नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के समक्ष केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक सेवारत कर्मचारियों और रक्षा कर्मियों के करियर संवर्धन को लेकर बड़ा नीतिगत बदलाव प्रस्तावित हुआ है। 9 सितंबर 2026 को पुडुचेरी में परामर्श बैठक संपन्न करने के बाद आयोग अब 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ दौरे की तैयारी कर रहा है। इसी बीच प्रमुख राष्ट्रीय कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP) योजना में व्यापक सुधार की औपचारिक मांग रखी है। यूनियनों ने 7वें वेतन आयोग की 10, 20 और 30 वर्ष की तीन अपग्रेड व्यवस्था को बदलकर सेवाकाल में 5 वित्तीय अपग्रेड (5 MACP Upgrades), कम प्रतीक्षा अवधि और पे-मैट्रिक्स के बजाय सीधे प्रमोशनल पद का पे-स्केल देने का मांग पत्र सौंपा है。
पुडुचेरी बैठक पूरी, अब चंडीगढ़ दौरे में उठेगा MACP सुधार का मुद्दा
Livemint की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का कार्यकाल अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य और आईएएस पंकज जैन सदस्य सचिव हैं। आयोग को 18 महीने में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं。
आयोग के 10 महीने पूरे होने के साथ परामर्श प्रक्रिया तेज हो गई है। Livemint के आधिकारिक दौरे कार्यक्रम के अनुसार, 7-8 सितंबर को चेन्नई और 9 सितंबर को पुडुचेरी में विचार-विमर्श के बाद आयोग 16, 17 और 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में उत्तर भारतीय राज्यों के कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेगा। कर्मचारी यूनियनों ने सेवा में लंबे ठहराव को दूर करने के लिए एमएसीपी में संशोधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है。
मौजूदा व्यवस्था में क्या खामियां हैं और सुधार क्यों जरूरी?
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत कर्मचारियों को नियमित सेवा के 10, 20 और 30 वर्ष पूरे होने पर तीन वित्तीय अपग्रेड मिलते हैं। कर्मचारी महासंघों का तर्क है कि यह व्यवस्था वरिष्ठता और जिम्मेदारियों का सही मूल्यांकन नहीं करती। तकनीकी, प्रशासनिक और सहायक संवर्गों में नियमित रिक्तियों के अभाव में कर्मचारी दशकों तक एक ही पद पर अटके रहते हैं। 10 वर्ष का लंबा अंतराल कर्मचारियों के मनोबल और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है。
इसके अलावा, वर्तमान एमएसीपी में अगला वित्तीय लाभ केवल पे-मैट्रिक्स के अगले लेवल तक सीमित रहता है, भले ही कैडर में वास्तविक पदोन्नति का पद कई लेवल ऊपर हो। इससे कर्मचारियों को पदोन्नति का वास्तविक आर्थिक फायदा नहीं मिलता। इसलिए कर्मचारी संगठन पदोन्नति नियमों और वित्तीय प्रगति को एक समान बनाने की मांग कर रहे हैं。
प्रमुख कर्मचारी संगठनों के मांग पत्र: 5 वित्तीय अपग्रेड के प्रस्ताव
मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने आयोग से मांग की है कि 32 वर्ष के सेवाकाल में कर्मचारियों को 8, 15, 22, 28 और 32 वर्ष की सेवा पर कुल 5 वित्तीय अपग्रेड दिए जाएं। यह वित्तीय लाभ पे-मैट्रिक्स के अगले स्तर के बजाय वास्तविक प्रमोशनल पद के पे-स्केल के अनुरूप होना चाहिए。
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने डाक और अन्य कर्मचारियों के लिए 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष पर 5 अपग्रेडेशन का प्रस्ताव रखा है। एफएनपीओ ने मांग की है कि यदि कोई कर्मचारी व्यक्तिगत कारणों से नियमित पदोन्नति से इनकार करता है, तो भी उसकी एमएसीपी प्रगति नहीं रोकी जानी चाहिए। नेशनल काउंसिल (NC-JCM) स्टाफ साइड और रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी 5 वर्ष के अंतराल पर वित्तीय प्रगति की वकालत की है。
यूनियनों द्वारा 8वें वेतन आयोग को प्रस्तुत प्रमुख MACP प्रस्ताव
कर्मचारी महासंघों के प्रस्तावों और मौजूदा व्यवस्था के बीच तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| कर्मचारी संगठन / व्यवस्था | प्रस्तावित अपग्रेड संख्या | सेवा अवधि (वर्ष) अंतराल | वेतन निर्धारण का आधार | अतिरिक्त मुख्य सिफारिश |
|---|---|---|---|---|
| 7वां वेतन आयोग (वर्तमान) | 3 वित्तीय अपग्रेड | 10, 20 और 30 वर्ष | पे-मैट्रिक्स का ठीक अगला लेवल | प्रमोशन ठुकराने पर एमएसीपी रोक दी जाती है |
| मिनिस्टीरियल स्टाफ (MSA) | 5 वित्तीय अपग्रेड | 8, 15, 22, 28, 32 वर्ष | प्रमोशनल पद का पे-स्केल | कैडर पदानुक्रम के अनुरूप लाभ |
| पोस्टल फेडरेशन (FNPO) | 5 वित्तीय अपग्रेड | 6, 12, 18, 24, 30 वर्ष | प्रमोशनल पदानुक्रम अनुसार | प्रमोशन इनकार पर एमएसीपी रोकने का नियम समाप्त हो |
| नेशनल काउंसिल (NC-JCM) | न्यूनतम 5 वित्तीय अपग्रेड | प्रत्येक 5-6 वर्ष अंतराल | कार्यात्मक प्रमोशनल पे-स्केल | 30 वर्ष में 5 अग्रिम वेतनमान अनिवार्य |
| रेलवे सीनियर सिटीजन्स (RSCWS) | लचीली अपग्रेड प्रणाली | अधिकतम 5 वर्ष अंतराल | कैडर आधारित उच्चतर लेवल | पदोन्नति विहीन संवर्गों के ठहराव का हल |
प्रमोशनल पदानुक्रम से कर्मचारियों को कैसे मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ?
यूनियनों की इस मांग का केंद्रीय बिंदु प्रमोशनल पदानुक्रम (Promotional Hierarchy) लागू करना है। 7वें वेतन आयोग में यदि कोई कर्मचारी पे-लेवल 7 (बेसिक ₹44,900) में है, तो एमएसीपी के तहत उसे केवल लेवल 8 (बेसिक ₹47,600) मिलता है, जबकि उसके विभाग में अगला वास्तविक प्रमोशनल पद सीधे लेवल 10 (ग्रुप ए, बेसिक ₹56,100) का होता है。
पे-मैट्रिक्स के कारण कर्मचारी को बीच के काल्पनिक स्तरों से गुजरना पड़ता है। यदि 8वां वेतन आयोग यूनियनों का प्रस्ताव स्वीकार करता है, तो अपग्रेड के समय सीधे लेवल 10 का पे-स्केल मिलेगा। इससे कर्मचारियों के मासिक वेतन में ₹12,000 से ₹15,000 तक की अतिरिक्त वृद्धि होगी और सेवानिवृत्ति पर पेंशन तथा ग्रेच्युटी में भी बड़ा लाभ मिलेगा。
आयोग द्वारा डेटा संग्रहण और टर्म्स ऑफ रेफरेंस का दायरा
StaffNews के भर्ती एवं सेवा विश्लेषण के अनुसार, 8वें वेतन आयोग ने 30 जून 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सभी मंत्रालयों से लेवल 1 से 15 तक के पिछले तीन वर्षों (2023, 2024, 2025) के एमएसीपी अपग्रेडेशन का विस्तृत डेटा एकत्र किया है。
वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की धारा 2(a) और 2(b) आयोग को सेवा लाभों के युक्तिकरण और आकर्षक वेतन संरचना तैयार करने का अधिकार देती है। धारा 2(f) के तहत आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन का ध्यान रखना भी जरूरी है। संकलित आंकड़ों के आधार पर आयोग संवर्गों में करियर ठहराव और वित्तीय प्रभाव का व्यावहारिक मूल्यांकन कर रहा है。
अंतिम रिपोर्ट और केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय पर टिकी निगाहें
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की संभावना है। यदि आयोग 5 एमएसीपी अपग्रेड और प्रमोशनल पे-स्केल की मांगों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल करता है, तो यह सरकारी सेवा के करियर ढांचे में बड़ा मील का पत्थर होगा। 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ बैठकों में उत्तरी राज्यों के कर्मचारी संगठन इस मांग को दोहराएंगे, जिसके बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा。













