रमुख सरकारी निधियों पर लागू होगी 7.1% ब्याज दर
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी वैधानिक संकल्प के अनुसार, यह ब्याज दर केवल केंद्रीय नागरिक कर्मचारियों के जीपीएफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली सभी 10 समान भविष्य निधियों पर प्रभावी होगी। GovtStaff GPF Interest Rate आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख निधियों के अंशधारकों को इस तिमाही में 7.1% की दर से ब्याज मिलेगा:
1. सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं) – GPF (Central Services)
2. अंशदायी भविष्य निधि (भारत) – Contributory Provident Fund (India)
3. अखिल भारतीय सेवाएं भविष्य निधि – All India Services Provident Fund (AISPF)
4. राज्य रेलवे भविष्य निधि – State Railway Provident Fund (SRPF)
5. सामान्य भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं) – GPF (Defence Services)
6. भारतीय आयुध विभाग भविष्य निधि – Indian Ordnance Department Provident Fund
7. भारतीय आयुध कारखाना कामगार भविष्य निधि – Ordnance Factories Workmen’s PF
8. भारतीय नौसेना डॉकयार्ड कामगार भविष्य निधि – Naval Dockyard Workmen’s PF
9. रक्षा सेवाएं अधिकारी भविष्य निधि – Defence Services Officers Provident Fund
10. सशस्त्र बल कार्मिक भविष्य निधि – Armed Forces Personnel Provident Fund
विभिन्न अंशदान स्तरों पर ब्याज और परिपक्वता राशि की गणना (तालिका)
जीपीएफ नियमों के अनुसार, ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है। महीने के 10वें दिन की समाप्ति और महीने के अंतिम दिन के बीच खाते में बची न्यूनतम शेष राशि पर ब्याज की गणना होती है, जिसे वित्तीय वर्ष के अंत (31 मार्च) को खाते में क्रेडिट किया जाता है। Upstox GPF Interest Rate विश्लेषण के अनुसार, विभिन्न मासिक अंशदान स्तरों पर 7.1% ब्याज दर के आधार पर वार्षिक संचय और अनुमानित कोष का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| मासिक जीपीएफ अंशदान | वार्षिक कुल जमा राशि | वार्षिक ब्याज (7.1% दर पर) | 5 वर्ष बाद अनुमानित संचित फंड | 10 वर्ष बाद अनुमानित कुल फंड |
|---|---|---|---|---|
| ₹5,000 प्रति माह | ₹60,000 | ₹2,308 | ₹3,60,450 | ₹8,68,200 |
| ₹10,000 प्रति माह | ₹1,20,000 | ₹4,615 | ₹7,20,900 | ₹17,36,400 |
| ₹15,000 प्रति माह | ₹1,80,000 | ₹6,923 | ₹10,81,350 | ₹26,04,600 |
| ₹25,000 प्रति माह | ₹3,00,000 | ₹11,538 | ₹18,02,250 | ₹43,41,000 |
| ₹35,000 प्रति माह | ₹4,20,000 | ₹16,154 | ₹25,23,150 | ₹60,77,400 |
| ₹41,666 प्रति माह (₹5 लाख सीमा) | ₹5,00,000 | ₹19,230 | ₹30,03,750 | ₹72,35,000 |
₹5 लाख की वार्षिक जमा सीमा और आयकर नियम 9D का प्रभाव
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जीपीएफ में अंशदान करते समय आयकर नियमों का ध्यान रखना अनिवार्य है। वित्त अधिनियम 2021 के तहत लागू किए गए आयकर नियम 9D के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में ₹5,00,000 से अधिक राशि अपने जीपीएफ खाते में जमा करता है, तो ₹5 लाख से अधिक के अतिरिक्त अंशदान पर अर्जित ब्याज कर-योग्य (Taxable) हो जाता है。
इस नियम के क्रियान्वयन हेतु आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) और वेतन एवं लेखा कार्यालय (PAO) द्वारा प्रत्येक कर्मचारी के जीपीएफ खाते में दो अलग-अलग लेजर बनाए जाते हैं: कर-मुक्त खाता (Non-Taxable Account) और कर-योग्य खाता (Taxable Account)। ₹5 लाख तक का अंशदान पूरी तरह कर-मुक्त रहता है, जबकि उससे अधिक की राशि पर मिले ब्याज को कर्मचारी की ‘अन्य स्रोतों से आय’ मानकर टैक्स स्लैब अनुसार टीडीएस (TDS) काटा जाता है। अतः वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि कर्मचारी अपना मासिक अंशदान ₹41,666 के आसपास रखें ताकि ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त रहे。
कर्मचारी यूनियनों की 8% से 8.5% ब्याज दर की पुरानी मांग
यद्यपि 7.1 प्रतिशत की दर बाजार की तुलना में सुरक्षित है, लेकिन नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जेसीएम (NC-JCM), ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (AIRF) और रक्षा कर्मचारी संगठनों ने लगातार ब्याज दर में वृद्धि की मांग दोहराई है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि हाल के महीनों में खुदरा महंगाई सूचकांक (CPI-IW) बढ़कर 154.4 अंक तक पहुंच गया है, जिससे दैनिक जीवन यापन की लागत में भारी वृद्धि हुई है。
यूनियनों ने रेखांकित किया है कि सरकार की अन्य लघु बचत योजनाओं जैसे वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) और सुकन्या समृद्धि योजना में 8.2 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। यहां तक कि वाणिज्यिक बैंकों की सावधि जमा (FD) दरें भी 7.5% से 7.8% के मध्य हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 1990 के दशक में जीपीएफ पर 12% तक ब्याज मिलता था, जो धीरे-धीरे घटकर 2019 में 8% और 2020 में 7.1% पर आ गया। कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए इस दर को कम से कम 8.0% से 8.5% किया जाना चाहिए。
इसके अतिरिक्त पेंशन विभाग ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों को ई-एचआरएमएस (e-HRMS) और भविष्य पोर्टल के माध्यम से जीपीएफ ई-पासबुक की डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब कर्मचारी रियल-टाइम आधार पर अपने मासिक अंशदान, ब्याज संचय और निकासी इतिहास की ऑनलाइन निगरानी कर सकते हैं, जिससे सेवानिवृत्ति के समय अंतिम भुगतान में किसी प्रकार का विलंब नहीं होता है。
GPF अग्रिम (Advance) और आहरण (Withdrawal) के बदले हुए नियम
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPW) द्वारा हाल के वर्षों में जीपीएफ से अग्रिम और गैर-वापसी योग्य आहरण (Non-Refundable Withdrawal) के नियमों को अत्यधिक सरल बना दिया गया है। कर्मचारी अपने 15 वर्ष की सेवा पूर्ण होने अथवा सेवानिवृत्ति के 10 वर्ष शेष रहने पर विभिन्न अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए खाते में जमा कुल राशि का 75% से 90% तक निकाल सकते हैं。
इन आवश्यकताओं में बच्चों की उच्च शिक्षा, विवाह, गंभीर बीमारी का उपचार तथा मकान निर्माण या आवासीय भूखंड की खरीद शामिल है। संशोधित नियमों के तहत किसी भी प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है और कर्मचारी के स्व-प्रमाणन (Self-Declaration) के आधार पर ही आहरण स्वीकृत किया जाता है। साथ ही कार्यालयाध्यक्ष के लिए अनिवार्य किया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में 15 दिनों के भीतर तथा चिकित्सा आपात स्थिति में अधिकतम 7 दिनों के भीतर आहरण राशि कर्मचारी के बैंक खाते में अंतरित कर दी जाए。













