मुंबई: पिछले कारोबारी सत्र में मची भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (25 सितंबर 2026) को राहत भरी रिकवरी देखने को मिली। निचले स्तरों पर ब्लू-चिप बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी शेयरों में आई वैल्यू बाइंग के दम पर बेंचमार्क सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 50 भी 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,140.50 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि दिन के कारोबार के दौरान बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखा गया और सेंसेक्स ने 73,968 के उच्च स्तर तथा 73,477 के निचले स्तर के बीच 490 अंकों के दायरे में कारोबार किया।
सेंसेक्स और निफ्टी में सुधार: 7 हफ्तों की लगातार गिरावट का रिकॉर्ड
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बाजार हरे निशान में समाप्त हुआ, लेकिन साप्ताहिक आधार पर बाजार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। निफ्टी में लगातार सातवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई, जो फरवरी-मार्च 2020 में कोरोना महामारी के बाद सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला है। इस सात हफ्तों में निफ्टी अपने शीर्ष स्तरों से करीब 5.8 प्रतिशत यानी 1,430 अंक लुढ़क चुका है।
इससे पहले गुरुवार (24 सितंबर 2026) को भारी बिकवाली के बीच सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर और निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ था। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹5,027.36 करोड़ की शुद्ध इक्विटी बेची थी। इस तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को घरेलू तरलता और खुदरा खरीदारी के चलते बाजार ने 23,000 के अहम मनोवैज्ञानिक सपोर्ट को बचा लिया।
बाजार में रिकवरी का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और सेक्टर प्रदर्शन
शुक्रवार को सत्र के दौरान प्रमुख वित्तीय संकेतकों, सूचकांकों और कमोडिटी बाजार में हुए उतार-चढ़ाव का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | बंद स्तर (25 सितंबर 2026) | पिछला बंद (24 सितंबर 2026) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार की मुख्य गतिविधि |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 73,895.74 | 73,580.54 | +315.20 अंक (+0.43%) | 19 शेयर चढ़े, 11 में गिरावट |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 23,140.50 | 23,063.10 | +77.40 अंक (+0.34%) | 34 शेयर चढ़े, 15 गिरे |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $105.40 / बैरल | $106.57 / बैरल | -1.10% की नरमी | कूटनीतिक वार्ता से कीमतों में राहत |
| विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) | $766 अरब (Record High) | $761 अरब | +$5 अरब का इजाफा | 11.2 महीने के आयात का मजबूत कवर |
| निफ्टी रियल्टी इंडेक्स (Nifty Realty) | 1,048.20 | 1,029.15 | +1.85% की बढ़त | त्योहारी मांग से हाउसिंग शेयरों में उछाल |
| निफ्टी ऑटो इंडेक्स (Nifty Auto) | 25,480.60 | 25,116.45 | +1.45% की मजबूती | एमएंडएम और मारुति में वैल्यू बाइंग |
| निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT) | 35,890.30 | 36,197.80 | -0.85% की गिरावट | अमेरिकी टेक कमजोरी का दबाव |
| विदेशी निवेशक (FII Outflow) | -₹5,027.36 करोड़ | गुरुवार का डेटा | लगातार निकासी जारी | उभरते बाजारों से पूंजी निकासी |
क्रूड ऑयल में नरमी और ऑटो-रियल्टी शेयरों की अगुवाई
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बाजार में रिकवरी का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रही। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान कूटनीतिक संघर्ष विराम की उम्मीदों से ब्रेंट क्रूड 1.10 प्रतिशत गिरकर 105.4 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे भारत की आयात लागत और मुद्रास्फीति पर दबाव कम होने की उम्मीद जगी, जिससे तेल संवेदी क्षेत्रों में खरीदारी लौटी।
सेंसेक्स की कंपनियों में एक्सिस बैंक सबसे अधिक 2.82 प्रतिशत चढ़कर शीर्ष पर रहा। महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 2.24 प्रतिशत उछले, जबकि एशियन पेंट्स 1.93 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 1.21 प्रतिशत, एचसीएल टेक 1.17 प्रतिशत और टाइटन 1.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (TCI) के शेयर बायबैक घोषणा के बाद 15 प्रतिशत तक चढ़े। दूसरी ओर ट्रेंट 1.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा। इंफोसिस, कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टाटा स्टील में भी बिकवाली रही।
आरबीआई बुलेटिन: $766 अरब का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत अर्थव्यवस्था
The Hindu में प्रकाशित आरबीआई बुलेटिन रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने 25 सितंबर 2026 को जारी बुलेटिन में अर्थव्यवस्था की मजबूती की पुष्टि की है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 18 सितंबर 2026 तक $766 अरब के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह विशाल भंडार देश के 11.2 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है और कुल विदेशी कर्ज के 100 प्रतिशत से अधिक को कवर करता है।
आरबीआई बुलेटिन के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में निजी कंपनियों द्वारा कुल ₹3.2 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय की योजना बनाई गई है, जिसका नेतृत्व बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र कर रहे हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने सचेत किया है कि पश्चिम एशिया तनाव, वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की अस्थिरता भारत के विकास के लिए प्रमुख बाहरी जोखिम बने हुए हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय और टेक्निकल आउटलुक
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, तेज गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में बार्गेन हंटिंग ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की अनिश्चितता ने बढ़त को सीमित रखा। सूचकांकों का 23,000 के ऊपर बने रहना यह दर्शाता है कि घरेलू तरलता बाहरी दबावों को सोखने की मजबूत क्षमता रखती है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे का कहना है कि निफ्टी का शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर अभी सतर्कता की मांग करता है। नीचे की ओर 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट है, जिसके टूटने पर निफ्टी 22,700 तक जा सकता है। ऊपर 23,200 से 23,300 मजबूत रेजिस्टेंस है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने भी निवेशकों को सलाह दी है कि विदेशी फंड्स की बिकवाली के चलते बाजार में अभी सतर्क और चुनिंदा रुख ही अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष और आगामी कारोबारी रणनीति
निष्कर्षतः, 25 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए 7 हफ्तों की लगातार गिरावट का रिकॉर्ड लेकर आया, लेकिन शुक्रवार की रिकवरी ने संकेत दिया कि 23,000 के स्तर पर घरेलू खरीदार सक्रिय हैं। अगले सप्ताह बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों, कूटनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। खुदरा निवेशकों के लिए समझदारी भरी रणनीति यह होगी कि वे घबराहट में अच्छे शेयर न बेचें, बल्कि इस गिरावट का लाभ उठाते हुए चुनिंदा लार्ज-कैप कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखें।













