नई दिल्ली: देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए केंद्र सरकार माल एवं सेवा कर (GST) कानून से टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकारों को समाप्त करने की तैयारी में है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के नौ साल बाद यह अब तक का सबसे अहम प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। आगामी 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ाना, निवेशकों के विश्वास को मजबूत करना और कर अधिकारियों द्वारा कानून के दुरुपयोग व उत्पीड़न की आशंकाओं को खत्म करना है।
टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों पर रोक का प्रस्ताव
The Indian Express की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्यों के बीच पिछले आठ-नौ महीनों से शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा था। व्यापारी संगठनों के फीडबैक के आधार पर जीएसटी अपराधों को गैर-आपराधिक (Decriminalise) बनाने पर सहमति बन चुकी है। जीएसटी कानून के तहत कॉर्पोरेट अधिकारियों की गिरफ्तारी को उद्योग जगत ने लंबे समय से अनावश्यक उत्पीड़न बताया था।
वर्तमान में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (CGST Act) की धारा 69 टैक्स कमिश्नर को अधिकार देती है कि यदि उसके पास “विश्वास करने का ठोस कारण” है कि किसी व्यक्ति ने फर्जी बिलिंग या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी की है, तो वह सीधे गिरफ्तारी का आदेश दे सकता है। हालांकि, यह गिरफ्तारी साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए थी, लेकिन व्यवहार में सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से बैंकिंग और बीमा कंपनियों के अधिकारियों को मुकदमों के डर से हिरासत में लेने के मामले सामने आए।
जीएसटी अपराध और गिरफ्तारी का आधिकारिक डेटा
जीएसटी लागू होने के बाद से केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा दर्ज किए गए अपराधों और की गई गिरफ्तारियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:
| वित्तीय वर्ष / श्रेणी | दर्ज जीएसटी अपराध मामले | केंद्रीय स्तर पर कुल गिरफ्तारियां | प्रमुख उल्लंघन की प्रकृति | प्रस्तावित नया विधिक ढांचा |
|---|---|---|---|---|
| 2021-22 से 2024-25 | 72,393 मामले | 887 गिरफ्तारियां | फर्जी बिलिंग, म्यूल खाते और अवैध आईटीसी | टैक्स अफसरों से गिरफ्तारी अधिकार समाप्त |
| धारा 69 (CGST Act) | कमिश्नर की लिखित मंजूरी | असीमित विवेकाधिकार | बिना अदालती वारंट के सीधे हिरासत | प्रावधान पूर्ण रूप से विलोपित होगा |
| धारा 132 (CGST Act) | ₹2 करोड़ से अधिक की चोरी | गैर-जमानती एवं संज्ञेय | टैक्स संग्रह के बाद 3 माह तक जमा न करना | केवल आर्थिक पेनल्टी व ब्याज वसूली |
| धोखाधड़ी पर कानूनी कार्रवाई | विशिष्ट जीएसटी अदालतें | विभागीय कार्रवाई | फर्जी कंपनियां और संगठित सिंडिकेट | भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस |
| प्रत्यक्ष कर तुलना (CBDT) | आयकर वसूली नियम | 1 अप्रैल 2026 से लागू | डिफॉल्ट पर गिरफ्तारी व नजरबंदी बंद | अप्रत्यक्ष कर में समान सुधार लागू होगा |
गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अब कैसे होगी कार्रवाई?
Livemint की रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी से गिरफ्तारी का अधिकार हटने का यह मतलब नहीं है कि संगठित कर चोरों को छूट मिलेगी। यदि कोई व्यक्ति जाली दस्तावेजों या फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने का अपराध करता है, तो उसके खिलाफ सामान्य आपराधिक कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई होगी।
प्रस्तावित व्यवस्था में टैक्स अधिकारी किसी भी व्यापारी को सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे। आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के लिए अदालत से औपचारिक वारंट लेना अनिवार्य होगा। जीएसटी के सामान्य मामलों में धारा 122 के तहत वित्तीय जुर्माना, धारा 50 के तहत ब्याज और कानूनी टैक्स वसूली के जरिए ही मामलों का निपटारा किया जाएगा। इससे ईमानदार करदाताओं के मन से उत्पीड़न का भय खत्म होगा।
वैट प्रणाली की तर्ज पर लौटी पुरानी सुरक्षा व्यवस्था
जीएसटी से गिरफ्तारी का प्रावधान हटने के बाद यह व्यवस्था 2017 से पहले लागू मूल्य वर्धित कर (VAT) प्रणाली के समान हो जाएगी। दिसंबर 2016 में आयोजित जीएसटी काउंसिल की पांचवीं बैठक में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों ने गिरफ्तारी की शक्तियों पर आपत्ति जताई थी। उस समय राज्यों ने कहा था कि वैट कानून में टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति नहीं थी और केवल गंभीर मामलों में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाती थी।
राज्यों का मानना था कि टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्तियां देना व्यापारिक सुगमता के खिलाफ है। यद्यपि यह अधिकार 2 करोड़ रुपये से अधिक की गंभीर टैक्स चोरी तक सीमित रखने का दावा किया गया था, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर इसका उपयोग करदाताओं पर दबाव बनाने के हथियार के रूप में होने लगा था।
प्रत्यक्ष करों के बाद अप्रत्यक्ष कर में विधिक सुधार
यह सुधार कर व्यवस्था को अपराध-मुक्त बनाने की सरकारी नीति का हिस्सा है। इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर नियमों में संशोधन किया था। सीबीडीटी ने आयकर (चौथा संशोधन) नियम, 2026 के जरिए टैक्स डिफॉल्ट के मामलों में कर अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधानों को 1 अप्रैल 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से समाप्त कर दिया था।
प्रत्यक्ष करों के बाद अब अप्रत्यक्ष कर में भी यही सुधार लागू किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल कर विवादों को आपराधिक मामलों की तरह निपटाने की मानसिकता त्यागना आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है। इससे घरेलू और विदेशी कंपनियों के प्रबंधन में भरोसा बढ़ेगा और निवेश का प्रवाह तेज होगा।
संसद के शीतकालीन सत्र में संशोधन विधेयक लाने की योजना
जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्यों की सहमति मिलने के बाद केंद्र सरकार इसे कानूनी रूप देगी। सूत्रों के अनुसार, संसद के आगामी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक के जरिए सीजीएसटी कानून की धारा 69 और 132 के संबंधित प्रावधानों को संशोधित किया जाएगा।
साथ ही, राज्य सरकारों को भी अपने राज्य जीएसटी (SGST) कानूनों में समान संशोधन करने होंगे ताकि दोनों स्तरों पर एक समान ढांचा प्रभावी मास्टर हो सके। उद्योग जगत के शीर्ष संगठनों सीआईआई (CII), फिक्की (FICCI) और एसोचैम ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम बताया है।
निष्कर्ष: भयमुक्त कर प्रणाली और आर्थिक प्रगति की नई दिशा
जीएसटी कानून से टैक्स अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकारों को समाप्त करने का निर्णय भारत के कर सुधारों के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। 7 अक्टूबर 2026 को जीएसटी काउंसिल में होने वाला यह फैसला कर व्यवस्था को भयमुक्त बनाने और नागरिक-प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत करने का सशक्त प्रयास है। जब टैक्स अधिकारियों के हाथ से मनमाने ढंग से हिरासत में लेने का हथियार हटेगा, तो कर प्रशासन में पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा। यह सुधार न केवल व्यापारियों को राहत देगा, बल्कि भारत को वैश्विक निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।













