मुंबई: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध संकट, कच्चे तेल में आए तीव्र उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचने के चलते सोमवार, 28 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर भालुओं का दबदबा रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह के सत्र में 1,000 अंक से अधिक टूटकर 72,909.34 के निचले स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 305 अंक यानी 1.32 प्रतिशत गिरकर 22,835.15 के स्तर तक फिसल गया। बाजार में मची इस चौतरफा बिकवाली से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 6 लाख करोड़ रुपये घटकर करीब 476 लाख करोड़ रुपये रह गया。
अमेरिका-ईरान तनाव में आग: सीजफायर प्रस्ताव खारिज
The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिवसीय युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की शर्त के साथ यह प्रस्ताव रखा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वे इस समझौते को स्वीकार नहीं करते। इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश अमेरिका और इजरायल के आगे नहीं झुकेगा। इस तकरार ने वैश्विक बाजारों में युद्ध लंबा खिंचने और ऊर्जा संकट गहराने की आशंकाओं को भड़का दिया है。
कच्चा तेल $107 के करीब: जेपी मॉर्गन की चेतावनी
सप्लाई रूट पर मंडराते खतरे से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उबाल आ गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने चेतावनी देते हुए कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब वे तेल बाजार के लिए कोई निश्चित बेसलाइन तय करने की स्थिति में नहीं हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में क्रूड का $107 के पार निकलना देश के आयात बिल, चालू खाता घाटा और घरेलू महंगाई के लिए बड़ा खतरा है。
मार्केट क्रैश का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और वित्तीय संकेतक
सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान सुबह के शुरुआती समय में प्रमुख वित्तीय संकेतकों और बेंचमार्क सूचकांकों में दर्ज भारी गिरावट का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | वर्तमान स्तर (28 सितंबर 2026) | पिछला बंद स्तर | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार का प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 72,909.34 | 73,895.74 | -986.40 अंक (-1.33%) | सत्र में 1,000 अंक से अधिक का भीषण गोता |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 22,835.15 | 23,063.10 | -305.00 अंक (-1.32%) | 22,850 का अहम मनोवैज्ञानिक सपोर्ट टूटा |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $106.85 / बैरल | $104.75 / बैरल | +2.00% (तीव्र उछाल) | आयात बिल, कैड और महंगाई पर सीधा दबाव |
| अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड | 5.22% | 5.14% | +8 बीपीएस (2004 के बाद उच्चतम) | इक्विटी बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी |
| भारतीय रुपया (USD / INR) | ₹95.89 प्रति डॉलर | ₹95.75 प्रति डॉलर | -14 पैसे की गिरावट | ₹96 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब रुपया |
| विदेशी निवेशक बिकवाली (FIIs) | -₹25,682 करोड़ | सितंबर माह का कुल प्रवाह | लगातार बिकवाली जारी | इक्विटी से विदेशी फंड्स की भारी निकासी |
| बीएसई मार्केट कैप (Investor Wealth) | ₹476 लाख करोड़ | ₹482 लाख करोड़ | -₹6 लाख करोड़ स्वाहा | निवेशकों को एक सत्र में भारी पूंजीगत घाटा |
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 2004 के बाद सबसे बड़ा उछाल
शेयर बाजार के इस क्रैश का तीसरा बड़ा कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया अप्रत्याशित उछाल रहा। अमेरिका की 10-वर्षीय बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2 प्रतिशत के पार निकल गई, जो 2004 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसी तरह 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.5 प्रतिशत और दो-वर्षीय यील्ड 4.9 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना को टाल दिया है। जब सुरक्षित डेट बाजार में 5 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न मिल रहा हो, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों की जोखिम भरी इक्विटी से पूंजी निकालकर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं。
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में: बैंकिंग और फाइनेंस पस्त
India TV News के बाजार अपडेट के अनुसार, सोमवार को बिकवाली इतनी व्यापक रही कि सेंसेक्स के सभी 30 शेयर नुकसान में कारोबार करते पाए गए। सबसे तगड़ा झटका बैंकिंग और वित्तीय शेयरों को लगा। बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक में 1.5 से 2.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इसके अलावा टेक महिंद्रा, एलएंडटी, सन फार्मा और भारती एयरटेल जैसे शेयर भी बिकवाली में पस्त हो गए। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट दर्ज की गई。
रुपया ₹95.89 के निचले स्तर पर: 96 का खतरा मंडराया
विदेशी निवेशकों की डॉलर निकासी और महंगे कच्चे तेल के आयात भुगतान के दबाव से भारतीय रुपया 14 पैसे कमजोर होकर ₹95.89 प्रति डॉलर पर आ गया। यदि क्रूड 107 डॉलर से ऊपर टिका रहा, तो रुपया ₹96 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, क्रूड ऑयल और मजबूत डॉलर इंडेक्स रुपये की रिकवरी को रोक रहे हैं। आने वाले दिनों में रुपया ₹95.50 से ₹96.50 के दायरे में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है。
एशियाई बाजारों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की निकासी
भारतीय शेयर बाजारों की गिरावट अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप है। सोमवार सुबह एशियाई शेयर बाजारों में भी तेल में तेजी के कारण मंदी रही। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 2 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 1.7 प्रतिशत से अधिक टूट गया। दूसरी ओर, एनएसई के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को 3,694 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी.के. विजयकुमार का कहना है कि सितंबर में विदेशी बिकवाली बहुत आक्रामक रही है और इस महीने अब तक एक्सचेंजों से 25,682 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी बाहर जा चुकी है。
निष्कर्ष: खुदरा निवेशकों के लिए आगे की रणनीति
सोमवार, 28 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र स्पष्ट करता है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव शांत नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक शेयर बाजार में उथल-पुथल बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। बाजार जानकारों की सलाह है कि इस माहौल में खुदरा निवेशकों को घबराहट में अच्छे शेयर नहीं बेचने चाहिए। इसके बजाय, यह समय चुनिंदा मजबूत लार्ज-कैप कंपनियों में एसआईपी (SIP) या किस्तों के जरिए दीर्घकालिक नजरिए से निवेश करने के लिए उपयुक्त हो सकता है。













