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उबर ड्राइवर से एशियन गेम्स मेडलिस्ट: सलमान खान ने रचा इतिहास

आईची-नागोया / नई दिल्ली: जब हौसले बुलंद हों, तो अभावों की दीवार भी रास्ता छोड़ देती है। जापान के आईची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में गुरुवार, 24 सितंबर को भारतीय खेल इतिहास का नया अध्याय लिखा गया। कभी राजधानी दिल्ली की सड़कों पर परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात उबर कैब (Uber Cab) चलाने वाले रोवर सलमान खान ने भारतीय नौसेना के एथलीट सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुषों की डबल स्कल्स रोइंग में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक है। सोशल मीडिया पर इस अविश्वसनीय संघर्ष और सफलता की कहानी तेजी से वायरल हो रही है。

अंतिम पलों का रोमांचक मुकाबला: 6:13.25 में तय किया पोडियम का सफर

India Today की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार सुबह आयोजित पुरुषों की 2000 मीटर डबल स्कल्स स्पर्धा का फाइनल मुकाबला बेहद कड़ा रहा। भारतीय जोड़ी सतनाम सिंह और सलमान खान ने शुरुआत से ही आक्रामक लय बनाए रखी। रेस के पहले 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर के चेकपॉइंट तक भारतीय नाव लगातार दूसरे स्थान पर बनी हुई थी। अंतिम 500 मीटर में उज्बेकिस्तान की टीम ने जबर्दस्त स्प्रिंट लगाई, लेकिन भारतीय जोड़ी ने दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और 6 मिनट 13.25 सेकंड (6:13.25) का उत्कृष्ट समय निकालते हुए तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक पक्का किया。

इस कड़े मुकाबले में चीन के यी जूदी और यीदे नी ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि उज्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोजबेक ममातकुलोव ने रजत पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी की इस शानदार टाइमिंग और दृढ़ता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय रोइंग अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पोडियम फिनिश की वास्तविक हकदार बन चुकी है。

एशियन गेम्स 2026: मेंस डबल स्कल्स फाइनल का आधिकारिक रिजल्ट

नागोया वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित पुरुषों की डबल स्कल्स 2000 मीटर फाइनल के आधिकारिक नतीजे और शीर्ष टीमों का प्रदर्शन नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

स्थान / पदक देश (Country) एथलीटों के नाम (Rowers) फाइनल समय (Timing) प्रदर्शन विश्लेषण
1 (स्वर्ण पदक / Gold) चीन (China) यी जूदी एवं यीदे नी 6:07.82 शुरुआत से अंत तक मजबूत बढ़त और तकनीकी श्रेष्ठता
2 (रजत पदक / Silver) उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) पावेल सोरिन व मेखरोजबेक 6:11.40 अंतिम 500 मीटर में आक्रामक स्प्रिंट से बढ़त बनाई
3 (कांस्य पदक / Bronze) भारत (India) सलमान खान एवं सतनाम सिंह 6:13.25 भारत का ऐतिहासिक पहला पदक, 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर रहे
4 (चौथा स्थान) जापान (Japan) ताकुमा शिनोहारा एवं काजुकी यामाओका 6:16.80 घरेलू परिस्थितियों में अंतिम चरण में पिछड़ी जापानी टीम
5 (पांचवां स्थान) कजाकिस्तान (Kazakhstan) व्लादिस्लाव याकोवलेव व आंद्रेई जुबिन 6:21.15 मध्यम गति से शुरुआत, पोडियम की दौड़ से बाहर रहे

अमेठी के गांव से दिल्ली की कैब तक: सलमान का दर्दनाक अतीत

सलमान खान की यह सफलता किसी परीकथा जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे आंसुओं और पसीने से भरा लंबा संघर्ष है। सलमान उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के छोटे से गांव पूरे धिंगई के रहने वाले हैं। वह चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान हरियाणा के तावड़ू में ट्रकों की बॉडी बनाने वाली दुकान पर वेल्डिंग मजदूरी करते थे, जहां सलमान ने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की。

जब सलमान 18 वर्ष के थे, तब डेंगू से उनके पिता का निधन हो गया। परिवार में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं था। छह छोटे भाई-बहनों और मां की जिम्मेदारी 18 साल के सलमान पर आ गई। फौज में जाने का सपना छोड़कर सलमान दिल्ली आ गए और किराए की कार लेकर उबर कैब चलाना शुरू किया। वह दिल्ली की सड़कों पर 16-18 घंटे लगातार गाड़ी चलाते थे ताकि घर पैसे भेज सकें。

दोस्त की सलाह, फौज की भर्ती और नाव का अनचाहा सफर

SSBCrack रक्षा समाचार के अनुसार, साल 2018 में सलमान के जीवन में मोड़ आया जब एक मित्र ने उनकी कद-काठी देखकर उन्हें सेना भर्ती रैली में जाने की सलाह दी। सलमान ने कैब साथी को सौंपी और चार महीने पसीना बहाकर अभ्यास किया। सितंबर 2018 में उन्होंने परीक्षा पास की और बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप (BEG) पुणे में सैनिक के रूप में शामिल हुए。

फौज में कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा की नजर सलमान पर पड़ी। उन्होंने सलमान को रोइंग में आने को कहा। शुरुआत में सलमान को नौकायन के बारे में कुछ पता नहीं था और वह हिचक रहे थे। लेकिन कोचों के भरोसे पर वह नाव पर बैठे। पहली ही प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर उनका विश्वास बढ़ा। इसके बाद आर्मी रोइंग नोड में उनका चयन हुआ जहां कोच कुदरत अली और मेजर नागेंद्र हुड्डा ने उन्हें तराशा。

हार मानने के कगार से नायब सूबेदार बनने तक की दास्तान

रोइंग की ट्रेनिंग बेहद कठिन थी। शुरुआती दौर में नतीजे न आने पर सलमान ने दो बार रोइंग छोड़कर सामान्य सैन्य ड्यूटी पर लौटने का मन बना लिया था। लेकिन कोचों ने उन्हें प्रेरित किया। इसके बाद 2022 गुजरात नेशनल गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। 2023 गोवा नेशनल गेम्स और 2024 एशियन रोइंग कप में स्वर्ण जीतकर उन्होंने पहचान बनाई। इसके बाद सेना ने उन्हें पदोन्नत कर नायब सूबेदार बनाया。

हैंडबॉल खिलाड़ी से नौसेना रोवर बने सतनाम सिंह की जुगलबंदी

इस पदक में सलमान के साथी सतनाम सिंह का योगदान भी अहम रहा। पंजाब के मानसा के रहने वाले सतनाम पहले राष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी थे। 2018 में ओलंपिक रोवर स्वर्ण सिंह विर्क ने उनकी क्षमता पहचानकर उन्हें रोइंग में उतारा। नौसेना में शामिल होकर सतनाम ने कई राष्ट्रीय पदक जीते। हांगझोउ एशियन गेम्स 2023 में उन्होंने कांस्य पदक जीता था。

आईची-नागोया गेम्स से कुछ दिन पहले भारतीय टीम में बड़ा फेरबदल हुआ था। सतनाम और सलमान को अचानक नई डबल स्कल्स जोड़ी में डाला गया था। दोनों ने पेशेवर अनुशासन दिखाते हुए कम समय में तालमेल बैठाया और भारत के लिए ऐतिहासिक पदक जीत लिया。

सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी: देश भर से मिल रही बधाइयां

जैसे ही नागोया से सलमान और सतनाम के पदक जीतने की खबर आई, इंटरनेट पर ‘Delhi Cab Driver to Asian Games Medalist’ ट्रेंड करने लगा। खेल मंत्रालय, भारतीय सेना और हस्तियों ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि की सराहना की है। यह संघर्ष गाथा उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभावों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने की जंग लड़ रहे हैं。

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