नई दिल्ली: देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के समूल विनाश के संकल्प के तहत केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत पहल शुरू की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘प्रहार – राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति’ (PRAHAAR – National CT Policy and Strategy) पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर गृह मंत्री ने विदेशों में छिपे वांछित आतंकवादियों और अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए एक अत्याधुनिक ‘प्रत्यर्पण पोर्टल’ (Extradition Portal) का भी शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति पर काम कर रही है。
‘प्रहार’ नीति के सात आधारस्तंभ और सुरक्षा का संपूर्ण दृष्टिकोण
आकाशवाणी समाचार (News On AIR) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की नई ‘प्रहार’ नीति सात आधारस्तंभों पर टिकी है। इनमें पहला स्तंभ रोकथाम (Prevention), दूसरा त्वरित प्रतिक्रिया (Response), तीसरा आंतरिक सुरक्षा क्षमताओं का एकत्रीकरण (Aggregating Internal Capacities), चौथा मानवाधिकारों की रक्षा (Human Rights), पांचवां आतंकवाद के अनुकूल परिस्थितियों का शमन (Attenuating Conditions for Terrorism), छठा अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समन्वय (Aligning International Efforts) और सातवां संकटोपरांत पुनर्प्राप्ति एवं लचीलापन (Recovery and Resilience) शामिल हैं。
गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से निपटने के लिए संपूर्ण समाज दृष्टिकोण (Whole-of-Society Approach) अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों, नागरिक प्रशासन और आम जनता के बीच निरंतर तालमेल होना चाहिए। गृह मंत्रालय ने आतंकी घटनाओं का गहन विश्लेषण कर अगले 10 वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक, पुख्ता और स्वचालित सुरक्षा तंत्र स्थापित करने का रोडमैप तैयार किया है。
प्रत्यर्पण पोर्टल: विदेशों में छिपे अपराधियों पर डिजिटल शिकंजा
सम्मेलन का एक अन्य प्रमुख आकर्षण नए ‘प्रत्यर्पण पोर्टल’ की शुरुआत रही। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों, गैंगस्टरों और आतंकी आकाओं की निगरानी, जांच दस्तावेजों के आदान-प्रदान और प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया को तीव्र और पारदर्शी बनाएगा। गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच भारत सरकार ने मजबूत कानूनी पैरवी के बल पर 36 विभिन्न देशों से 288 कुख्यात भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है。
अमित शाह ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बलों को निर्देश दिया कि वे केंद्रीय जांच एजेंसियों (NIA और CBI) के साथ निरंतर समन्वय में काम करने वाली समर्पित प्रत्यर्पण टीमें (Dedicated Extradition Teams) गठित करें। यह नया पोर्टल इंटरपोल, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राज्य पुलिस बलों के बीच एक एकल डिजिटल खिड़की के रूप में कार्य करेगा, जिससे फाइलों के लंबित रहने से बचा जा सकेगा。
डेटा तालिका: प्रहार नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान के प्रमुख आंकड़े
केंद्र सरकार द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण प्रयासों के तहत हासिल की गई उपलब्धियों का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| सुरक्षा क्षेत्र / पहल | प्रमुख आंकड़े एवं विवरण | संबद्ध एजेंसियां एवं दायरा | नीतिगत प्रभाव एवं उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| प्रहार नीति (PRAHAAR Policy) | 7 प्रमुख आधारस्तंभ (रोकथाम से पुनर्प्राप्ति तक) | MHA, NIA, IB, राज्य पुलिस बल | अगले 10 वर्षों के लिए स्वचालित सुरक्षा ढांचा |
| अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण (2019-2026) | 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधी वापस लाए गए | CBI, विदेश मंत्रालय, इंटरपोल | विदेश में बैठे साजिशकर्ताओं पर त्वरित कानूनी शिकंजा |
| शहजाद भट्टी नेटवर्क ध्वस्तीकरण | 40+ मॉड्यूल ध्वस्त, 350 गिरफ्तारियां | 15 राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां | हथियार, विस्फोटक और ड्रग्स तस्करी नेटवर्क समाप्त |
| दर्ज प्राथमिकियां (FIRs) | 100 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज | NIA और विभिन्न राज्य पुलिस बल | UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित किया गया |
| प्रत्यर्पण पोर्टल (Extradition Portal) | केंद्रीकृत डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली | राज्यों की विशेष टीमें और इंटरपोल विंग | प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं में तेजी और त्वरित न्याय सुनिश्चित |
| थाना स्तर पर सुरक्षा ढांचा | देश के प्रत्येक थाने तक प्रहार नीति का विस्तार | स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं बीट कांस्टेबल | जमीनी स्तर पर स्वचालित और तेज सूचना प्रवाह |
शहजाद भट्टी आतंकी सिंडिकेट पर 15 राज्यों में चौतरफा प्रहार
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमा पार से संचालित संगठित अपराध और आतंक के गठजोड़ के खिलाफ मिली बड़ी सफलता का विवरण साझा किया। सुरक्षा एजेंसियों के बेहतर आपसी तालमेल से पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं। देश के 15 राज्यों में फैले इस सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 100 से अधिक प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं。
गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह गिरोह ड्रोनों के जरिए पाकिस्तान सीमा से सीमावर्ती क्षेत्रों में हथियारों, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त था। इसके जरिए जुटाए गए काले धन का इस्तेमाल देश में हिंसा भड़काने के लिए किया जा रहा था। इस नेटवर्क के सफाए से सीमा पार प्रायोजित अपराध के तंत्र को बड़ा झटका लगा है。
थाना स्तर तक पहुंचेगी प्रहार नीति: 10 वर्षों का सुरक्षा खाका
अमित शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘प्रहार’ नीति के सिद्धांत केवल उच्चस्तरीय बैठकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें स्थानीय पुलिस थानों (Thana Level) तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर तैनात बीट कांस्टेबल से लेकर थाना प्रभारी तक हर पुलिसकर्मी को आतंकवाद और संगठित अपराध के नए तौर-तरीकों की जानकारी होनी चाहिए。
इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक महेश दीक्षित, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के महानिदेशक, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के प्रमुख उपस्थित थे। इसके अलावा देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। गृह मंत्री ने कहा कि साइबर आतंकवाद और टेरर फंडिंग के बढ़ते खतरों को देखते हुए हमारी सुरक्षा प्रणाली को पूर्व-सक्रिय (Proactive) होना पड़ेगा。
निष्कर्ष: राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षित भारत का संकल्प
निष्कर्षतः, नई दिल्ली में आयोजित प्रहार सम्मेलन ने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को नई संस्थागत दिशा दी है। एक ओर जहां प्रत्यर्पण पोर्टल और 288 भगोड़ों की सफल वापसी यह साबित करती है कि भारतीय कानून की पहुंच विदेशों तक अचूक है, वहीं दूसरी ओर प्रहार नीति के सात स्तंभ आंतरिक सुरक्षा तंत्र को आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाते हैं। शून्य सहनशीलता की नीति, आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और केंद्र-राज्य एजेंसियों का मजबूत समन्वय भारत को सुरक्षित और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में अहम कदम है。













