नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में महत्वपूर्ण वृद्धि को औपचारिक मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कराना और दलहन व तिलहन की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को गति देना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के यातायात प्रबंधन और देश के हरित ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई युगांतरकारी राष्ट्रीय योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है。
रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी: कुसुम में रिकॉर्ड उछाल
आकाशवाणी समाचार (News On AIR) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि चालू सत्र में सबसे अधिक पूर्ण वृद्धि कुसुम (Safflower) के एमएसपी में की गई है। कुसुम के समर्थन मूल्य में ₹675 प्रति क्विंटल की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इसका नया भाव बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गया है। यह पिछले विपणन वर्ष की तुलना में 10.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय छलांग है, जो किसानों को इस पारंपरिक तिलहन की ओर आकर्षित करेगी。
वहीं प्रमुख तिलहन फसल सरसों और रेपसीड (Mustard) के समर्थन मूल्य में ₹413 प्रति क्विंटल (6.7 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसका भाव ₹6,613 प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ है। दलहन श्रेणी में मसूर दाल (Lentil) के एमएसपी में ₹390 प्रति क्विंटल (5.6 प्रतिशत) का इजाफा कर इसे ₹7,390 प्रति क्विंटल किया गया है। खाद्यान्न फसलों में जौ (Barley) का मूल्य ₹136 बढ़ाकर ₹2,286 प्रति क्विंटल, चने (Gram) का मूल्य ₹83 बढ़ाकर ₹5,958 प्रति क्विंटल तथा मुख्य रबी फसल गेहूं (Wheat) का एमएसपी ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल तय किया गया है。
रबी फसलों की नई एमएसपी और लागत पर लाभ की आधिकारिक तालिका
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, विपणन सत्र 2027-28 के लिए रबी फसलों के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य, उत्पादन लागत और किसानों को मिलने वाले अनुमानित लाभ का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में विस्तृत रूप से प्रस्तुत है:
| फसल का नाम (Rabi Crop) | सत्र 2026-27 एमएसपी (₹/क्विंटल) | सत्र 2027-28 नया एमएसपी (₹/क्विंटल) | कुल वृद्धि (₹ प्रति क्विंटल) | उत्पादन लागत पर शुद्ध मार्जिन (%) |
|---|---|---|---|---|
| गेहूं (Wheat) | ₹2,585 | ₹2,610 | +₹25 | 106% (सर्वाधिक लाभ मार्जिन) |
| सरसों एवं तोरिया (Rapeseed & Mustard) | ₹6,200 | ₹6,613 | +₹413 | 96% लाभ मार्जिन |
| मसूर दाल (Lentil / Masur) | ₹7,000 | ₹7,390 | +₹390 | 92% लाभ मार्जिन |
| चना (Gram) | ₹5,875 | ₹5,958 | +₹83 | 59% लाभ मार्जिन |
| जौ (Barley) | ₹2,150 | ₹2,286 | +₹136 | 58% लाभ मार्जिन |
| कुसुम (Safflower) | ₹6,540 | ₹7,215 | +₹675 | 50% लाभ मार्जिन |
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश और लागत पर 50 से 106% तक मुनाफा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति स्पष्ट है कि अन्नदाता को उसकी उपज की औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत या उससे अधिक का निश्चित लाभ मिलना चाहिए। केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई ऐतिहासिक घोषणा के अनुरूप इस बार भी सभी छह अनिवार्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में उत्पादन लागत के मुकाबले 50 से लेकर 106 प्रतिशत तक का शुद्ध मुनाफा सुनिश्चित किया गया है。
गेहूं उगाने वाले किसानों को उनकी लागत पर सबसे ज्यादा 106 प्रतिशत का मुनाफा मिलेगा। इसके बाद सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चने पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत तथा कुसुम पर 50 प्रतिशत का गारंटीड मार्जिन मिलेगा। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक में सरकारी खरीद में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान 3,715 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान केवल 2,254 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई थी। इसी अवधि में गेहूं किसानों को एमएसपी के रूप में ₹7.31 लाख करोड़ का भुगतान किया गया, जो पिछली सरकार के ₹2.56 लाख करोड़ से लगभग तीन गुना अधिक है。
दिल्ली के लिए ₹1,789 करोड़ का इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम मंजूर
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बढ़ते यातायात संकट से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तुत ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत करों सहित ₹1,789 करोड़ से अधिक होगी। यह पूरी प्रणाली दिल्ली के 42 प्रमुख और व्यस्ततम ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगी। परियोजना को आगामी 24 महीनों के भीतर तीन चरणों में पूरी तरह लागू किया जाएगा, जिसके बाद अगले पांच वर्षों तक इसका संचालन और रखरखाव किया जाएगा。
वर्तमान समय में दिल्ली में 71 लाख से अधिक पंजीकृत सक्रिय वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। वाहनों की इस तीव्र वृद्धि ने पारंपरिक सड़क बुनियादी ढांचे की क्षमता पर भारी दबाव डाला है। नया आईटीएमएस प्रोजेक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेंसर, स्मार्ट कैमरे और रियल-टाइम डेटा का उपयोग करेगा, जिससे वास्तविक यातायात दबाव के आधार पर ट्रैफिक सिग्नलों का समय अपने आप समायोजित हो सकेगा और नागरिकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी。
पीएम-धारा योजना: हरित ऊर्जा ग्रिड और बैटरी स्टोरेज को बड़ा संबल
ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘पीएम-धारा’ (PM-DHARA) योजना को मंजूरी दी है। यह राष्ट्रव्यापी योजना राज्यों के भीतर अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली को मजबूत करने के लिए तैयार की गई है। इस बुनियादी ढांचे के माध्यम से विभिन्न राज्यों में उत्पादित 135 गीगावाट (GW) तक की नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड में आसानी से समाहित और वितरित किया जा सकेगा。
इसके अतिरिक्त ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने और गैर-सौर घंटों में बिजली की मांग पूरी करने के लिए 50 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की तैनाती की जाएगी। यह आधुनिक व्यवस्था ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव और पीक-ऑवर कटौती की समस्या को हल करेगी, जिससे 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति मिलेगी。
निष्कर्ष: ग्रामीण विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का संतुलित रोडमैप
संक्षेप में कहा जाए तो केंद्रीय कैबिनेट के ये बहुप्रतीक्षित फैसले देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को नई दिशा प्रदान करते हैं। एक तरफ जहां रबी फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि से अन्नदाताओं की आय में सुधार होगा और दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली का स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और पीएम-धारा ग्रिड परियोजना देश के आधुनिक और सतत विकास के बुनियादी ढांचे को सशक्त करेंगे। सरकार का यह संतुलित दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के निर्माण की दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम सिद्ध होगा。













