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दिल्ली में 18वां BRICS समिट शुरू: मोदी-शी जिनपिंग वार्ता पर नजर

नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में ऐतिहासिक 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) शनिवार, 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित अत्याधुनिक भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित हो रहे इस दो-दिवसीय महासम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष राजनयिक वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय सुधारों पर व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर एकत्र हुए हैं। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रहा है जब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में जारी अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष कठिन चुनौतियां पेश कर रहे हैं。

भारत मंडपम में विश्व नेताओं का भव्य जमावड़ा और कड़ा सुरक्षा घेरा

The Hindu की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम को भारतीय सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक राजनयिक सुविधाओं के संगम के रूप में सजाया गया है। सम्मेलन के मद्देनजर लुटियंस दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (NSG), दिल्ली पुलिस के विशेष कमांडो और अर्धसैनिक बलों के 25,000 से अधिक जवान तैनात हैं। आयोजन स्थल के चारों ओर एआई आधारित सीसीटीवी सर्विलांस, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अत्याधुनिक संचार नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय हैं。

सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित ब्रिक्स के विस्तारित सदस्य देशों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन के विशेष बहुपक्षीय सत्रों में भाग लेने के लिए उपस्थित हैं。

मोदी-शी जिनपिंग द्विपक्षीय वार्ता: सीमा और व्यापार पर दुनिया की नजर

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा कूटनीतिक आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी शांति और रणनीतिक विश्वास बहाली पर गंभीर चर्चा निर्धारित है。

बीजिंग ने वार्ता से पूर्व आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि वह भारत के साथ एक-दूसरे की सफलता में सहायक भागीदार बनने को तैयार है। भारतीय पक्ष सीमा पर पूर्ण डिसइंगेजमेंट और संवेदनशील फ्रिक्शन प्वाइंट्स पर पूर्व स्थिति की बहाली पर जोर देगा। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन, सीधी उड़ानों की बहाली और वीजा नियमों के सरलीकरण पर भी सहमति बनने की उम्मीद है。

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आधिकारिक डेटा और सदस्य देशों की रूपरेखा

नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे प्रमुख देशों, उनके प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों और प्राथमिकताओं का प्रामाणिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

सदस्य देश प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख शिखर सम्मेलन की मुख्य प्राथमिकताएं रणनीतिक एवं आर्थिक महत्व
भारत (मेजबान एवं अध्यक्ष) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल साउथ का सशक्तिकरण, यूपीआई लिंकेज और आतंकवाद विरोध ब्रिक्स अध्यक्षता के माध्यम से विकासशील देशों की प्रभावी आवाज
चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, व्यापार विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला सीमा तनाव में कमी और एशियाई आर्थिक स्थिरता का प्रयास
ब्राजील राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, जलवायु वित्त और कृषि सहयोग लैटिन अमेरिका और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलन
दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार (AfCFTA) और खनिज सुरक्षा अफ्रीका में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा
रूस उच्चस्तरीय विशेष प्रतिनिधिमंडल वैकल्पिक भुगतान प्रणाली और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच गैर-डॉलर व्यापार का विस्तार
ईरान एवं यूएई राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन / राष्ट्रपति शेख मोहम्मद ऊर्जा गलियारा, पश्चिम एशिया सुरक्षा और बंदरगाह संपर्क फारस की खाड़ी और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा में अहम भूमिका

शिखर सम्मेलन के प्रमुख एजेंडा: डॉलर के विकल्प और ब्रिक्स पे पर मंथन

NDTV की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार सबसे महत्वपूर्ण विषय है। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) में द्विपक्षीय निपटान को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। इस दिशा में ‘ब्रिक्स पे’ (BRICS Pay) और भारत के यूपीआई (UPI) तथा अन्य राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के क्रॉस-बॉर्डर लिंकेज पर ठोस प्रगति की संभावना है。

इसके साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की ऋण क्षमता बढ़ाने, आपातकालीन तरलता व्यवस्था को मजबूत करने और रियायती वित्त पोषण उपलब्ध कराने पर आम सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि ब्रिक्स का उद्देश्य किसी के विरोध में खड़ा होना नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की वैध प्राथमिकताओं को वैश्विक नीति-निर्माण के केंद्र में स्थापित करना है。

संयुक्त राष्ट्र सुधार और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में संरचनात्मक सुधार की तात्कालिक आवश्यकता को पुरजोर ढंग से उठाया है। भारत का यह स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि पिछली शताब्दी के संस्थान आज की 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। ब्रिक्स घोषणापत्र में सुरक्षा परिषद के दोनों संवर्गों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किए जाने की पूरी उम्मीद है。

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति भी सम्मेलन का केंद्रीय स्तंभ है। सीमा पार आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए सदस्य देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच त्वरित खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए संयुक्त फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही जिम्मेदार और निष्पक्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास के लिए नैतिक मानक तय करने पर भी बातचीत चल रही है。

वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और भावी दिशा

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का यह सफल आयोजन वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते राजनयिक कद और उसकी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जब दुनिया विभिन्न ध्रुवों में बंटी हुई है, भारत ने सभी प्रमुख वैश्विक ताकतों को एक मंच पर लाकर समाधान-उन्मुख संवाद को आगे बढ़ाया है。

सम्मेलन के समापन पर रविवार को सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, निष्पक्ष बहुपक्षीय व्यापार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के प्रसार और खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यावहारिक कार्ययोजना होगी। यह ऐतिहासिक घोषणापत्र आगामी वर्षों में विकासशील दुनिया के साझा आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने और वैश्विक स्थिरता को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होगा。

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