मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को चौतरफा भारी बिकवाली का तांडव देखने को मिला, जिससे दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मच गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट में अचानक 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का $104 प्रति बैरल के पार निकलना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार आक्रामक बिकवाली ने घरेलू बाजार की कमर तोड़ दी। कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत का भीषण नुकसान झेलकर 22,231.80 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी फिसलकर 22,179.90 के नए 52-सप्ताह के निचले स्तर तक चला गया था。
निवेशकों की संपत्ति में ₹10.93 लाख करोड़ का भारी नुकसान
The Times of India की लाइव बाजार रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को मची भारी भगदड़ के कारण बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹10.93 लाख करोड़ घटकर ₹438 लाख करोड़ के स्तर पर आ गया। यह चालू वित्त वर्ष में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों की संपत्ति में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में तो इससे भी अधिक बेरहम बिकवाली देखी गई, जहां निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.53 प्रतिशत टूटा और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2.34 प्रतिशत की गहरी गिरावट दर्ज की गई। इसने खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो को गंभीर चोट पहुंचाई है。
मार्केट क्रैश का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और कमोडिटीज की स्थिति
गुरुवार को 8 अक्टूबर 2026 के कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख वित्तीय संकेतकों, सेक्टोरल सूचकांकों और कमोडिटी बाजार में हुए व्यापक उतार-चढ़ाव का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | क्लोजिंग स्तर (8 अक्टूबर 2026) | पिछला बंद (7 अक्टूबर 2026) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार पर प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 71,593.24 | 72,638.70 | -1,045.46 अंक (-1.44%) | कारोबार के दौरान 1,113 अंक तक का गोता |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 22,231.80 | 22,603.05 | -371.25 अंक (-1.64%) | 22,179.90 का 52-सप्ताह का नया निचला स्तर छुआ |
| निफ्टी मेटल इंडेक्स | 8,940.15 | 9,269.20 | -3.55% | कमोडिटी मंदी और वैश्विक मांग की सुस्ती |
| निफ्टी रियल्टी इंडेक्स | 912.40 | 942.15 | -3.16% | आरबीआई ब्याज दर बढ़ोतरी से होम लोन महंगा होने का डर |
| निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स | 10,480.20 | 10,751.10 | -2.52% | क्रूड $104 पार होने से रिफाइनिंग मार्जिन पर चोट |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $104.47 / बैरल | $100.18 / बैरल | +4.25% उछाल | हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में आपूर्ति संकट |
| डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) | $91.95 / बैरल | $88.28 / बैरल | +4.16% उछाल | ऊर्जा संकट से वैश्विक स्तर पर महंगाई का खतरा |
| भारतीय रुपया (USD / INR) | ₹96.75 प्रति डॉलर | ₹96.35 प्रति डॉलर | -40 पैसे की गिरावट | विदेशी फंड्स की आक्रामक बिकवाली और डॉलर की मजबूती |
| विदेशी निवेशक (FII बिकवाली) | -₹6,121.37 करोड़ | शुद्ध बिकवाल | भारी निकासी जारी | उभरते बाजारों से अमेरिकी बॉन्ड में पूंजी का पलायन |
आरबीआई का रेट हाइक झटका और कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का रुख
दलाल स्ट्रीट पर मचे इस कोहराम की सबसे मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का अप्रत्याशित और सख्त फैसला रहा। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने आम सहमति से रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.25% से 5.50% करने का निर्णय लिया। यह बीते लगभग चार वर्षों में भारत में नीतिगत ब्याज दरों में की गई पहली बढ़ोतरी है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत मुद्रा को न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग (Calibrated Tightening) कर दिया है。
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में किसी भी कटौती की संभावना समाप्त हो चुकी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि कच्चे तेल के $100 के पार चले जाने और अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते भारत में आयातित महंगाई (Imported Inflation) का खतरा बेहद गंभीर हो गया है। साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के ₹96.75 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर चले जाने से चालू खाते का घाटा और मुद्रा दबाव दोनों बढ़ रहे हैं। इस नीतिगत सख्ती का सीधा असर बैंकिंग, एनबीएफसी, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे ब्याज दर संवेदी क्षेत्रों पर पड़ा है, क्योंकि लोन महंगे होने से मांग पर प्रतिकूल असर पड़ेगा。
कच्चे तेल में $104 की आग और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट
Kotak Neo की क्लोजिंग बेल रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में गहराता संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों की ताजा लहर के चलते तेल की समुद्री आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हुई है। इस वैश्विक जलमार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और ईंधन आपूर्ति गुजरती है。
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड दिसंबर वायदा अनुबंध 4.25 प्रतिशत की तेज छलांग लगाकर 104.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 91.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी घरेलू तेल खपत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का $100 से ऊपर टिकना भारत के वित्तीय संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे तेल विपणन कंपनियों का रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन सिकुड़ता है, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है और देश की समग्र विनिर्माण लागत में इजाफा होता है。
सेक्टरवार प्रदर्शन: मेटल, रियल्टी और एविएशन की जबरदस्त पिटाई
गुरुवार के सत्र में बिकवाली इतनी व्यापक थी कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स भारी नुकसान में बंद हुए। सबसे ज्यादा मार मेटल और रियल्टी शेयरों पर पड़ी। निफ्टी मेटल इंडेक्स 3.55 प्रतिशत टूट गया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.3 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बने रहने और वैश्विक औद्योगिक मांग में सुस्ती के डर से अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) 5.36 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और टाटा स्टील में 2 से 3.5 प्रतिशत तक की तीव्र गिरावट दर्ज की गई。
एविएशन सेक्टर में जेट फ्यूल (ATF) की लागत आसमान छूने की आशंका से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयर 3.38 प्रतिशत टूट गए। इसके अलावा सिगरेट और एफएमसीजी दिग्गज आईटीसी (ITC) में 3.88 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जबकि अदाणी पोर्ट्स 3.78 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। बिजली क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन में 2.70 प्रतिशत और देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) में 2.52 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक और मारुति सुजुकी जैसे दिग्गज शेयर भी 1.5 से 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए。
आईटी शेयरों ने संभाला मोर्चा: टीसीएस और इंफोसिस में दिखी मजबूती
बाजार में मची इस चौतरफा तबाही के बीच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जिसने मजबूती का परिचय दिया और बेंचमार्क इंडेक्स को और बड़ी गिरावट से बचाया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होकर ₹96.75 तक फिसलने से निर्यात पर निर्भर आईटी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद बंधी है। इसके अलावा गुरुवार शाम को आने वाले देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दूसरी तिमाही के नतीजों से पहले तकनीकी शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली。
आईटी पैक में इंफोसिस (Infosys), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टीसीएस के शेयरों में 1.5 से 2.2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक (Axis Bank) और कंज्यूमर दिग्गज टाइटन कंपनी (Titan) ने भी हरे निशान में बंद होकर कुछ हद तक राहत प्रदान की। हालांकि, इन कुछ शेयरों की तेजी व्यापक बाजार की सुनामी को रोकने में पूरी तरह नाकाफी साबित हुई, क्योंकि बीएसई पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो बेहद खराब रहा और प्रत्येक 1 चढ़ने वाले शेयर के मुकाबले 4 शेयर गिरकर बंद हुए。
मार्केट एक्सपर्ट्स का तकनीकी विश्लेषण और निवेशकों के लिए सलाह
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च हेड अजित मिश्रा के अनुसार, निफ्टी ने अप्रैल 2026 के अपने पूर्ववर्ती निचले स्तर 22,182.55 को दोबारा टेस्ट किया है, जो चार्ट पर तकनीकी संरचना के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है। यदि निफ्टी आगामी सत्रों में 22,180 के इस अहम सपोर्ट को निर्णायक रूप से तोड़ता है, तो बाजार में 21,700 से 22,000 के स्तर तक का रास्ता खुल सकता है। ऊपर की तरफ किसी भी तकनीकी पुलबैक में 22,400 का स्तर तत्काल अवरोध बनेगा, जिसके बाद 22,700-22,800 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस का काम करेगा。
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसैलवन राधाकृष्णन ने कहा कि अब बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम केवल आरबीआई की ब्याज दर वृद्धि नहीं है, बल्कि यह बढ़ती संभावना है कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर मौद्रिक सख्ती उम्मीद से कहीं अधिक लंबी खिंच सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा मिनट्स से संकेत मिलता है कि अमेरिका में भी ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी संभव है। वित्तीय जानकारों की सलाह है कि खुदरा और नए निवेशकों को गिरते हुए बाजार में बॉटम फिशिंग की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। मौजूदा अस्थिरता के दौर में नकदी बचाकर रखना और केवल उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों में व्यवस्थित एसआईपी निवेश जारी रखना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा。
निष्कर्ष और आगामी कारोबारी दिशा
संक्षेप में कहें तो 8 अक्टूबर 2026 का कारोबारी सत्र घरेलू शेयर बाजार के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत लेकर आया है। आरबीआई द्वारा आसान मौद्रिक नीति के युग का अंत, पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध संकट, कच्चे तेल का $104 के पार भड़कना और विदेशी फंड्स द्वारा ₹6,100 करोड़ से अधिक की आक्रामक निकासी ऐसे कारक हैं जिन्होंने बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह झकझोर दिया है। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक टीसीएस सहित अन्य कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजों, अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी। ट्रेडर्स और निवेशकों को अत्यधिक सतर्क रहने और सख्त स्टॉप-लॉस के साथ रक्षात्मक रणनीति अपनाने की सख्त आवश्यकता है。












