नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लगभग 68 लाख पेंशनभोगियों और 50 लाख सेवारत कर्मचारियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8cpc.gov.in) के समक्ष देश के प्रमुख पेंशनभोगी संगठनों और कर्मचारी महासंघों ने सेवानिवृत्ति लाभों के पुनर्गठन को लेकर ऐतिहासिक मांगें प्रस्तुत की हैं। 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS), नेशनल काउंसिल (JCM) और अखिल भारतीय पेंशनर्स परिसंघ (AIFPA) ने आयोग से मांग की है कि वर्तमान पेंशन गणना फॉर्मूले को बदलते हुए मूल पेंशन को अंतिम आहरित वेतन के 50% से बढ़ाकर 67% किया जाए। The Economic Times की विशेष रिपोर्ट और Staff News के बुलेटिन के अनुसार, संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन ₹69,000 (3.83 फिटमेंट फैक्टर), न्यूनतम पेंशन ₹45,000, 11 वर्ष में कम्यूटेशन बहाली और चिकित्सा भत्ते को ₹5,000 करने का विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
अंतिम वेतन का 67% पेंशन: मांग का तार्किक आधार
चौथे और पांचवें वेतन आयोग के समय से ही सीसीएस (पेंशन) नियमों के तहत पेंशन की गणना अंतिम आहरित वेतन (Last Pay Drawn) के 50% के रूप में की जाती रही है। हालांकि, पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि पिछले तीन दशकों में सामाजिक ताने-बाने में भारी बदलाव आया है。
औसत जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, वरिष्ठ नागरिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, चिकित्सा मुद्रास्फीति की दोहरी मार और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण सेवानिवृत्त कर्मियों का व्यय काफी बढ़ गया है। 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) की सिफारिशों के आधार पर संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद जीवन स्तर में अचानक 50% की गिरावट नहीं आनी चाहिए, इसलिए पूर्ण पेंशन की दर को न्यूनतम 67% और पारिवारिक पेंशन को 50% किया जाना चाहिए।
वर्तमान 7वें सीपीसी बनाम 8वें सीपीसी की प्रमुख मांगों की तुलना
The Economic Times Hindi के विश्लेषण के अनुसार, पेंशनभोगियों द्वारा 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगों और वर्तमान नियमों के बीच का अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| पेंशन एवं सेवानिवृत्ति घटक | 7वें वेतन आयोग में वर्तमान व्यवस्था | 8वें वेतन आयोग हेतु पेंशनर्स संगठनों की मांग | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|---|
| पेंशन गणना दर (Basic Pension) | अंतिम आहरित वेतन का 50% | अंतिम आहरित वेतन का 67% | मासिक आय में 34% से अधिक की सीधी वृद्धि |
| पारिवारिक पेंशन (Family Pension) | मूल वेतन का 30% | मूल वेतन का 50% | आश्रित परिवारों को पूर्ण आर्थिक संबल |
| न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Pay) | ₹18,000 प्रति माह | ₹69,000 प्रति माह (3.83x फिटमेंट) | कर्मचारियों की क्रय शक्ति में ऐतिहासिक उछाल |
| न्यूनतम मासिक पेंशन (Minimum Pension) | ₹9,000 प्रति माह | ₹45,000 प्रति माह | अंतिम पायदान के पेंशनभोगियों को सुरक्षा |
| कम्यूटेशन बहाली (Commutation Period) | 15 वर्ष की अनिवार्य अवधि | 11 वर्ष अथवा 71 वर्ष की आयु (जो पहले हो) | 11 वर्ष में वसूली पूरी होने पर कटौती बंद |
| नियत चिकित्सा भत्ता (FMA) | ₹1,000 प्रति माह (नॉन-सीजीएचएस) | ₹5,000 प्रति माह | दवाओं और नैदानिक खर्चों से बड़ी राहत |
3.83 फिटमेंट फैक्टर और 5.2 उपभोग इकाई का फॉर्मूला
पेंशनर संगठनों ने न्यूनतम वेतन ₹69,000 तय करने के लिए एक विस्तृत पोषण और व्यय मॉडल प्रस्तुत किया है। वर्तमान में न्यूनतम वेतन की गणना 3 उपभोग इकाइयों पर की जाती है। भारत पेंशनर्स समाज ने तर्क दिया है कि भारतीय परिवार प्रणाली में कर्मचारी पर उसके वृद्ध माता-पिता भी पूरी तरह आश्रित होते हैं。
अतः उपभोग इकाई को बढ़ाकर 5.2 इकाई (स्वयं: 1.0, पत्नी: 1.0, दो बच्चे: 0.8 + 0.8, दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8) माना जाना चाहिए। इस आधार पर संतुलित आहार, वस्त्र, आवास और माता-पिता के स्वास्थ्य खर्च को जोड़कर न्यूनतम वेतन ₹69,000 निकलता है, जिसके लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर आवश्यक है।
आयु-आधारित अतिरिक्त पेंशन (Additional Pension) की नई स्लैब
वर्तमान नियमों के अनुसार अतिरिक्त पेंशन का लाभ केवल 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर 20% के रूप में मिलता है। संगठनों ने मांग की है कि 65 वर्ष से ही स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है, इसलिए अतिरिक्त पेंशन 65 वर्ष से शुरू होनी चाहिए:
| पेंशनभोगी की आयु सीमा | वर्तमान 7वां सीपीसी नियम | 8वें वेतन आयोग हेतु प्रस्तावित अतिरिक्त पेंशन स्लैब |
|---|---|---|
| 65 वर्ष से 70 वर्ष से कम | शून्य | मूल पेंशन का 5% अतिरिक्त |
| 70 वर्ष से 75 वर्ष से कम | शून्य | मूल पेंशन का 10% अतिरिक्त |
| 75 वर्ष से 80 वर्ष से कम | शून्य | मूल पेंशन का 15% अतिरिक्त |
| 80 वर्ष से 85 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 20% | मूल पेंशन का 20% अतिरिक्त |
| 85 वर्ष से 90 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 30% | मूल पेंशन का 30% अतिरिक्त |
| 90 वर्ष से 95 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 40% | मूल पेंशन का 40% अतिरिक्त |
| 95 वर्ष से 100 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 50% | मूल पेंशन का 50% अतिरिक्त |
| 100 वर्ष या उससे अधिक | मूल पेंशन का 100% | मूल पेंशन का 100% अतिरिक्त |
कम्यूटेशन बहाली 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष करने की मांग
पेंशन कम्यूटेशन के वर्तमान नियमों में कर्मचारी को 40% तक पेंशन बेचने की अनुमति होती है, जिसकी मासिक कटौती 15 वर्षों तक जारी रहती है। बीमांकिक अध्ययनों का हवाला देते हुए Livemint की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार द्वारा दी गई एकमुश्त राशि और उस पर लगने वाला 8% का वार्षिक ब्याज अधिकतम 10.8 से 11 वर्षों में पूरी तरह चुकता हो जाता है। शेष 4 वर्षों तक की जाने वाली कटौती पेंशनभोगियों के साथ अन्याय है, इसलिए इसे 11 वर्ष में बहाल किया जाए।
चंडीगढ़ दौरे (16-18 सितंबर) में उठेगा मुद्दा
वेतन आयोग की टीम ने जयपुर, चेन्नई और पुडुचेरी के सफल परामर्श के बाद अब उत्तरी क्षेत्र के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से संवाद के लिए 16 से 18 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ में तीन दिवसीय परामर्श बैठक रखी है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पेंशनभोगी संगठन इन मांगों को आयोग के समक्ष रखेंगे।
निष्कर्ष
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत 67% पेंशन, ₹69,000 न्यूनतम वेतन और 11 वर्ष में कम्यूटेशन बहाली का यह एजेंडा देश के वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। यद्यपि ये कर्मचारी संगठनों की प्रारंभिक मांगें हैं जिन पर अंतिम निर्णय आयोग की रिपोर्ट और केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति पर निर्भर करेगा, लेकिन इसने देश भर के पेंशनभोगियों में एक नई उम्मीद को जन्म दिया है。













