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UPI भुगतान पर केंद्र का फैसला: ₹2000 से ऊपर लगेगा 0.4% MDR

नई दिल्ली: भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 में संशोधन करते हुए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ढांचा अधिसूचित किया है। इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक मूल्य के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) व्यावसायिक भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का सांकेतिक शुल्क लागू होगा। वहीं आम नागरिकों के आपसी तबादले (P2P) और ₹2,000 तक के सभी छोटे व्यापारिक भुगतान पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।

कानूनी ढांचा और अधिसूचना: PSS एक्ट 2007 में संशोधन

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्र सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन कर सरकार को उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को अधिसूचित करने का वैधानिक अधिकार दिया है जहां कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसी विधिक व्यवस्था के तहत 14 सितंबर 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों पर शून्य एमडीआर रहेगा। इसके उपरांत 15 सितंबर 2026 को एनपीसीआई की संचालन समिति (UPI Steering Committee) की बैठक के बाद परिपत्र संख्या 237/2026-27 जारी किया गया。

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुधार संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट की सिफारिशों के सर्वथा अनुरूप है। संसदीय समिति ने रेखांकित किया था कि यूपीआई के तकनीकी बुनियादी ढांचे, सर्वर सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी रोकथाम के लिए बैंकों और पेमेंट प्रदाताओं के पास एक स्थायी राजस्व मॉडल होना जरूरी है। इस नए ढांचे से यूपीआई तंत्र आत्मनिर्भर बनेगा और बजटीय सब्सिडी पर निर्भरता घटेगी。

नया यूपीआई शुल्क ढांचा: नियम, दरें और श्रेणीवार वर्गीकरण

एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नई नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों में लेनदेन के नियमों और लागू शुल्कों का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

लेनदेन श्रेणी / प्रकार लेनदेन मूल्य सीमा लागू एमडीआर (MDR) दर अधिकतम शुल्क सीमा उपभोक्ता एवं व्यापारी पर प्रभाव
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P Transfer) समस्त राशि के लिए 0% (पूर्णतः निःशुल्क) कोई सीमा नहीं आम जनता के आपसी तबादले पूरी तरह मुफ्त रहेंगे
छोटे व्यापारी / किराना (P2PM) ₹1 लाख प्रति माह तक आय 0% (पूर्णतः निःशुल्क) शून्य शुल्क सब्जी विक्रेता, चाय दुकान और वेंडर पूरी तरह मुक्त
सामान्य मर्चेंट (P2M लेन-देन) ₹2,000 तक की राशि 0% (पूर्णतः निःशुल्क) शून्य शुल्क दैनिक उपयोग की 96% खरीदारी पर कोई शुल्क नहीं
बड़े मर्चेंट (P2M लेन-देन) ₹2,000 से अधिक राशि 0.4% सांकेतिक शुल्क अधिकतम ₹300 व्यापारी द्वारा बैंकों व पेमेंट गेटवे को देय शुल्क
अनिवार्य सेवाएं (रेलवे, ईंधन, बिजली) ₹2,000 से अधिक राशि ₹5 फ्लैट शुल्क ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन सार्वजनिक उपयोगिताओं की लागत पूरी तरह स्थिर रहेगी
पूंजी बाजार (म्यूचुअल फंड, शेयर) ₹2,000 से अधिक राशि 0.02% शुल्क अधिकतम ₹300 खुदरा निवेशकों की भागीदारी को प्रोत्साहन
RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन समस्त लेनदेन 0% (पूर्णतः निःशुल्क) शून्य शुल्क स्वदेशी कार्ड नेटवर्क पर कोई अधिभार नहीं

आम उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं: 100% मुफ्त रहेंगे रोजमर्रा के भुगतान

The Hindu की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि यूपीआई का उपयोग आम जनता के लिए महंगा नहीं होगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि बैंक और पेमेंट ऐप्स यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यापारी एमडीआर शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डाले। उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान हमेशा की तरह शत-प्रतिशत निःशुल्क रहेगा。

व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए किसी भी प्रकार का मासिक कोटा, लेनदेन संख्या पर पाबंदी या ऐप प्रदाताओं द्वारा प्लेटफॉर्म फीस लगाने पर कड़ा कानूनी प्रतिबंध है। बैंकों द्वारा निर्धारित दैनिक सीमा केवल सुरक्षा उपाय है, कोई व्यावसायिक शुल्क नहीं। कुल यूपीआई लेनदेन में संख्या के लिहाज से 37 प्रतिशत और मूल्य के लिहाज से 70 प्रतिशत हिस्सा आपसी P2P ट्रांसफर का है, जो किसी भी सीमा तक पूरी तरह मुफ्त रहेगा。

छोटे वेंडर्स और 96% व्यापारिक लेनदेन को पूर्ण सुरक्षा

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि देश में होने वाले कुल मर्चेंट भुगतानों में से केवल 4 प्रतिशत लेनदेन ही इस नए एमडीआर दायरे में आएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि खुदरा बाजारों में 96 प्रतिशत से अधिक लेनदेन ₹2,000 की सीमा से नीचे होते हैं या P2PM ढांचे में पूरी तरह छूट प्राप्त हैं。

सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले वेंडर, चाय-नाश्ते की दुकानें और स्थानीय फल-सब्जी विक्रेता जो प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर में रखा गया है। यह व्यवस्था असंगठित क्षेत्र के सूक्ष्म व्यापारियों को बिना किसी वित्तीय बोझ के औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़े रखेगी। इसके अतिरिक्त एकत्र कुल एमडीआर का 5 प्रतिशत हिस्सा समर्पित कोष में जाएगा, जिससे छोटे व्यापारियों को डिजिटल तकनीक अपनाने में सहायता दी जाएगी。

अनिवार्य सेवाओं और पूंजी बाजार के लिए विशेष रियायती दरें

अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संवेदनशील और आवश्यक जनोपयोगी क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने विशेष फॉर्मूला तैयार किया है। भारतीय रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल पंप और कृषि आदानों से जुड़े भुगतानों पर प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय ₹5 का एकमुश्त फ्लैट शुल्क तय किया गया है。

ये उद्योग श्रेणियां यूपीआई मर्चेंट लेनदेन की संख्या का 17 प्रतिशत और मूल्य का 46 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं। इन क्षेत्रों में फ्लैट ₹5 की दर तय होने से जनता पर आवश्यक सेवाओं की लागत बढ़ने का कोई खतरा नहीं रहेगा। वहीं शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज फर्मों में खुदरा निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मात्र 0.02 प्रतिशत की न्यूनतम दर रखी गई है。

डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती और वित्तीय स्थिरता

प्रति माह 15 अरब से अधिक यूपीआई लेनदेन को शून्य डाउनटाइम और विश्वस्तरीय साइबर सुरक्षा के साथ संचालित करने के लिए बैंकों को भारी पूंजीगत निवेश करना पड़ता है। एमडीआर की यह 0.4 प्रतिशत राशि ग्राहक बैंक, मर्चेंट बैंक और एनपीसीआई के बीच बंटेगी। इससे टियर-2 और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल विस्तार को नई गति मिलेगी और बैंकों का परिचालन घाटा समाप्त होगा。

निष्कर्ष: सतत विकास और डिजिटल स्वावलंबन का संतुलित मॉडल

संक्षेप में, यह नई नीति डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती प्रदान करने वाला प्रगतिशील कदम है। आम नागरिकों और छोटे वेंडरों के लिए मुफ्त सुविधा को अक्षुण्ण रखते हुए बड़े व्यापारिक लेनदेन से न्यायसंगत राजस्व बनाया गया है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला यह ढांचा भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाएगा。

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