नई दिल्ली: देश के छोटे शहरों और सुदूरवर्ती इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘उड़े देश का आम नागरिक’ यानी उड़ान (UDAN) योजना के अगले चरण का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया है। नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित अशोका होटल में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू और राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की मौजूदगी में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इस नई नीति के तहत अगले एक दशक में 120 नए हवाई गंतव्यों को विकसित करने और 4 करोड़ से अधिक नए यात्रियों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है。
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है संशोधित उड़ान नीति
ANI News की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि संशोधित उड़ान योजना चार मुख्य स्तंभों पर खड़ी है। पहला स्तंभ आम नागरिकों के लिए हवाई किराए की सामर्थ्यता (Affordability) है। दूसरा स्तंभ एयरलाइन ऑपरेटरों के लिए क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन की स्थिरता (Sustainability) सुनिश्चित करना है। तीसरा स्तंभ बुनियादी ढांचे के तीव्र विकास के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड फ्रेमवर्क की स्थापना है। चौथा स्तंभ स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देते हुए भविष्य में ‘मेड इन इंडिया’ नागरिक विमानों के निर्माण हेतु इकोसिस्टम तैयार करना है。
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित राज्य’ ही ‘विकसित भारत’ की आधारशिला है। जब तक देश के अंतिम छोर तक आधुनिक बुनियादी ढांचा और सस्ती आवागमन सुविधाएं नहीं पहुंचेंगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा। टीम भारत की इस पहल से केंद्र, राज्य सरकारें और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) मिलकर एक ऐसा तंत्र बना, जो छोटे शहरों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ सके。
उड़ान योजना: 2016 से 2026 तक की प्रगति और नए लक्ष्य
उड़ान योजना के पहले दशक की उपलब्धियों और आगामी दस वर्षों के नए राष्ट्रीय लक्ष्यों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| प्रमुख मानक एवं पैरामीटर | 2016 से 2026 तक की उपलब्धियां | अगले 10 वर्षों के लिए निर्धारित लक्ष्य | राष्ट्रीय प्रभाव एवं आर्थिक लाभ |
|---|---|---|---|
| सक्रिय हवाई मार्ग (Routes) | 687 रीजनल रूट्स का सफल परिचालन | 300 से अधिक नए रणनीतिक रूट्स | दूरस्थ जिलों की बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी |
| हवाई अड्डे व हेलीपैड | 95 हवाई अड्डे व हेलीपोर्ट चालू | 120 नए गंतव्य व ग्रीनफील्ड फील्ड्स | पर्यटन, क्षेत्रीय विकास और व्यापार को गति |
| लाभान्वित यात्री संख्या | 1.71 करोड़ से अधिक आम नागरिक | 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों का लक्ष्य | मध्यम वर्ग और व्यापारियों को किफायती सफर |
| संचालित उड़ानें | 3.66 लाख से अधिक उड़ानें | दैनिक उड़ानों की आवृत्ति में दोगुनी वृद्धि | राज्यों के बीच यात्रा समय में भारी बचत |
| एविएशन में रोजगार | 30 लाख (2014) से 77 लाख (2026) | 2040 तक 2.5 करोड़ नौकरियों का विजन | पायलट, केबिन क्रू और ग्राउंड हैंडलिंग विस्तार |
| राज्यों के साथ साझेदारी | अलग-अलग चरणों में आंशिक समझौते | 21 राज्यों व UTs के साथ साझा MoU | भूमि, सुरक्षा और बिजली में एकीकृत सहयोग |
| परियोजना चयन प्रक्रिया | पारंपरिक मांग आधारित मॉडल | डिजिटल चैलेंज मोड पोर्टल व्यवस्था | पारदर्शिता और त्वरित प्रशासनिक मंजूरी |
चैलेंज मोड पोर्टल: राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘एरोड्रम डेवलपमेंट के लिए चैलेंज मोड पोर्टल’ लॉन्च किया। इसके साथ ही अगले चरण की रूट बिडिंग के लिए स्कीम डॉक्यूमेंट जारी किया गया। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत अब राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्रों में संभावित एयरस्ट्रिप, वाटर एरोड्रम और हेलीपैड के विकास के लिए सीधे ऑनलाइन नामांकन कर सकेंगे。
इस चैलेंज मोड से राज्यों के बीच बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनेगी। जो राज्य भूमि अधिग्रहण, सुरक्षा और दमकल सुविधाएं तेजी से उपलब्ध कराएंगे, उनके हवाई अड्डों को प्राथमिकता से विकसित किया जाएगा। इसके अलावा पारदर्शी रूट बिडिंग प्रणाली के जरिए एयरलाइनों को आमंत्रित किया जाएगा, जिससे बिना हवाई सेवा वाले क्षेत्रों में उड़ानों की निरंतरता बनी रहे。
पूर्णिया से तेजू तक: क्षेत्रीय समृद्धि के इंजन बने छोटे हवाई अड्डे
केंद्रीय मंत्री ने देश के सुदूर इलाकों में कनेक्टिविटी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने बिहार के पूर्णिया और अरुणाचल प्रदेश के तेजू हवाई अड्डों का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी ये इलाके निकटतम हवाई पट्टी से सैकड़ों किलोमीटर दूर कटे हुए थे। आज इन हवाई पट्टियों के चालू होने से स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन को बढ़ावा मिला है। पूर्णिया से कनेक्टिविटी मिलने से सीमांचल क्षेत्र के लोगों को त्वरित आवागमन की सुविधा मिली है。
इसी तरह पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख में हेलीकॉप्टर संचालन से दुर्गम घाटियों में संपर्क आसान हुआ है। राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि 2016 में जब उड़ान योजना शुरू हुई थी, तब छोटे शहरों में हवाई यात्रा की व्यवहार्यता को लेकर संशय था। लेकिन दस वर्षों में इस योजना ने साबित किया है कि आम नागरिक किफायती यात्रा के लिए हवाई मार्ग अपना रहा है。
रोजगार और मेड इन इंडिया विमान निर्माण का विजन
नागरिक उड्डयन क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में विमानन क्षेत्र से लगभग 30 लाख रोजगार जुड़े थे, जो 2026 में बढ़कर 77 लाख हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य 2040 तक इसे 2.5 करोड़ तक ले जाने का है। नया चरण केवल टिकटों पर सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में विमानों के रख-रखाव और ओवरहाल (MRO) केंद्रों को भी प्रोत्साहित कर रहा है。
इसके अतिरिक्त, सरकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी कंपनियों के सहयोग से स्वदेशी सिविल विमानों के विकास पर काम कर रही है। जब भारत अपने स्थानीय मार्गों पर स्वदेशी विमान उड़ाएगा, तब विदेशी मुद्रा की बचत होगी। राज्यों के साथ हुए इन 21 समझौतों में राज्य सरकारों ने विमानन ईंधन (VAT) पर करों में रियायत देने और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है。
निष्कर्ष: भारत के एविएशन मैप पर नए भारत का उदय
उड़ान योजना का यह नया स्वरूप भारत के उड्डयन परिदृश्य को विकेंद्रीकृत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 120 नए गंतव्यों का नेटवर्क तैयार होने से न केवल पिछड़े क्षेत्रों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि पर्यटन के नए केंद्र भी उभरेंगे। आने वाले वर्षों में जब 4 करोड़ नए नागरिक उड़ान भरेंगे, तो यह मध्यम वर्ग की बढ़ती आर्थिक शक्ति का प्रमाण होगा। केंद्र और राज्यों का यह तालमेल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीन पर उतारने का मजबूत आधार बन चुका है。













