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सेंसेक्स 243 अंक फिसला, निफ्टी 22,716 पर बंद: क्रूड $107 पहुंचा

मुंबई: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार (29 सितंबर 2026) को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी (F&O Expiry) के दिन उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 22,750 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर बंद हुआ। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी 240 अंकों से अधिक के नुकसान में रहा। हालांकि, निचले स्तरों पर चुनिंदा फार्मा और मेटल शेयरों में आई लिवाली के चलते दोनों सूचकांक दिन के अपने सबसे निचले स्तरों से कुछ हद तक संभलने में कामयाब रहे。

सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग: दिन के निचले स्तर से हल्की रिकवरी

HDFC Sky की मार्केट क्लोज रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,529.07 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत टूटकर 22,716.20 के स्तर पर समाप्त हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में 0.9 प्रतिशत तक की तेज गिरावट देखी गई थी, जिससे दोनों सूचकांक अप्रैल 2026 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के करीब आ गए थे。

व्यापक बाजार में भी मंदी का असर साफ दिखा। एनएसई पर निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.8 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जिससे यह संकेत मिलता है कि बिकवाली केवल लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित नहीं थी। बाजार की चौड़ाई नकारात्मक रही, जहां बीएसई पर 1,871 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,321 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 164 शेयर बिना किसी बदलाव के अपरिवर्तित रहे。

बाजार के प्रमुख आंकड़े: 29 सितंबर 2026 की क्लोजिंग समरी

मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख सूचकांकों, कमोडिटी, विदेशी मुद्रा और टॉप शेयरों के प्रदर्शन का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक / सूचकांक क्लोजिंग स्तर (29 सितंबर 2026) पिछला बंद स्तर शुद्ध बदलाव (अंक / %) बाजार पर प्रमुख प्रभाव
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 72,529.07 72,771.72 -242.65 अंक (-0.33%) लगातार दूसरे सत्र में गिरावट, निचले स्तर से संभला
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,716.20 22,780.25 -64.05 अंक (-0.28%) 22,750 के नीचे बंद, एफएंडओ एक्सपायरी का दबाव
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) $107.00 प्रति बैरल $105.42 प्रति बैरल +1.50% की बढ़त सप्लाई बाधा की आशंका, आयात बिल पर चिंता
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.95% 4.88% +7 आधार अंक (2007 के उच्चतम स्तर पर) उभरते बाजारों से विदेशी फंड्स की निकासी
भारतीय रुपया (USD / INR) ₹95.98 प्रति डॉलर ₹95.98 प्रति डॉलर सपाट / स्थिर रुख कच्चे तेल की मार और मजबूत डॉलर का असर
निफ्टी टॉप गेनर (Adani Enterprises) ₹2,972.90 ₹2,831.10 +₹141.80 (+5.01%) मजबूत वॉल्यूम के साथ निफ्टी का शीर्ष गेनर
निफ्टी टॉप लूजर (Titan Company) ₹4,675.00 ₹4,819.50 -₹144.50 (-3.00%) सोने के दाम घटने और मांग घटने से नुकसान

कच्चे तेल में $107 का उछाल और बॉन्ड यील्ड से बढ़ा दबाव

The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका-ईरान तनाव और जहाजों की आवाजाही को लेकर बढ़ती चिंताओं ने तेल की कीमतों को ऊंचा रखा है। हालांकि सितंबर में खाड़ी देशों से कुल तेल निर्यात 12.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, लेकिन वैकल्पिक और जोखिम भरे समुद्री मार्गों के उपयोग से लॉजिस्टिक्स और वैश्विक परिवहन लागत काफी बढ़ गई है。

भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। महंगे कच्चे तेल से देश का व्यापार घाटा बढ़ता है, चालू खाता घाटा चौड़ा होता है और घरेलू मुद्रास्फीति का जोखिम गहराता है। इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर जुलाई 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी प्रतिभूतियों में लगा रहे हैं。

सेक्टरवार स्थिति: आईटी और ऑटो में बिकवाली, मेटल हरे निशान में

मंगलवार के कारोबारी सत्र में केवल मीडिया, मेटल और फार्मास्युटिकल सेक्टर ही हरे निशान में बंद होने में सफल रहे। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। विमान ईंधन और कच्चा माल महंगा होने की आशंका ने ऑटो और विनिर्माण कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है。

निफ्टी 50 के शेयरों में टाइटन कंपनी 3 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़ा लूजर रहा। इसके अलावा आईटी क्षेत्र की दिग्गज विप्रो में 2.95 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 2.44 प्रतिशत, अपोलो हॉस्पिटल्स में 2.27 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 2.06 प्रतिशत की बिकवाली दर्ज की गई। बजाज ऑटो, अल्ट्राटेक सीमेंट, टीसीएस और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी 1.7 से 1.9 प्रतिशत तक फिसलकर बंद हुए。

अडानी समूह और फार्मा शेयरों में लौटी खरीदारी

चौतरफा बिकवाली के माहौल के बीच अडानी समूह की कंपनियों में आज जोरदार तेजी दर्ज की गई। अडानी एंटरप्राइजेज 5.01 प्रतिशत उछलकर ₹2,972.90 पर बंद हुआ और निफ्टी का टॉप गेनर रहा। वहीं अडानी पोर्ट्स में 4.49 प्रतिशत का उछाल आया और यह ₹1,822 के स्तर पर पहुंच गया। समूह के बुनियादी ढांचा और पोर्ट कारोबार को लेकर सकारात्मक रिपोर्टों से खरीदारी को बल मिला。

फार्मा सेक्टर में रक्षात्मक खरीदारी के चलते डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 2.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,251.90 और सन फार्मा 1.47 प्रतिशत चढ़कर ₹1,865 पर बंद हुआ। देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस ने शुरुआती नुकसान से उबरते हुए 1.22 प्रतिशत की बढ़त बनाई। वहीं एनटीपीसी और टाटा स्टील भी क्रमशः 0.75 प्रतिशत और 0.91 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए。

विदेशी मुद्रा बाजार और बाजार का आगे का आउटलुक

घरेलू मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में कारोबार करते हुए लगभग सपाट ₹95.98 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की तेजी और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने रुपये की रिकवरी को सीमित रखा। मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रूड $105 के ऊपर बना रहा, तो चालू खाते पर दबाव बना रहेगा。

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 22,700 का स्तर निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर 22,500 तक गिरावट की आशंका है, जबकि 22,900 और 23,100 पर कड़ा प्रतिरोध है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, खुदरा निवेशकों को लीवरेज वाले सौदों से बचना चाहिए और मजबूत लार्ज-कैप शेयरों में किस्तों में निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए。

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