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BRICS में लोकल करेंसी ट्रेड: 40% GDP के लिए पेमेंट सिस्टम प्लान

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अमेरिकी डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ऐतिहासिक आर्थिक पहल सामने आई है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम और वित्त मंत्रियों व केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की उच्चस्तरीय बैठक में सदस्य देशों ने अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और घरेलू फास्ट पेमेंट सिस्टम्स (जैसे भारत का UPI) को आपस में जोड़ने के ठोस रोडमैप पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि दुनिया की आधी आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स समूह अब एक मजबूत, समावेशी और लचीले वैकल्पिक वित्तीय तंत्र के निर्माण की ओर तेजी से कदम बढ़ा चुका है।

पीयूष गोयल का बड़ा आह्वान: पेमेंट सिस्टम का क्रॉस-बॉर्डर लिंकेज

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स आज वैश्विक व्यापार के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से का संचालन करता है, जिसमें भारत एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। उन्होंने सभी सदस्य व साझेदार देशों से अपील की कि वे अपने-अपने डिजिटल भुगतान नेटवर्कों को आपस में जोड़ें, राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को सुगम बनाएं और डिजिटल कॉमर्स को सीमाओं के पार ले जाकर एक साझा आर्थिक भविष्य का निर्माण करें।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी आर्थिक सुरक्षा पर बल देते हुए कहा कि वास्तविक आर्थिक स्वायत्तता का अर्थ वैश्विक व्यवस्था से कट जाना नहीं, बल्कि बाहरी झटकों को सहने की क्षमता विकसित करना है। अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में भू-राजनीतिक अवरोधों से उद्योगों को सुरक्षित रखने के लिए ब्रिक्स देशों को बाजार-आधारित और विविधतापूर्ण वाणिज्यिक रिश्ते विकसित करने होंगे। साथ ही ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कच्चे माल के निर्बाध प्रवाह के लिए नए व्यापार गलियारे तैयार किए जा रहे हैं।

ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट पहल

The Pioneer की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिक्स वित्त मंत्रियों द्वारा जारी संयुक्त बयान में ‘ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स’ (BPTF) की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई है। यह टास्क फोर्स सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ मिलकर एक ऐसा भुगतान नेटवर्क तैयार कर रही है जो तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला होगा।

इस नई व्यवस्था के तहत सदस्य देश तीसरी मुद्रा पर निर्भर रहने के बजाय सीधे अपनी घरेलू मुद्राओं में सेटलमेंट कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, भारत और ब्राजील के बीच व्यापार में भारतीय रुपया और ब्राजीलियाई रियल का सीधा विनिमय संभव होगा, जिससे करेंसी कन्वर्जन की भारी लागत बचेगी और विनिमय दर के अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव से निर्यातकों व आयातकों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

ब्रिक्स वित्तीय मंच का आधिकारिक डेटा और मुख्य आंकड़े

नई दिल्ली में घोषित ब्रिक्स वित्तीय सहयोग, आर्थिक ताकत और स्थानीय मुद्रा व्यापार पहल के प्रमुख आयामों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

आर्थिक घटक / पहल वैश्विक हिस्सेदारी / पैमाना मुख्य उद्देश्य एवं कार्ययोजना भारतीय अर्थव्यवस्था को होने वाला लाभ
ब्रिक्स देशों की ताकत दुनिया की 50% आबादी, 40% वैश्विक GDP ग्लोबल साउथ के आर्थिक हितों का संरक्षण भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए विशाल बाजार
वैश्विक व्यापार में भागीदारी कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 25% अंतर-ब्रिक्स व्यापार और निवेश को गति देना इंजीनियरिंग, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में वृद्धि
ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) बहुपक्षीय केंद्रीय बैंक फ्रेमवर्क राष्ट्रीय पेमेंट सिस्टम्स (UPI आदि) का जुड़ाव सीमा-पार भुगतान तेज और लेनदेन लागत में कटौती
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) द्वितीय स्वर्णिम दशक की शुरुआत स्थानीय मुद्राओं में बुनियादी ढांचा वित्तपोषण ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स के लिए सस्ता कर्ज
ब्रिक्स मल्टीलेटरल गारंटी (BMG) पायलट गारंटी योजना बुनियादी ढांचा निवेश को जोखिम-मुक्त करना घरेलू कंपनियों के लिए विदेशी पूंजी जुटाना आसान
ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज प्रस्ताव प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक व उपभोक्ता स्वतंत्र कृषि कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म खाद्य सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति और स्थिर मूल्य

न्यू डेवलपमेंट बैंक का विस्तार: स्थानीय मुद्राओं में सस्ता कर्ज

शंघाई स्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) अब अपने संचालन के ‘दूसरे स्वर्णिम दशक’ में प्रवेश कर चुका है। वित्त मंत्रियों की बैठक में बैंक প্রকৌশल को निर्देश दिया गया है कि वह ऋण पोर्टफोलियो में स्थानीय मुद्राओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाए। अब तक विकासशील देशों को विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने पर डॉलर के मजबूत होने से पुनर्भुगतान का वित्तीय बोझ अचानक बढ़ जाता था।

स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण के विस्तार से भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे आधुनिकीकरण और शहरी बुनियादी ढांचे के लिए सीधे रुपये में दीर्घकालिक रियायती ऋण मिल सकेंगे। इसके साथ ही ‘ब्रिक्स मल्टीलेटरल गारंटी’ (BMG) पहल के तहत बुनियादी ढांचा विकास में वैश्विक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी सुरक्षित करने के लिए मजबूत क्रेडिट गारंटी तंत्र शुरू किया जा रहा है।

वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार और निष्पक्ष टैक्स व्यवस्था

ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधारों की मांग दोहराई है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि इन संस्थाओं की वर्तमान शासन संरचना 21वीं सदी की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप প্রাসঙ্গিক नहीं है। उभरते बाजारों की वैश्विक जीडीपी में बढ़ती हिस्सेदारी के अनुपात में उनके वोटिंग अधिकारों और कोटा में तत्काल संशोधन होना चाहिए। इसके अलावा, कर चोरी और अवैध वित्तीय प्रवाह रोकने के लिए ब्रिक्स टैक्स सहयोग को और अधिक मजबूत बनाया गया है।

भारतीय व्यापार और उद्योगों के लिए नए आर्थिक अवसर

ब्रिक्स के इस वित्तीय पुनर्गठन से भारत के एमएसएमई (MSME) सेक्टर, इंजीनियरिंग उद्योग, फार्मास्युटिकल कंपनियों और कृषि निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे। वर्तमान में विदेशी बैंकिंग औपचारिकताओं के कारण कई उभरते बाजारों के साथ भुगतान में लंबा समय लगता है। राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों के आपस में जुड़ने से चंद मिनटों में सुरक्षित सेटलमेंट संभव हो सकेगा। इसके अलावा, रूस द्वारा प्रस्तावित ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ और महत्वपूर्ण खनिजों के साझा व्यापार से भारत की औद्योगिक सुरक्षा को रणनीतिक मजबूती मिलेगी।

निष्कर्ष: बहुध्रुवीय वित्तीय युग का सकारात्मक आगाज

संक्षेप में कहा जाए तो 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली से शुरू हुई यह वित्तीय पहल वैश्विक व्यापार के लिए युगांतरकारी कदम है। किसी विशेष मुद्रा के विरोध के बजाय, ब्रिक्स ने 50 प्रतिशत वैश्विक आबादी के कल्याण के लिए एक व्यावहारिक, सुरक्षित और लचीला विकल्प प्रस्तुत किया है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल पेमेंट लिंकेज से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था अधिक संतुलित और बहुध्रुवीय बनेगी, जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में भारत और विकासशील दुनिया को प्राप्त होगा।

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