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8वां वेतन आयोग: 25% DA मर्जर से ₹1.5 लाख होगी बेसिक, समझें नियम

नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की परामर्श प्रक्रिया के बीच देश के 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है। प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने आयोग से महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) को समय-समय पर मूल वेतन में स्वतः विलय (Automatic DA Merger) करने की पुरजोर सिफारिश की है। मौजूदा 10-वर्षीय अंतराल के बजाय मांग है कि जैसे ही डीए 25% या 50% के स्तर को पार करे, उसे तुरंत मूल वेतन में जोड़ दिया जाए। The Economic Times की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस नए डीए मर्जर फॉर्मूले और 7% वार्षिक इंक्रीमेंट से पे-मैट्रिक्स लेवल 6 के कर्मचारियों का मासिक वेतन आगामी 7 वर्षों में ₹1.5 लाख के पार पहुंच जाएगा, जबकि लेवल 1 का सकल वेतन ₹77,000 से अधिक हो जाएगा。

मौजूदा वेतन संरचना की सीमाएं और DA मर्जर की जरूरत

वर्तमान 7वें वेतन आयोग में केंद्र सरकार साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में—AICPI-IW सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ता संशोधित करती है। लेकिन यह भत्ता वेतन पर्ची में अलग घटक के रूप में रहता है और मूल वेतन का हिस्सा नहीं बनता। 7वें वेतन आयोग में केवल 3% वार्षिक इंक्रीमेंट का प्रावधान होने से मूल वेतन की वास्तविक वृद्धि बाजार की महंगाई की तुलना में धीमी रहती है。

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA), भविष्य निधि अंशदान, ग्रेच्युटी और पेंशन की गणना मूल वेतन पर होती है। महंगाई भत्ते को अलग रखने से कर्मचारियों को इन लाभों में अपेक्षित वृद्धि नहीं मिलती। महानगरों में रहने वाले कर्मियों के लिए जीवन-यापन खर्च तेजी से बढ़ा है, जिसके लिए 10 साल तक नए आयोग की प्रतीक्षा करना अनुचित है。

कर्मचारी संगठनों की मांग: 25% सीमा और 7% इंक्रीमेंट

8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापनों में अलग-अलग संगठनों ने डीए मर्जर की सीमाएं सुझाई हैं। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AINPSEF) और नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल एम्प्लॉईज (NFPE) ने मांग की है कि 25% डीए पहुंचते ही इसे मूल वेतन में मिलाया जाए। वहीं, रेलवे सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 50% डीए होने पर मूल वेतन में विलय का मॉडल सुझाया है, जैसा 5वें वेतन आयोग के समय लागू हुआ था。

वार्षिक वेतन वृद्धि के संबंध में जेसीएम (NC-JCM) और रक्षा महासंघ (AIDEF) ने इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने का सुझाव दिया है, जबकि AINPSEF ने इसे 7% करने की मांग की है। संगठनों का तर्क है कि कर्मचारियों की उत्पादकता और जीडीपी में योगदान के मद्देनजर 6% से 7% वेतन वृद्धि न्यायसंगत है。

कर्मचारी संगठनों के प्रमुख प्रस्तावों का तुलनात्मक विवरण

विभिन्न कर्मचारी महासंघों द्वारा 8वें वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत प्रमुख मांगों और डीए मर्जर मॉडल का तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

कर्मचारी संगठन प्रस्तावित वार्षिक इंक्रीमेंट डीए मर्जर सीमा प्रस्तावित फिटमेंट प्रमुख उद्देश्य एवं तर्क
AINPSEF (एनपीएस फेडरेशन) 7% प्रति वर्ष 25% डीए होने पर 2.10 – 3.00 मुद्रास्फीति से सुरक्षा व मूल वेतन आधार विस्तार
NFPE (डाक कर्मचारी संघ) 6% से 7% 25% डीए होने पर 2.86 – 3.20 निचले संवर्गों की वास्तविक क्रय शक्ति में तेज सुधार
IRTSA (रेलवे सुपरवाइजर्स) 6% प्रति वर्ष 50% डीए होने पर 2.92 – 3.25 तकनीकी पदों की वेतन विसंगति व 50% विलय व्यवस्था
NC-JCM / AIDEF (रक्षा कर्मी) 6% प्रति वर्ष 50% डीए होने पर 2.86 – 4.00 15वें श्रम सम्मेलन के एक्रॉयड फॉर्मूले पर आधारित मांग
AIFPA (पेंशनर्स संघ) पेंशन संशोधन मांग 25% व 50% दोनों 3.83 वरिष्ठ पेंशनरों को मेडिकल व महंगाई से स्वतः राहत

लेवल 1 (एमटीएस / ग्रुप डी): ₹18,000 से ₹77,694 तक का 7-वर्षीय सफर

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि 8वें वेतन आयोग में 2.1 का फिटमेंट फैक्टर, 7% वार्षिक इंक्रीमेंट और 25% डीए मर्जर फॉर्मूला अपनाया जाता है, तो वेतन में व्यापक उछाल आएगा। 7वें वेतन आयोग में लेवल 1 का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। 2.1 फिटमेंट फैक्टर पर जनवरी 2026 से उनका प्रारंभिक संशोधित मूल वेतन ₹37,800 होगा。

इस मूल वेतन पर यदि 7% वार्षिक इंक्रीमेंट और प्रतिवर्ष 4% की औसत महंगाई वृद्धि जोड़ी जाए, तो वर्ष 2033 तक मूल वेतन बढ़कर ₹60,699 हो जाएगा। इस अवधि में 28% संचित डीए की राशि ₹16,995 बनेगी। चूंकि डीए 25% पार कर चुका होगा, अतः 28% डीए को मूल वेतन में मर्ज करने पर कर्मचारी का संशोधित मूल वेतन सीधे ₹77,694 प्रति माह हो जाएगा。

लेवल 6 (ASO / सब-इंस्पेक्टर): ₹1.52 लाख ग्रॉस का पूरा कैलकुलेशन

केंद्रीय मंत्रालयों में सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) और सब-इंस्पेक्टर जैसे लेवल 6 पदों का 7वें वेतन आयोग में बेसिक पे ₹35,400 है। 8वें वेतन आयोग में 2.1 फिटमेंट फैक्टर पर इनका प्रारंभिक मूल वेतन ₹74,340 निर्धारित होगा。

7% वार्षिक इंक्रीमेंट और 4% वार्षिक महंगाई वृद्धि के तहत जनवरी 2033 तक इनका मूल वेतन बढ़कर ₹1,19,374 हो जाएगा। इस समय 28% डीए के ₹33,425 जोड़ने पर कुल सकल वेतन ₹1,52,798 प्रति माह हो जाएगा। 25% थ्रेशोल्ड पर डीए मर्जर लागू होते ही यह राशि कर्मचारी का नया मूल वेतन बन जाएगी, जिससे भविष्य के भत्ते और पेंशन में तेज वृद्धि होगी。

तालिका: 7-वर्षीय वेतन वृद्धि और DA मर्जर का स्तरवार प्रभाव

नीचे दी गई तालिका में 2.1 फिटमेंट फैक्टर, 7% इंक्रीमेंट और डीए मर्जर के तहत 2026 से 2033 तक प्रमुख पे-लेवल्स की वेतन वृद्धि का विवरण है:

पे मैट्रिक्स स्तर 7वें CPC में बेसिक पे 8वें CPC बेसिक (2026) 7% इंक्रीमेंट बाद बेसिक (2033) 28% डीए राशि (2033) कुल सकल मासिक वेतन (2033)
Level 1 (एमटीएस / ग्रुप डी) ₹18,000 ₹37,800 ₹60,699 ₹16,995 ₹77,694
Level 2 (लोअर डिवीजन क्लर्क) ₹19,900 ₹41,790 ₹67,101 ₹18,788 ₹85,889
Level 4 (यूडीसी / टैक्स सहायक) ₹25,500 ₹53,550 ₹85,990 ₹24,077 ₹1,10,067
Level 6 (एएसओ / सब-इंस्पेक्टर) ₹35,400 ₹74,340 ₹1,19,374 ₹33,425 ₹1,52,798
Level 7 (अनुभाग अधिकारी) ₹44,900 ₹94,290 ₹1,51,409 ₹42,395 ₹1,93,804
Level 10 (ग्रुप ए अधिकारी) ₹56,100 ₹1,17,810 ₹1,89,173 ₹52,968 ₹2,42,141

फिटमेंट फैक्टर बनाम DA मर्जर: लाइवमिंट और विशेषज्ञ विश्लेषण

Livemint के आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार, पेंशनर्स संघ ने 3.83 और बीपीएमएस ने 4.0 फिटमेंट की मांग की है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारी एकमुश्त फिटमेंट के बजाय यदि गतिशील डीए मर्जर नियम लागू किया जाए, तो सरकार पर अचानक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और कर्मचारियों को भी महंगाई से नियमित सुरक्षा मिलेगी। 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य तक अपेक्षित है。

पेंशनभोगियों और भविष्य के भत्तों पर दूरगामी प्रभाव

डीए मर्जर का सीधा लाभ देश के 68 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को भी मिलेगा क्योंकि मूल पेंशन बढ़ने से महंगाई राहत (DR) का आधार बड़ा हो जाएगा। इसके साथ ही मकान किराया भत्ता (HRA) तथा ग्रेच्युटी सीमा में भी स्वतः बढ़ोतरी होगी। कर्मचारी यूनियनों का मानना है कि यह प्रगतिशील कदम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन स्तर को सुरक्षित रखेगा。

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