मुंबई: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) द्वारा भारत के आर्थिक विकास अनुमान को बढ़ाने के दम पर शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबारी सत्र में घरेलू बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 दोनों ही मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0.22 प्रतिशत की उछाल के साथ 74,474.19 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 50 सूचकांक 0.20 प्रतिशत चढ़कर 23,315.80 के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों की तेजी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों के मनोबल को मजबूती दी है。
मूडीज ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान: 6% से बढ़ाकर 7% किया
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6 प्रतिशत से सीधे बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और मजबूत आंतरिक मांग की सराहना की। मूडीज ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की मजबूत रफ्तार दर्ज की थी, जिसमें बुनियादी ढांचे और विनिर्माण में आए निवेश ने अन्य क्षेत्रों की सुस्ती को संतुलित कर दिया。
मूडीज ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘Baa3’ पर बरकरार रखा है। एजेंसी का कहना है कि भारत जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि, मूडीज ने सतर्क किया कि वैश्विक ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई और उपभोग के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद भारत के मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स और निरंतर पूंजीगत व्यय ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत आधार दिया है。
कच्चे तेल में गिरावट से राहत: ब्रेंट क्रूड $104 प्रति बैरल पर फिसला
Sunday Guardian Live की रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजारों को सबसे बड़ा सहारा कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से मिला है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को करीब 0.9 प्रतिशत गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जो पिछले दिनों $108.70 के पार पहुंच गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व संकट पर कूटनीतिक हल तलाशने के बयानों से आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद बंधी है。
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के भाव में नरमी देश के आयात बिल, व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव को घटाने में सीधी मदद करती है। इस नरमी के चलते रुपया 16 पैसे सुधरकर 95.73 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसके साथ ही बाजार की अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक इंडिया विक्स (India VIX) 1.55 प्रतिशत गिरकर 12.09 अंक पर आ गया, जो बाजार में घबराहट घटने का संकेत है。
18 सितंबर 2026: प्रमुख बाजार संकेतकों और परिसंपत्ति वर्गों का डेटा
शुक्रवार को शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान भारतीय शेयर बाजारों, विदेशी फंड फ्लो और कमोडिटी बाजार के प्रमुख संकेतकों का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | वर्तमान स्तर (18 सितंबर 2026) | पिछला सत्र / आधार | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | प्रमुख प्रभाव एवं बाजार संकेत |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 74,474.19 | 74,314.59 | +159.60 अंक (+0.22%) | वैश्विक संकेतों और मूडीज रिपोर्ट से तेजी |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 23,315.80 | 23,270.60 | +45.20 अंक (+0.20%) | 23,300 के अहम स्तर के ऊपर मजबूती |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $104.10 / बैरल | $105.05 / बैरल | -0.90% की गिरावट | आयात बिल और मुद्रास्फीति को राहत |
| भारतीय रुपया (USD / INR) | ₹95.73 प्रति डॉलर | ₹95.89 प्रति डॉलर | +16 पैसे की मजबूती | डॉलर की सुस्ती और तेल में नरमी |
| इंडिया विक्स (India VIX) | 12.09 अंक | 12.28 अंक | -1.55% की गिरावट | ट्रेडर्स में घबराहट में कमी का संकेत |
| घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) | +₹3,617.75 करोड़ | शुद्ध खरीदार (17 सितंबर) | मजबूत घरेलू प्रवाह | विदेशी बिकवाली को किया बेअसर |
| विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) | -₹3,208.76 करोड़ | शुद्ध बिकवाल (17 सितंबर) | सितंबर में ₹17,810 करोड़ निकासी | लगातार पूंजी बहिर्वाह का दबाव |
| मूडीज भारत GDP अनुमान (FY27) | 7.0 प्रतिशत | 6.0 प्रतिशत | +100 आधार अंक (+1.0%) | जी-20 देशों में सबसे तेज वृद्धि |
सेक्टरवार स्थिति: फार्मा में तेजी, टाटा समूह के शेयरों पर दबाव
HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक रहा। शुरुआती सत्र में निफ्टी के 16 सेक्टोरल सूचकांकों में से 15 सूचकांक हरे निशान में रहे। फार्मा क्षेत्र में डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज 2.14 प्रतिशत की तेजी के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू स्टील 1.76 प्रतिशत, इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) 1.56 प्रतिशत और श्रीराम फाइनेंस 1.30 प्रतिशत चढ़े। एचडीएफसी बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी करीब 1 प्रतिशत का सुधार देखा गया。
इसके विपरीत, टाटा समूह के शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा। टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन पद पर पांच साल का विस्तार दिए जाने के बाद टाटा ट्रस्ट्स द्वारा इस पर आपत्ति उठाए जाने की खबरों से अनिश्चितता फैली। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) का शेयर 2.41 प्रतिशत से 3.34 प्रतिशत तक लुढ़क गया। टाटा मोटर्स पीवी और टाटा केमिकल्स में भी गिरावट दर्ज हुई, जिसने सेंसेक्स की बढ़त को सीमित रखा。
प्राइमरी मार्केट और आईपीओ का बूम: लिक्विडिटी डायवर्जन
शेयर बाजार में बड़ी उछाल न आने का कारण प्राइमरी मार्केट में जारी हलचल है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के 14.89 करोड़ शेयरों के मेगा आईपीओ और नए पब्लिक इश्यूज को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह है। विश्लेषकों का कहना है कि आईपीओ मार्केट में पैसा जाने से सेकेंडरी मार्केट की नकदी बंटी है। इसके बावजूद घरेलू म्यूचुअल फंड्स और खुदरा एसआईपी प्रवाह ने बाजार को ठोस आधार दिया है。
वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत और निवेशकों की रणनीति
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 1.7 प्रतिशत और एसएंडपी 500 1.1 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए थे। इसका असर एशियाई बाजारों पर दिखा, जहां दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 2.1 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.8 प्रतिशत चढ़कर कारोबार करते दिखे। विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू फंड्स और मूडीज की सकारात्मक रिपोर्ट से बाजार का आधार मजबूत है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्वालिटी शेयरों में एसआईपी जारी रखना ही लाभदायक रणनीति होगी。













