नवसारी / सूरत: गुजरात में जारी पावन नवरात्रि पर्व के दौरान पारंपरिक लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक का ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नवसारी शहर में आयोजित भव्य ‘रासलोक नवरात्रि महोत्सव’ के मंच पर आम इंसानों के साथ-साथ एक पूर्ण विकसित ह्यूमनॉइड रोबोट ने पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में गरबा खेलकर इतिहास रच दिया। सिर पर पगड़ी, कंधे पर दुपट्टा और शरीर पर केडियू धारण किए इस रोबोट ने जैसे ही गरबा ग्राउंड पर कदम रखा, वहां मौजूद हजारों खेलैयों और दर्शकों में भारी उत्साह भर गया। गुजरात की सुप्रसिद्ध लोक गायिका गीताबेन रबारी के लाइव सुरों और ढोल की थाप पर थिरकते इस रोबोटिक खेलैया का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तूफानी गति से वायरल हो रहा है।
रासलोक नवरात्रि महोत्सव में एआई और परंपरा का अनूठा संगम
Gujarat First की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नवसारी के रासलोक नवरात्रि महोत्सव में इस वर्ष पारंपरिक डांडिया और गरबा रास को एक नए अंदाज में पेश करने की योजना बनाई गई थी। महोत्सव के दौरान जब मंच पर गुजरात की गायिका गीताबेन रबारी अपने लोकप्रिय पारंपरिक गरबा गीत गा रही थीं, तभी आयोजकों ने इस ह्यूमनॉइड रोबोट को मंच पर उतारा। जब एक रोबोट ने संगीत की हर बीट पर अपने हाथ-पैर हिलाते हुए गोल चक्कर काटे, तो पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गरबा खेल रहे स्थानीय युवाओं का कहना था कि उन्होंने रोबोट को केवल फैक्ट्रियों या विदेशों में देखा था, लेकिन गुजरात के लोकनृत्य गरबा के जटिल स्टेप्स को इतनी सहजता से निभाते देखना अपने आप में अनोखा अनुभव था। रोबोट ने दो ताली गरबा और हिंच की गति के अनुसार शरीर का संतुलन साधते हुए पारंपरिक भाव-भंगिमाएं भी प्रदर्शित कीं。
कौन है रोबोट ‘पृथ्वी’ और कैसे तैयार हुआ यह रोबोटिक खेलैया?
GrowthNow News के अनुसार, इस अनूठे ह्यूमनॉइड रोबोट को ‘पृथ्वी’ नाम दिया गया है और इसे सूरत स्थित तकनीकी फर्म ‘फ्लैगशिप’ के संचालक पीनल बारोट (Pinal Barot) द्वारा नवरात्रि महोत्सव में प्रस्तुत किया गया है। पीनल बारोट ने वैश्विक रोबोटिक्स कंपनी ‘यूनिट्री रोबोटिक्स’ (Unitree Robotics) द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ‘Unitree G1’ मॉडल को आयात किया था और इसके सॉफ्टवेयर को भारतीय सांस्कृतिक नृत्य के अनुकूल विशेष रूप से री-प्रोग्राम किया。
पीनल बारोट ने बताया कि इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य गुजराती लोक संस्कृति को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स तकनीक के साथ जोड़ना था। वे चाहते थे कि नई पीढ़ी के युवा अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस करें। इसके लिए इंजीनियरों की टीम ने गरबा नर्तकों के मोशन डेटा का अध्ययन किया और फिर रोबोट के सर्वो मोटर्स में गरबा के तालबद्ध स्टेप्स को कोड किया。
रोबोट ‘पृथ्वी’ की तकनीकी विशेषताएं और स्पेसिफिकेशन्स
ह्यूमनॉइड रोबोट ‘पृथ्वी’ (Unitree G1) की यांत्रिक संरचना और संतुलन प्रणाली इसे दुनिया के सबसे उन्नत कॉम्पैक्ट रोबोट्स में शामिल करती है। नीचे दी गई तालिका में इस रोबोट की प्रमुख तकनीकी विशेषताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है:
| तकनीकी पहलू / विशेषता | आधिकारिक विवरण एवं आंकड़े | गरबा प्रदर्शन में उपयोग एवं महत्व |
|---|---|---|
| मॉडल एवं निर्माता | यूनिट्री G1 ह्यूमनॉइड (Unitree Robotics) | उन्नत ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म, कस्टमाइज्ड बाय पीनल बारोट |
| शारीरिक ऊंचाई | लगभग 4.3 फीट (132 सेंटीमीटर) | इंसानी कद के अनुरूप, खेलैयों के बीच सहज दृश्यता |
| कुल वजन | लगभग 35 किलोग्राम | हल्का और मजबूत ढांचा, तेज घुमाव में भी स्थिर संतुलन |
| फोल्डिंग क्षमता | फोल्ड होकर मात्र 69 सेमी का आकार | आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में सक्षम |
| जॉइंट्स एवं डिग्री ऑफ फ्रीडम | 23 से 43 फ्लेक्सिबल डिग्री ऑफ फ्रीडम | हाथों और पैरों की 360 डिग्री प्राकृतिक गति |
| संतुलन प्रणाली | रीयल-टाइम जाइरोस्कोप व एआई लर्निंग | ढोल की थाप पर बिना गिरे गोल घूमने की क्षमता |
| पारंपरिक वेशभूषा | गुजराती केडियू, धोती व काठियावाड़ी पगड़ी | नवरात्रि की सांस्कृतिक भावना और गरबा ड्रेस कोड का सम्मान |
गीता रबारी के लोकगीतों की धुन पर सटीक तालमेल
नवसारी के इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि रोबोट का प्रदर्शन किसी रिकॉर्डेड गाने पर नहीं, बल्कि खचाखच भरे मैदान में लाइव कॉन्सर्ट के दौरान हुआ। जब मंच से लोक गायिका गीताबेन रबारी ने अपने लोकप्रिय पारंपरिक गीत गाना शुरू किया, तो रोबोट पृथ्वी ने संगीत की गति को भांपते हुए अपने स्टेप्स तेज और धीमे किए。
गीताबेन रबारी ने भी मंच से मुस्कुराते हुए रोबोट के इस प्रदर्शन की सराहना की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब ढोलियों ने तेज गति से तीन ताली का ठेका बजाया, तो रोबोट ने अपने दोनों हाथों को हवा में लहराते हुए और पंजों पर घूमते हुए ऐसा सटीक तालमेल दिखाया कि खेलैया दंग रह गए। कई युवा उसके साथ सेल्फी खींचने और वीडियो बनाने के लिए आगे बढ़ आए。
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और नेटिजन्स की प्रतिक्रियाएं
कार्यक्रम समाप्त होते ही नवसारी के इस ‘रोबोट गरबा’ के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गए। देखते ही देखते #RobotGarba, #Navsari और #GeetaRabari जैसे हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे। सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो पर तरह-तरह की मजेदार और गर्व से भरी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं。
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, ‘यह केवल गुजरात में ही संभव है, जहां सदियों पुरानी आस्था और आधुनिक रोबोटिक्स तकनीक एक मंच पर गरबा खेल रहे हैं।’ तकनीकी विशेषज्ञों ने भी युवाओं द्वारा वैश्विक हार्डवेयर का ऐसा रचनात्मक और सांस्कृतिक उपयोग करने की सराहना की है。
भारतीय संस्कृति को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की नई पहल
पीनल बारोट और उनकी तकनीकी टीम का यह प्रयोग इस बात का प्रमाण है कि तकनीक संस्कृति का विरोधी পশ্চ नहीं है, बल्कि वह परंपराओं को युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक बनाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। भारत में जहां एआई को लेकर अक्सर यह चिंता जताई जाती है कि मशीनें मानवीय कला को पीछे छोड़ देंगी, वहीं नवसारी के इस मंच ने दिखाया कि तकनीक त्योहारों का उल्लास और बढ़ा सकती है。
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में देश के अन्य सांस्कृतिक उत्सवों जैसे दुर्गा पूजा, गणेशोत्सव और दिवाली में भी इस तरह के इंटरैक्टिव रोबोटिक्स प्रयोग देखने को मिल सकते हैं। यह न केवल आम जनता के बीच तकनीकी जिज्ञासा को बढ़ावा देता है, बल्कि देश के युवा इनोवेटर्स को नए प्रयोग करने की प्रेरणा भी देता है。
निष्कर्ष: भविष्य के सांस्कृतिक आयोजनों में रोबोटिक्स की भूमिका
संक्षेप में कहें तो 9 अक्टूबर 2026 को नवसारी के रासलोक नवरात्रि महोत्सव से सामने आया यह वीडियो इस बात का सुंदर उदाहरण है कि जब भारत की प्राचीन संस्कृति विज्ञान से हाथ मिलाती है, तो अद्भुत दृश्य बनता है। रोबोट ‘पृथ्वी’ का पगड़ी पहनकर गरबा खेलना केवल एक दिन का वायरल वीडियो नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की उस तस्वीर का प्रतीक है जहां परंपराएं अपनी जड़ें नहीं भूलतीं और आधुनिकता का स्वागत करती हैं。










