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सेंसेक्स 71,909 पर: क्या 5.50% होगा रेपो रेट? कल से RBI MPC बैठक

मुंबई: भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए आगामी सप्ताह अत्यधिक निर्णायक साबित होने वाला है। एक ओर जहां घरेलू शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह की गिरावट के बाद संभलने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय द्विमासिक बैठक सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हो रही है। रिजर्व बैंक गवर्नर की अध्यक्षता वाली समिति 5 से 7 अक्टूबर तक आर्थिक स्थिति, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता की समीक्षा करेगी। 7 अक्टूबर को नीतिगत फैसलों का ऐलान होगा। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि पिछले चार सत्रों से 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रेपो रेट में इस बार 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत किया जा सकता है, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि होगी।

बाजार का हाल: 52 हफ्ते के निचले स्तर पर सेंसेक्स और निफ्टी

Livemint की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू इक्विटी बाजारों में बिकवाली का भारी दबाव रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 570.59 अंक टूटकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। सत्र के दौरान सेंसेक्स 1,187 अंक का गोता लगाते हुए 71,292.88 के नए 52-सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया था। वहीं दूसरी ओर एनएसई निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 22,421.95 के स्तर पर आ गया। पूरे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स में कुल 1,670 अंकों का नुकसान दर्ज हुआ।

इस कमजोरी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुख्य कारण रहीं। हालांकि, शुक्रवार को गिफ्ट निफ्टी 133.50 अंक चढ़कर 22,624.50 पर बंद हुआ, जिससे सोमवार को शुरुआती सत्र में तकनीकी रिकवरी की उम्मीद जगी है। विश्लेषकों के अनुसार जब तक निफ्टी 22,800 के स्तर को पार नहीं करता, तब तक बाजार में सतर्कता बनी रहेगी।

मुख्य वित्तीय एवं आर्थिक संकेतकों का आधिकारिक डेटा

सोमवार से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह और आगामी आरबीआई बैठक से पहले प्रमुख वित्तीय संकेतकों और आर्थिक आंकड़ों की स्थिति नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक / मैक्रो वेरिएबल वर्तमान स्तर (अक्टूबर 2026) पिछला स्तर / संदर्भ शुद्ध बदलाव / प्रवृत्ति बाजार पर मुख्य असर
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 71,909.70 अंक 72,480.29 अंक -570.59 अंक (-0.79%) लगातार 8वें हफ्ते गिरावट, नया 52-सप्ताह निचला स्तर
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,421.95 अंक 22,620.45 अंक -198.50 अंक (-0.88%) 200-सप्ताह मूविंग एवरेज सपोर्ट की दोबारा टेस्टिंग
आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) 5.25% (वर्तमान) 6.50% (कटौती पूर्व) 25 bps बढ़ोतरी की संभावना (5.50%) फरवरी 2023 के बाद पहली बार दर वृद्धि का जोखिम
खुदरा मुद्रास्फीति (CPI Inflation) 4.82% (अगस्त आंकड़ा) 4.45% (जुलाई आंकड़ा) +0.37% की बढ़त आरबीआई के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) $102.25 प्रति बैरल $108.70 (सत्र उच्च) ऊंचे स्तरों पर बना हुआ आयात बिल और मुद्रास्फीति पर गंभीर दबाव
सकल जीएसटी संग्रह (Gross GST) ₹2.03 लाख करोड़+ ₹1.77 लाख करोड़ +14.7% की वार्षिक वृद्धि घरेलू आर्थिक खपत में मजबूती का स्पष्ट प्रमाण
भारतीय रुपया (USD / INR) ₹96.20 – ₹96.80 प्रति डॉलर ₹95.50 प्रति डॉलर अवमूल्यन दबाव जारी डॉलर मजबूती और एफआईआई निकासी से कमजोरी

आरबीआई एमपीसी का फैसला तय करेंगे ये 5 बड़े कारक

Livemint की विशेष व्याख्या के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति के सामने मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन साधने की चुनौती है। अर्थशास्त्रियों ने पांच प्रमुख कारकों की पहचान की है जो केंद्रीय बैंक का निर्णय तय करेंगे:

1. खाद्य और खुदरा महंगाई: अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर है। खाद्य वस्तुओं में अस्थिरता से त्योहारी तिमाही में मूल्य दबाव बढ़ने का खतरा है, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का पक्ष मजबूत हुआ है।

2. कच्चे तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड का $100 प्रति बैरल से ऊपर रहना भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए आयातित महंगाई का बड़ा जोखिम है। हालिया नरमी के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव आपूर्ति बाधाओं को बनाए हुए है।

3. रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया ₹96 के पार फिसलकर ₹97 की ओर बढ़ रहा है। कमजोर रुपये से आयात महंगे हो रहे हैं, जिससे निपटने हेतु केंद्रीय बैंक को नीतिगत दरों पर आक्रामक रुख अपनाना पड़ सकता है।

4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरें ऊंची रखने के संकेतों और ट्रेजरी यील्ड में उछाल से वैश्विक तरलता सख्त हुई है। नतीजतन, विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं।

5. बैंकिंग तरलता और त्योहारी मांग: अक्टूबर का महीना त्योहारी खरीदारी और ऋण मांग का शीर्ष समय है। तत्काल दर वृद्धि से ऑटो और होम लोन महंगे हो सकते हैं, जिससे उपभोक्ता मांग पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

जीएसटी संग्रह ने दिखाया अर्थव्यवस्था का दम

The Hindu की आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत राजस्व संग्रह से मिला है। सितंबर 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। घरेलू सौदों से मिलने वाले राजस्व में 10.1 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज हुई। यह आंकड़ा साबित करता है कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की अंतर्निहित आर्थिक गतिविधियां और विनिर्माण क्षेत्र मजबूत बना हुआ है।

कॉरपोरेट अर्निंग्स और अगले हफ्ते के प्रमुख ट्रिगर्स

आगामी सप्ताह कॉरपोरेट जगत के वित्तीय नतीजों के लिहाज से भी अहम रहेगा। देश की सबसे बड़ी आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के नतीजे घोषित कर अर्निंग्स सीजन की शुरुआत करेगी। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा संकट, कमोडिटी कीमतें और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री के आंकड़े बाजार की चाल तय करेंगे।

विशेषज्ञों की राय और खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण और एसएमसी ग्लोबल की विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, यदि रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी होती है, तो यह बाजार के लिए अल्पकालिक झटका हो सकता है, लेकिन मध्यम अवधि में यह स्थिरता लाएगा। आठ सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार पहले ही अत्यधिक बिकवाली (Oversold) के दायरे में आ चुका है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि खुदरा निवेशकों को घबराहट में बिकवाली करने से बचना चाहिए। बैंकिंग, एफएमसीजी और आईटी सेक्टर की मजबूत लार्जकैप कंपनियों में मूल्यांकन आकर्षक हो चुका है। ऐसे में व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के जरिए चुनिंदा शेयरों में किस्तों में खरीदारी की रणनीति अपनाना सबसे सुरक्षित रहेगा।

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