नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का समापन ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने गहन विमर्श के बाद सर्वसम्मति से बहुप्रतीक्षित ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) को आधिकारिक मंजूरी दी। वैश्विक स्तर पर जारी गंभीर भू-राजनीतिक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह संयुक्त दस्तावेज भारत की संतुलित कूटनीति की एक बड़ी जीत के रूप में उभरा है। इस सम्मेलन के जरिए भारत ने ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज बनते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विभाजित विश्व में संवाद और बहुपक्षीय सुधार ही एकमात्र स्थायी मार्ग हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता
The Hindu के संपादकीय विश्लेषण के अनुसार, नई दिल्ली घोषणापत्र का सबसे अहम बिंदु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के व्यापक और समयबद्ध पुनर्गठन की जोरदार वकालत है। ब्रिक्स देशों ने एक सुर में कहा कि 20वीं सदी की वैश्विक संस्थाएं आज की बहुध्रुवीय वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ हैं। इस संयुक्त दस्तावेज में सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की आवश्यकता रेखांकित की गई।
घोषणापत्र में विशेष रूप से भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देशों की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता और अधिक प्रभावशाली भूमिका का खुलकर समर्थन किया गया। सदस्य देशों ने माना कि जब तक उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक मंच की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च मेज पर उचित स्थान नहीं मिलेगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का ढांचा अधूरा रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार ग्लोबल साउथ के न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की बुनियादी शर्त है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और एकतरफा प्रतिबंधों का कड़ा विरोध
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार और वित्तीय लेन-देन के विकेंद्रीकरण पर आम सहमति बनी है। ब्रिक्स सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता घटाने के उद्देश्य से अपनी स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी लेन-देन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने का साझा संकल्प लिया। इसके लिए सीमा पार भुगतान तंत्र को मजबूत करने और डिजिटल बैंकिंग बुनियादी ढांचे को जोड़ने पर सहमति जताई गई।
इसके साथ ही घोषणापत्र में पश्चिमी शक्तियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर लगाए जा रहे एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) की तीखी आलोचना की गई। ब्रिक्स ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के दंडात्मक आर्थिक कदम विकासशील देशों की संप्रभुता, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचाते हैं। समूह ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों पर आधारित पारदर्शी व्यापार प्रणाली की बहाली का आह्वान किया।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली घोषणापत्र के प्रमुख स्तंभ
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में जिन प्रमुख नीतिगत फैसलों और कूटनीतिक समझौतों पर सर्वसम्मति बनी, उसका विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| घोषणापत्र का प्रमुख स्तंभ | शिखर सम्मेलन में लिया गया आधिकारिक निर्णय | रणनीतिक एवं राष्ट्रीय प्रभाव |
|---|---|---|
| यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार | स्थायी व अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार; भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्यता देने की मांग। | वैश्विक मंच पर भारत की स्थायी महाशक्ति के रूप में मान्यता और विकासशील देशों को बराबरी का हक। |
| स्थानीय मुद्रा व्यापार | डॉलर पर निर्भरता घटाने और द्विपक्षीय व्यापार को राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटाने के तंत्र का विस्तार। | भारतीय रुपये (INR) का अंतरराष्ट्रीयकरण, मुद्रा भंडार की सुरक्षा और लेनदेन लागत में कमी। |
| पश्चिम एशिया शांति कूटनीति | भारत की मध्यस्थता से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच युद्ध के बाद पहली उच्चस्तरीय वार्ता। | मध्य पूर्व संकट में भारत की निष्पक्ष मध्यस्थ और शांतिदूत के रूप में साख मजबूत। |
| जिम्मेदार एआई एवं डिजिटल इंफ्रा | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार। | समावेशी तकनीक का प्रसार और विकासशील देशों को आधुनिक एआई टूल्स की पहुंच। |
| आतंकवाद के विरुद्ध साझा मोर्चा | आतंकवाद के सभी रूपों की बिना शर्त निंदा; आतंकी वित्तपोषण और पनाहगाहों को खत्म करने का संकल्प। | सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भारत की कूटनीतिक जीत। |
| जलवायु वित्तपोषण | विकसित देशों द्वारा सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक का आसान और अनुदान-आधारित फंड देने की मांग। | ऊर्जा संक्रमण के दौर में विकासशील देशों की संप्रभु प्राथमिकताओं की रक्षा। |
मध्य पूर्व संकट में भारत का बड़ा कूटनीतिक संतुलन
इस शिखर सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत ने जटिल परिस्थितियों के बीच दोनों विरोधी पक्षों को एक मंच पर लाने में सफलता पाई। पश्चिम एशियाई संघर्ष में ईरान और यूएई के बीच तनाव रहा है। भारतीय राजनयिकों और प्रधानमंत्री मोदी की मध्यस्थता से सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और यूएई प्रतिनिधिमंडल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पहली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संभव हो सकी।
नई दिल्ली घोषणापत्र में किसी भी सदस्य देश पर प्रत्यक्ष आरोप लगाए बिना एकतरफा सैन्य हमलों की निंदा की गई। साथ ही फिलिस्तीन और लेबनान में मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल युद्धविराम और राहत गलियारे खोलने की मांग की गई। भारत की इस पहल ने यह सिद्ध किया कि नई दिल्ली विश्व मंच पर एक संतुलित और विश्वसनीय वार्ताकार की भूमिका निभाने में सक्षम है।
द्विपक्षीय वार्ताओं में सीमा स्थिरता और वैश्विक साझेदारियां
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की। दोनों नेताओं ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखने और सीमा विवाद को कूटनीतिक संवाद से सुलझाने की राजनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा आसियान और अफ्रीकी संघ के प्रमुख देशों के साथ भी व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को गति देने पर सहमति बनी।
जिम्मेदार एआई, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण पर आम सहमति
डिजिटल मोर्चे पर भारत ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अनुभव को साझा करने का प्रस्ताव रखा, जिसका स्वागत किया गया। घोषणापत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर बल दिया गया, ताकि तकनीक का लाभ सभी देशों तक पहुंचे। पर्यावरण के क्षेत्र में भी विकसित देशों से अपनी जिम्मेदारियां निभाने और विकासशील देशों को रियायती संसाधन उपलब्ध कराने का आह्वान किया गया।
निष्कर्ष: बहुध्रुवीय विश्व में भारत के नेतृत्व का नया अध्याय
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वीकृत ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव का सशक्त प्रमाण है। मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य देशों को साझा सहमति पर लाना भारतीय विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। यह घोषणापत्र पुरानी संस्थाओं के लोकतंत्रीकरण का मार्ग प्रशस्त करता है और आर्थिक संप्रभुता, स्थानीय मुद्रा व्यापार तथा न्यायसंगत तकनीक के नए युग की नींव रखता है। भारत ने सिद्ध किया है कि वह भविष्य की विश्व व्यवस्था का प्रमुख शिल्पकार है।













