मुंबई: भारतीय शेयर बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र की भारी तबाही के बाद शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को शुरुआती कारोबार में तेज उतार-चढ़ाव (high volatility) देखने को मिला। गुरुवार को 1,247 अंकों के ऐतिहासिक गोते के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक बीएसई सेंसेक्स सुबह के सत्र में 86 अंक चढ़कर 73,672.98 के स्तर पर पहुंचा था। हालांकि वैश्विक दबाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाजार इस शुरुआती सुधार को बरकरार नहीं रख सका और जल्द ही लाल निशान में फिसल गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 12.95 अंक की हल्की गिरावट के साथ 73,568.22 पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक एनएसई निफ्टी 50 भी शुरुआती दौर में 18.80 अंक सुधरकर 23,080.45 तक जाने के बाद 16.75 अंक टूटकर 23,049.40 के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया。
बाजार में भारी उतार-चढ़ाव: क्रूड ऑयल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दोहरा झटका
The Hindu की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बाजारों की चाल को कई नकारात्मक वैश्विक संकेतकों ने गंभीर रूप से प्रभावित किया। सबसे प्रमुख कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) का लगातार ऊंचे स्तरों पर बने रहना है। हालांकि ब्रेंट क्रूड आज 0.99 प्रतिशत की मामूली नरमी के साथ 105.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, लेकिन 100 डॉलर से ऊपर का स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे महंगे कच्चे तेल के कारण देश के आयात बिल, चालू खाता घाटा (CAD) और घरेलू मुद्रास्फीति पर सीधा दबाव पड़ता है。
इसके साथ ही अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर मंडराना वैश्विक शेयर बाजारों के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इस तेजी के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपनी पूंजी निकालकर सुरक्षित अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं। आधिकारिक एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से ₹5,027.36 करोड़ के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की थी, जिससे बाजार की धारणा बुरी तरह हिल गई थी。
सेंसेक्स-निफ्टी का मुख्य डेटा: 24 और 25 सितंबर की तुलनात्मक स्थिति
गुरुवार की ऐतिहासिक बिकवाली और शुक्रवार के शुरुआती सत्र के प्रमुख बाजार आंकड़ों, सूचकांकों और कमोडिटी की तुलनात्मक स्थिति का विस्तृत विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | 25 सितंबर 2026 (सुबह का सत्र) | 24 सितंबर 2026 (पिछला बंद) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार पर मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 73,568.22 | 73,580.54 | -12.95 अंक (-0.02%) | शुरुआती 86 अंकों की बढ़त गंवाकर सपाट |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 23,049.40 | 23,063.10 | -16.75 अंक (-0.07%) | 23,050 के स्तर पर बिकवाली और खरीदारी में रस्साकशी |
| सेंसेक्स इंट्राडे हाई (BSE High) | 73,672.98 | 74,828.25 | +86.00 अंक (सुबह) | निचले स्तरों पर तकनीकी सुधार की नाकाम कोशिश |
| निफ्टी इंट्राडे हाई (NSE High) | 23,080.45 | 23,446.80 | +18.80 अंक (सुबह) | 23,100 के अहम रेजिस्टेंस से वापसी |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $105.50 प्रति बैरल | $106.55 प्रति बैरल | -0.99% (हल्की नरमी) | आयात बिल और रिफाइनरी लागत पर दबाव बरकरार |
| अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड (US 10Y Yield) | 5.20% | 5.18% | +0.02% (मजबूत) | उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी को बढ़ावा |
| विदेशी संस्थागत निवेशक (FII Outflow) | कारोबार जारी | -₹5,027.36 करोड़ | आक्रामक शुद्ध बिकवाली | घरेलू फंड्स पर बाजार संभालने का दारोमदार |
सेक्टरवार स्थिति: बैंकिंग-कैपिटल गुड्स में सहारा, आईटी शेयरों में बिकवाली
Kotak Neo की दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार के विभिन्न सेक्टर्स में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक ओर बैंकिंग, पावर और कैपिटल गुड्स शेयरों ने सूचकांक को निचले स्तरों से सहारा दिया, वहीं दूसरी ओर दिग्गज आईटी और टेक शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में लार्सन एंड टुब्रो (L&T), एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयर रहे。
इसके विपरीत, तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में बिकवाली हावी रही। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और टेक महिंद्रा के शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। इसके अलावा बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी (NTPC) में भी मुनाफावसूली दर्ज की गई। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की आशंका से कंपनियों के आईटी खर्च में कटौती की चिंता के चलते भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर लगातार दबाव देखा जा रहा है。
आईआरडीएआई के कमीशन नियमों और वैश्विक बाजारों का प्रभाव
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार को आई 1.67 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के पीछे बीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI) के नए प्रस्ताव भी एक बड़ा कारण थे। बीमा एजेंटों के कमीशन ढांचे में प्रस्तावित बदलावों की खबरों से बीमा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयरों में घबराहट फैल गई थी, जिसने निफ्टी को गुरुवार को 383 अंक नीचे धकेल दिया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार ने कहा कि जब कई नकारात्मक खबरें एक साथ आती हैं, तो बाजार में घबराहट पैदा होना स्वाभाविक है。
विजयकुमार ने कहा कि बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की उछाल और आईआरडीएआई के प्रस्तावों ने मिलकर बाजार को हिला दिया था। भले ही क्रूड में हल्की नरमी आई हो, लेकिन $105-$106 प्रति बैरल का स्तर भारत के लिए बड़ी चुनौती है। एशियाई बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई 225 बढ़त में रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग लाल निशान में कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे。
खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति और तकनीकी आउटलुक
शेयर बाजार के वर्तमान अस्थिर माहौल में वित्तीय विश्लेषक खुदरा निवेशकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 23,000 का स्तर एक बेहद महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट स्तर है। यदि निफ्टी 23,000 के नीचे फिसलता है, तो इसमें 22,850 तक की और गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, किसी भी मजबूत तेजी के लिए निफ्टी को 23,200 के स्तर को पार करना जरूरी होगा。
मार्केट जानकारों का सुझाव है कि खुदरा निवेशकों को घबराहट में आकर अच्छी क्वालिटी वाली लार्ज-कैप कंपनियों के शेयर औने-पौने दाम पर नहीं बेचने चाहिए। उच्च मूल्यांकन वाले मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में नई आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए और एसआईपी (SIP) के जरिए मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में चरणबद्ध तरीके से पूंजी लगानी चाहिए। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की चाल, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर निर्भर करेगी。













