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RBI रेपो रेट झटका: सेंसेक्स 288 अंक टूटा, निफ्टी 22,515 पर फिसला

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों (bps) की अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। केंद्रीय बैंक के सख्त मौद्रिक रुख, कमजोर वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के दोहरे झटके से घरेलू बेंचमार्क सूचकांक गहरे लाल निशान में फिसल गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 287.96 अंक यानी 0.40 प्रतिशत लुढ़ककर 72,350.74 के स्तर पर आ गया, जो बाद में बिकवाली के भारी दबाव में 600 अंक तक टूटा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक एनएसई निफ्टी 87.90 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,515.15 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार में मची इस चौतरफा बिकवाली से निवेशकों की धारणा को गहरा झटका लगा है。

RBI का सख्त रुख: फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ा रेपो रेट

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2023 के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपना आधिकारिक रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (Calibrated Tightening) कर दिया है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि खुदरा महंगाई दर का परिदृश्य अब अनुकूल नहीं रहा है। अगस्त में सीपीआई मुद्रास्फीति 4.82 प्रतिशत रही, जो लगातार तीन महीनों से तय 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है。

केंद्रीय बैंक के इस कड़े कदम से स्पष्ट हो गया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में किसी भी कटौती की संभावना समाप्त हो चुकी है। कर्ज महंगा होने से रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दर संवेदी क्षेत्रों में मांग पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वाणिज्यिक बैंकों द्वारा होम लोन और कार लोन की ब्याज दरें बढ़ाने से मध्यम वर्ग पर मासिक ईएमआई (EMI) का वित्तीय बोझ भी काफी बढ़ जाएगा。

मार्केट का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक, कमोडिटी और शेयर स्तर

गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख वित्तीय संकेतकों और शेयर सूचकांकों में दर्ज व्यापक उतार-चढ़ाव का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

वित्तीय संकेतक / सूचकांक वर्तमान स्तर (8 अक्टूबर 2026) पिछला बंद स्तर शुद्ध बदलाव (अंक / %) बाजार पर मुख्य प्रभाव
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 72,350.74 72,638.70 -287.96 अंक (-0.40%) इंट्राडे में 600 अंक तक का तेज गोता
एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) 22,515.15 22,603.05 -87.90 अंक (-0.39%) 22,600 का अहम सपोर्ट स्तर टूटा
आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) 5.50% 5.25% +25 bps (+0.25%) फरवरी 2023 के बाद पहली बार दर वृद्धि
इंडिया विक्स (India VIX) 14.36 अंक 13.88 अंक +3.46% की उछाल बाजार में अस्थिरता और घबराहट में वृद्धि
कच्चा तेल (Brent Crude) $88.40 / बैरल $86.90 / बैरल +1.72% की तेजी आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव
निफ्टी टॉप गेनर (TCS) ₹2,127.60 ₹2,080.30 +₹47.30 (+2.27%) आईटी सेक्टर में मजबूती और सहारा
निफ्टी टॉप लूजर (Adani Ent.) ₹2,648.30 ₹2,743.00 -₹94.70 (-3.45%) इंफ्रा और मेटल शेयरों में भारी गिरावट

सेक्टरवार विश्लेषण: किन शेयरों पर पड़ी रेपो रेट की सबसे ज्यादा मार?

HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार के सत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल, एफएमसीजी और वित्तीय कंपनियों पर भारी बिकवाली दिखी। अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 3.45 प्रतिशत टूट गया, जबकि अडानी पोर्ट्स 2.31 प्रतिशत गिरकर ₹1,709.60 पर आ गया। आईटीसी के शेयरों में 2.77 प्रतिशत की गिरावट आई। इंश्योरेंस और एनबीएफसी शेयरों में एसबीआई लाइफ 2.53 प्रतिशत और बजाज फिनसर्व 1.67 प्रतिशत लुढ़क गए。

कच्चे तेल में तेजी के कारण विमानन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयर 1.54 प्रतिशत गिरकर ₹4,913.30 पर आ गए। इसके अलावा पावर ग्रिड 1.90 प्रतिशत, मैक्स हेल्थकेयर 1.80 प्रतिशत और जेएसडब्ल्यू स्टील 1.28 प्रतिशत कमजोर हुए। उच्च ब्याज दरों से कंपनियों की वित्तीय लागत बढ़ने की आशंका ने संस्थागत निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार में दबाव गहरा गया。

आईटी कंपनियों ने संभाला मोर्चा: टीसीएस और इंफोसिस में खरीदारी

मंदी के इस माहौल में आईटी क्षेत्र ने बाजार को सहारा देने का काम किया। कमजोर रुपये और स्थिर पश्चिमी मांग के चलते निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में आक्रामक खरीदारी की। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 2.27 प्रतिशत उछलकर ₹2,127.60 पर पहुंच गया और निफ्टी का टॉप गेनर रहा। इसके साथ ही एचसीएल टेक में 2.05 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 1.82 प्रतिशत और इंफोसिस में 1.64 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। खुदरा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ट्रेंट लिमिटेड में 1.20 प्रतिशत और टाइटन कंपनी में 0.69 प्रतिशत की मजबूती देखी गई。

एसएमई आईपीओ में बंपर लिस्टिंग: सोल्फिज स्मार्ट 91% प्रीमियम पर खुला

प्राइमरी मार्केट में निवेशकों का उत्साह पूरी तरह बना रहा। सोल्फिज स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स (Sollfege Smart Electronics) के शेयर बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर धमाकेदार शुरुआत करते हुए ₹55 के इश्यू प्राइस के मुकाबले 90.91 प्रतिशत प्रीमियम पर ₹105 पर लिस्ट हुए। बाद में मामूली मुनाफावसूली के बावजूद यह ₹104.40 पर बना रहा। ₹21.78 करोड़ के इस आईपीओ को कुल 2.14 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था, जो खुदरा निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है。

वैश्विक परिस्थितियां और कमोडिटी बाजार का दबाव

घरेलू कारकों के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी चौतरफा दबाव बना रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.72 प्रतिशत चढ़कर $88.40 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे भारत के तेल आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ने का गंभीर जोखिम है। अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली बढ़ी है। एशियाई बाजारों में भी निक्केई और हैंग सेंग में सुस्ती दर्ज की गई。

विशेषज्ञों की राय और खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दर वृद्धि के बाद बाजार में उतार-वढ़ाव जारी रहेगा। विश्लेषकों की स्पष्ट सलाह है कि खुदरा निवेशक घबराकर बिकवाली न करें, बल्कि मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज और स्थिर नकदी प्रवाह वाली गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में एसआईपी (SIP) के जरिए व्यवस्थित निवेश जारी रखें। उच्च मूल्यांकन और अत्यधिक लीवरेज वाले सौदों से बचना ही वर्तमान में उचित रणनीति होगी。

निष्कर्ष और आगामी कारोबारी आउटलुक

8 अक्टूबर 2026 का सत्र भारतीय बाजार के लिए नई मौद्रिक स्थिति का संकेत है। केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया है कि महंगाई पर नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकता है। आगामी कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 22,400 का स्तर अहम तकनीकी सपोर्ट होगा, जबकि 22,700 का स्तर पार करना चुनौतीपूर्ण रहेगा। निवेशकों को रक्षात्मक और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए。

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