मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली जारी रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के चलते दलाल स्ट्रीट पर दिनभर दबाव बना रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर आ गया। दोपहर में सेंसेक्स 1,159 अंक और निफ्टी 342 अंक लुढ़क चुके थे, लेकिन आखिरी घंटों में आईटी और निजी बैंकों की खरीदारी ने सूचकांकों को निचले स्तरों से कुछ राहत दिलाई。
25 वर्षों का सबसे लंबा मंदी का दौर: लगातार 8वें हफ्ते फिसले बाजार
HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में पिछले 25 वर्षों का यह सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला बन चुका है। चालू सप्ताह में निफ्टी में 3.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में 2.7 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले आठ हफ्तों में निफ्टी 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स 8.4 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। शुक्रवार को अवकाश के चलते इस संक्षिप्त कारोबारी सप्ताह का समापन मंदी में हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर गिरने वाले शेयरों की संख्या 2,916 रही, जबकि मात्र 1,306 शेयर ही बढ़त दर्ज कर सके。
ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली हावी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई। खुदरा निवेशकों के कई पसंदीदा मध्यम एवं लघु शेयरों में 4 से 6 प्रतिशत तक का करेक्शन देखने को मिला, जिससे बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई。
बाजार बंदी का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और क्लोजिंग स्तर
गुरुवार को शेयर बाजार की समाप्ति के समय प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों, सेक्टोरल इंडेक्स और कमोडिटी की स्थिति नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | समाप्ति स्तर (01 अक्टूबर 2026) | दिन का निचला स्तर (Low) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार पर प्रमुख असर |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 71,909.70 | 71,320.74 | -570.59 अंक (-0.79%) | लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 22,421.95 | 22,282.75 | -198.50 अंक (-0.88%) | 22,500 का अहम सपोर्ट स्तर टूटा |
| निफ्टी आईटी (Nifty IT) | 34,820.40 | 33,980.10 | +2.20% की बढ़त | अमेरिकी मुद्रास्फीति राहत से जोरदार उछाल |
| निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) | 23,410.60 | 23,280.00 | -2.85% की गिरावट | बजाज ऑटो और मारुति में तेज बिकवाली |
| निफ्टी मेटल (Nifty Metal) | 8,450.25 | 8,390.15 | -2.60% की गिरावट | टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू में मुनाफावसूली |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $100.15 / बैरल | $97.93 / बैरल | पुनः $100 के पार | आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव |
| अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड | 5.34% | 5.28% | 2002 के बाद उच्चतम स्तर | उभरते बाजारों से विदेशी फंड्स की निकासी |
| विदेशी निवेशक बिकवाली (FPIs) | ₹10,148 करोड़ (बुधवार) | – | 5 सत्रों में $3.6 बिलियन आउटफ्लो | इक्विटी बाजार पर भारी दबाव |
सेक्टरवार रिपोर्ट: ऑटो और मेटल में कोहराम, बजाज ऑटो 7.6% फिसला
The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, आज के सत्र में सबसे ज्यादा नुकसान ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर को हुआ। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 2.85 प्रतिशत की गिरावट आई। बजाज ऑटो का शेयर 7.62 प्रतिशत यानी ₹829 टूटकर ₹10,045 पर बंद हुआ, जो निफ्टी का सबसे बड़ा लूजर रहा। कमजोर मासिक बिक्री से मारुति सुजुकी 4.86 प्रतिशत टूटकर ₹11,386 पर बंद हुई, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा में 3.05 प्रतिशत और आयशर मोटर्स में 3.22 प्रतिशत की गिरावट आई。
मेटल शेयरों में भी नरमी रही। टाटा स्टील का शेयर 3.42 प्रतिशत गिरकर ₹178 पर बंद हुआ। इसके अलावा श्रीराम फाइनेंस में 3.84 प्रतिशत, अदाणी पोर्ट्स में 3.36 प्रतिशत, ग्रेसिम में 3.26 प्रतिशत और अदाणी एंटरप्राइजेज में 2.98 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया। एफएमसीजी दिग्गज आईटीसी भी 2.61 प्रतिशत टूटकर ₹255.90 पर बंद हुआ। एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी 1 प्रतिशत से अधिक टूटे。
आईटी शेयरों में जोरदार उछाल: इंफोसिस 4% से ज्यादा चढ़ा
बाजार में बिकवाली के बीच आईटी सेक्टर मजबूती के साथ खड़ा रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.2 प्रतिशत की बढ़त पर बंद हुआ। इंफोसिस 4.11 प्रतिशत उछलकर ₹1,035 पर पहुंच गई। वहीं टीसीएस (TCS) में 1.19 प्रतिशत की मजबूती आई और शेयर ₹2,075 पर बंद हुआ। एचसीएल टेक में 1.07 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 0.59 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई。
आईटी शेयरों में आई तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी आर्थिक आंकड़े रहे। अमेरिका में अगस्त का पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ा 3.4 प्रतिशत रहा, जो अनुमान से कम था। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने की उम्मीद बनी। साथ ही रुपये की कमजोरी से आईटी कंपनियों के मार्जिन को सहारा मिला। निजी बैंकिंग में एचडीएफसी बैंक 1.76 प्रतिशत चढ़कर ₹721.20 पर बंद हुआ, जबकि एचडीएफसी लाइफ में 2.49 प्रतिशत और एसबीआई लाइफ में 1.49 प्रतिशत की बढ़त रही。
क्रूड $100 के पार और बॉन्ड यील्ड से विदेशी फंड्स की निकासी
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मुख्य कारण रहे। दोपहर बाद आपूर्ति चिंताओं से ब्रेंट क्रूड पुनः $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ता है। दूसरी ओर, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.34 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। इससे विदेशी फंड्स उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिकी डॉलर में लगा रहे हैं। बुधवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने ₹10,148 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि पिछले पांच सत्रों में कुल $3.6 बिलियन की निकासी हुई है。
विशेषज्ञों की राय और खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बना रही हैं। जब तक एफआईआई की बिकवाली पर ब्रेक नहीं लगता, तब तक अस्थिरता बनी रहेगी। तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 22,250 से 22,200 का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि 22,600 का स्तर मजबूत प्रतिरोध रहेगा। विश्लेषकों ने खुदरा निवेशकों को सलाह दी है कि वे लीवरेज और एफएंडओ ट्रेडिंग से बचें तथा क्वालिटी आईटी और बैंकिंग शेयरों में किस्तों में खरीदारी करें。
निष्कर्ष और आगामी कारोबारी रुख
1 अक्टूबर 2026 का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रहा। सेंसेक्स का 72,000 और निफ्टी का 22,500 के नीचे फिसलना कमजोरी का संकेत है। हालांकि आईटी और निजी बैंकों ने अंतिम पहर में बाजार को 1,159 अंक की गिरावट से उबारकर 571 अंक के नुकसान पर सीमित किया। आगामी सोमवार को बाजार खुलने पर निवेशकों की नजरें भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के रुख पर टिकी रहेंगी। तब तक पूंजी संरक्षण ही निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति होगी。













