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सेंसेक्स 950 अंक धड़ाम, निफ्टी 360 लुढ़का: ₹6 लाख करोड़ डूबे

मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 28 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी भूचाल आया। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में आए तीव्र उछाल के कारण घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 950 से अधिक अंक टूटकर 72,939 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि दिन में इसने 72,832 का निचला स्तर छुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 360 अंकों की भारी गिरावट के साथ 22,817 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट से निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति स्वाहा हो गई。

बाजार क्रैश के मुख्य कारण: होर्मुज संकट और क्रूड में आग

ETV Bharat की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी उछलकर 93 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करने लगा。

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब सऊदी अरब ने रियाद की ओर बढ़ रहे हूती ड्रोनों और मिसाइल को हवा में मार गिराया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल में तेजी से भारत के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ना तय है। आयातित महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती की संभावना पर ब्रेक लगने की आशंका से शेयर बाजार में तेज भगदड़ मच गई。

मार्केट क्रैश का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और कमोडिटीज की स्थिति

सोमवार को बाजार बंद होने के समय प्रमुख सूचकांकों और कमोडिटीज में दर्ज आंकड़ों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक / सूचकांक बंद स्तर (28 सितंबर 2026) दैनिक बदलाव (अंक / %) मार्केट सेंटिमेंट एवं मुख्य प्रभाव
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 72,939.00 -956.00 अंक (-1.29%) दिन के निचले स्तर 72,832 तक का गोता
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,817.00 -360.80 अंक (-1.55%) 23,000 का अहम मनोवैज्ञानिक सपोर्ट टूटा
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) $106.40 / बैरल +2.15% की बढ़त सप्लाई चेन संकट से आयात बिल पर दबाव
डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) $93.20 / बैरल +1.85% की तेजी वैश्विक ऊर्जा महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत वृद्धि
भारतीय रुपया (USD / INR) ₹95.95 प्रति डॉलर -20 पैसे की कमजोरी डॉलर मजबूती और विदेशी फंड निकासी
इंडिया विक्स (India VIX) 13.89 अंक +14.23% का उछाल बाजार में अस्थिरता और निवेशकों में दहशत
विदेशी निवेशक (FII Outflow) -₹3,694 करोड़ भारी बिकवाली घरेलू इक्विटी से विदेशी निवेशकों का पलायन
बीएसई मार्केट कैप हानि ₹480 लाख करोड़ से नीचे -₹6.05 लाख करोड़ एक ही दिन में निवेशकों की पूंजी डूबी

सेक्टरवार प्रदर्शन: ऑटो, एनर्जी और बैंकिंग में भारी तबाही

HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को बाजार का तकनीकी ढांचा चरमरा गया। निफ्टी के अधिकांश शेयर लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा मार जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (-3.35%), टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (-3.00%) और अडानी एंटरप्राइजेज (-2.93%) पर पड़ी। लार्सन एंड टुब्रो 2.83 प्रतिशत गिरकर ₹3,766.40 पर बंद हुआ, जबकि बजाज ऑटो 2.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹10,970 पर आ गया。

ऊर्जा क्षेत्र में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन 2.67 प्रतिशत टूटा, जबकि अडानी पोर्ट्स में 2.63 प्रतिशत और ओएनजीसी में 2.48 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। एफएमसीजी में हिंदुस्तान यूनिलीवर 2.41 प्रतिशत और टाटा कंज्यूमर 2.36 प्रतिशत फिसल गए। वहीं बैंकिंग दिग्गजों में कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस लगभग 2-2 प्रतिशत के नुकसान के साथ बंद हुए。

केवल दो शेयर दिखा पाए मजबूती: डॉ. रेड्डीज और इंफोसिस का सहारा

बाजार में मची बिकवाली के बीच केवल चुनिंदा फार्मा और आईटी कंपनियों में रक्षात्मक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी 50 के शेयरों में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 1.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,221 पर बंद हुआ और दिन का टॉप गेनर रहा। इसके अलावा आईटी दिग्गज इंफोसिस भी 0.30 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ ₹1,003.20 के स्तर पर टिकने में सफल रहा。

डॉलर के मुकाबले रुपये के ₹95.95 तक लुढ़कने से सॉफ्टवेयर कंपनियों को डॉलर आय में कुछ सहारा मिलने की उम्मीद बंधी थी। हालांकि, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसी अन्य आईटी कंपनियां व्यापक बिकवाली के दबाव को नहीं झेल सकीं। बीएसई पर गिरने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों से चार गुना रही, जो बाजार की कमजोरी को दर्शाती है。

ब्रॉड मार्केट का हाल: मिडकैप और स्मॉलकैप में भी भारी गिरावट

आकाशवाणी न्यूज (News On AIR) की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े शेयरों के साथ व्यापक बाजार में भी तेज गिरावट रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.4 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डिफेंस सेक्टर की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली हावी रही。

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2 प्रतिशत के पार निकल गई, जो वर्ष 2004 के बाद का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड में इस उछाल ने इक्विटी वैल्यूएशन पर गहरा दबाव डाला है। इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली है, जिससे लिक्विडिटी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है。

बाजार विशेषज्ञों की राय और आगे की तकनीकी रणनीति

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संघर्ष और तेल संकट वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन गया है। अमेरिका द्वारा शांति प्रस्ताव खारिज किए जाने से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक खिंच सकता है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव शांत नहीं होता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा。

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि दैनिक चार्ट पर लंबी मंदी की कैंडल बनी है, जिसने महत्वपूर्ण क्लस्टर सपोर्ट को तोड़ दिया है। निफ्टी के लिए अब अगला मजबूत सपोर्ट 22,600 से 22,500 के दायरे में है। यदि बाजार में कोई तकनीकी उछाल आता भी है, तो 23,000 के स्तर पर कड़ा रेजिस्टेंस देखने को मिलेगा। जानकारों की सलाह है कि खुदरा निवेशकों को नए जोखिम लेने से बचना चाहिए。

निष्कर्ष: निवेशकों के लिए सतर्कता का समय

संक्षेप में कहें तो 28 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र घरेलू शेयर बाजार के लिए भारी नुकसान का दिन साबित हुआ है। सेंसेक्स का 950 अंक से अधिक गिरना और निफ्टी का 23,000 के स्तर से नीचे फिसलना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम, कच्चे तेल के भाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सख्त स्टॉप-लॉस और नकदी संरक्षण की रणनीति अपनानी चाहिए。

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