मुंबई: पश्चिम एशिया में गहराते नए भू-राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल के चलते गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। बुधवार की तेज बढ़त के बाद आज बाजार की शुरुआत कमजोर रही और दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक शुरुआती कारोबार में ही लाल निशान में फिसल गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 632.68 अंक यानी 0.85 प्रतिशत टूटकर 74,189.55 के स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी 216.15 अंक गिरकर 23,222.55 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में मची इस चौतरफा बिकवाली से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए और विदेशी बाजारों की कमजोरी ने घरेलू धारणा को मंदी के हवाले कर दिया।
कच्चे तेल में $102 की वापसी और गहराता भू-राजनीतिक संकट
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव तथा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के तीखे बयानों के बाद ऊर्जा बाजार में भारी घबराहट फैल गई है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड एक बार फिर $100 प्रति बैरल का स्तर पार करते हुए 102.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 91 से 92 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। आपूर्ति मार्गों में संभावित रुकावट की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों में अनिश्चितता का नया दौर शुरू कर दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र की रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) की रिपोर्ट ने अर्थव्यवस्था की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को प्रतिदिन लगभग ₹530 करोड़ का भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। पेट्रोल पर ₹8, डीजल पर ₹9 और एलपीजी पर लगभग ₹300 प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है। चूंकि भारत 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल का $100 के पार बने रहना देश के व्यापार घाटे, चालू खाता घाटा (CAD) और मुद्रास्फीति के लिए गंभीर चुनौती है।
मार्केट क्रैश का मुख्य डेटा: प्रमुख सूचकांक और वित्तीय संकेतक
गुरुवार को शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान दलाल स्ट्रीट पर प्रमुख सूचकांकों, करेंसी मार्केट और बॉन्ड यील्ड में दर्ज आधिकारिक आंकड़ों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | वर्तमान स्तर (24 सितंबर 2026) | पिछला बंद (23 सितंबर 2026) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार पर प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 74,189.55 | 74,828.25 | -632.68 अंक (-0.85%) | शुरुआती सत्र में तेज गोता |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 23,222.55 | 23,446.80 | -216.15 अंक (-0.92%) | 23,300 का अहम सपोर्ट स्तर टूटा |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $102.20 / बैरल | $99.80 / बैरल | +$2.40 (मजबूत उछाल) | आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव |
| डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) | $91.80 / बैरल | $89.50 / बैरल | +$2.30 (तेज रिकवरी) | वैश्विक ऊर्जा संकट और लॉजिस्टिक्स लागत |
| अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड | 5.11% | 4.98% | +13 बेसis प्वाइंट्स | वैश्विक इक्विटी बाजार से पूंजी निकासी |
| भारतीय रुपया (USD / INR) | ₹95.84 प्रति डॉलर | ₹95.73 प्रति डॉलर | -11 पैसे की कमजोरी | डॉलर की मजबूती और विदेशी दबाव |
| विदेशी निवेशक (FIIs – 23 सितंबर) | +₹1,617.45 करोड़ | शुद्ध खरीदार | बुधवार को पूंजी निवेश | गुरुवार सुबह मुनाफे की तेज बिकवाली |
सेक्टरवार स्थिति: बैंकिंग और एनबीएफसी शेयरों में भारी बिकवाली
HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, आज के कारोबारी सत्र में सबसे अधिक बिकवाली दबाव बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में देखने को मिला। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 5.11 प्रतिशत तक उछलने से ब्याज दरों में लंबी अवधि तक कटौती न होने की आशंका गहरा गई है। इसके चलते बजाज फाइनेंस 4.75 प्रतिशत टूटकर ₹994.90 पर आ गया, जबकि बजाज फिनसर्व में 3.49 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई。
प्राइवेट बैंकों में एक्सिस बैंक 3.46 प्रतिशत गिरकर ₹1,200 पर आ गया। एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस में भी बिकवाली देखी गई। एविएशन सेक्टर में विमान ईंधन की लागत बढ़ने के डर से इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयर 1.5 प्रतिशत फिसल गए। ऑटोमोबाइल, सीमेंट और मेटल कंपनियों में भी विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार की चौड़ाई नकारात्मक हो गई।
दलाल स्ट्रीट पर एनएसई की ऐतिहासिक लिस्टिंग
बाजार में मची इस अफरा-तफरी के बीच 24 सितंबर 2026 का दिन भारतीय वित्तीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों की आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ऐतिहासिक लिस्टिंग हुई। एनएसई के ₹22,569 करोड़ के मेगा आईपीओ को निवेशकों का जबर्दस्त समर्थन मिला था और यह कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस इश्यू ने बाजार से लगभग ₹90,300 करोड़ की बोलियां आकर्षित की थीं। बाजार की कमजोरी के बावजूद इस दिग्गज एक्सचेंज की लिस्टिंग ने लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।
आईटी और फार्मा सेक्टर ने संभाला कुछ मोर्चा
सूचकांकों में आई भारी गिरावट के बीच आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर के चुनिंदा शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। डॉलर के मुकाबले रुपये के ₹95.84 तक कमजोर होने से निर्यात आधारित तकनीकी कंपनियों की आय सुधरने की उम्मीद बंधी है। टेक महिंद्रा 0.68 प्रतिशत चढ़कर ₹1,567.60 पर रहा, जबकि सन फार्मा, एचसीएल टेक, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई लाइफ में निचले स्तरों पर रक्षात्मक खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, यह सहारा व्यापक बाजार की कमजोरी को थामने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
वैश्विक बाजारों से नकारात्मक संकेत और विशेषज्ञों की राय
घरेलू बाजार पर दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कमजोरी का परिणाम है। अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट में बुधवार रात तेज बिकवाली देखी गई थी। गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख दिखा, जहां चीन और हांगकांग के बाजार लाल निशान में रहे। जियोजीत के रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का $102 के पार जाना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5.11 प्रतिशत होना दो बड़े प्रतिकूल कारक हैं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि अनिश्चितता के दौर में मुनाफावसूली स्वाभाविक है और खुदरा निवेशकों को घबराहट में शेयर बेचने से बचना चाहिए।
निष्कर्ष और आगामी कारोबारी आउटलुक
24 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए सतर्कता का संदेश लेकर आया है। बुधवार की बढ़त के बाद आज की 632 अंकों की गिरावट ने उस रिकवरी को मिटा दिया है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है तो 23,000 की ओर फिसलन बढ़ सकती है। आगामी सत्रों में बाजार की दिशा कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के रुख और रुपये की स्थिति पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सख्त स्टॉप-लॉस के साथ अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है।













