रांची / नई दिल्ली: झारखंड में सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, धांधली और पेपर लीक विवाद के बीच राज्य सरकार ने एक अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक एक निजी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गई तमाम भर्ती परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसमें राज्य की सबसे बहुप्रतीक्षित JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग – संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा भी शामिल है, जिसको लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
छात्रों के 25 दिनों के आंदोलन और अनशन के बाद सरकार का बड़ा कदम
झारखंड में पिछले करीब एक महीने से हजारों युवा, छात्र और प्रतियोगी अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता, पेपर लीक की सीबीआई जांच और दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे थे। छात्रों के इस व्यापक जनाक्रोश और 16 दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के भारी दबाव के बाद मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित उच्चस्तरीय आपात बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
सरकार के इस फैसले के बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र महतो ने मध्यरात्रि को अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि, छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे मामले में लिप्त दोषियों और निजी वेंडरों की गिरफ्तारी नहीं होती तथा आगे की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी भर्ती कानून नहीं बन जाता, तब तक उनका ‘चरण-2 आंदोलन’ शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक रूप से जारी रहेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि: निजी आउटसोर्स एजेंसी पर लगे गंभीर आरोप
यह पूरा मामला तब चरम पर पहुंचा जब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित विभिन्न तकनीकी, डिप्लोमा और सामान्य स्नातक स्तरीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने तथा परीक्षा संचालन में भारी गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण सामने आए। छात्रों का आरोप था कि 2014 से परीक्षा कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी ने स्थापित परीक्षा प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की।
मामले की गंभीरता और सार्वजनिक असंतोष को देखते हुए राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने आयोग के रांची स्थित मुख्यालय और संबंधित वेंडरों के ठिकानों पर सघन छापेमारी की, जिसमें कई संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और गोपनीय दस्तावेज बरामद किए गए। इसके बाद सरकार ने उक्त निजी एजेंसी को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट करते हुए उसके कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं की प्रक्रिया को निरस्त करने का कड़ा फैसला लिया।
2,000 से अधिक नियुक्त कर्मचारियों में संशय और विरोध
सरकार द्वारा 2014 से अब तक की परीक्षाओं को निरस्त करने के इस व्यापक आदेश से उन 2,000 से अधिक सफल अभ्यर्थियों में भारी चिंता, अनिश्चितता और असंतोष उत्पन्न हो गया है, जो पूर्व में इन परीक्षाओं को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर राज्य के विभिन्न विभागों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रभावित कर्मचारियों और उनके संगठनों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- ईमानदार चयनितों की सेवा सुरक्षा: धांधली और पेपर लीक करने वाले असामाजिक तत्वों तथा अधिकारियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी से चयनित हुए निर्दोष कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
- उच्च न्यायालय जाने की तैयारी: कर्मचारी संघों ने संकेत दिया है कि यदि राज्य सरकार ने उनकी सेवा सुरक्षा और कानूनी अधिकारों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए, तो वे न्यायिक संरक्षण के लिए झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
पारदर्शी परीक्षा नियमावली और नए सिरे से परीक्षा कैलेंडर
मुख्यमंत्री सचिवालय और कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अब भर्ती परीक्षाओं के संचालन के लिए एक पारदर्शी, सुरक्षित और अत्याधुनिक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है।
सरकार के आगामी प्रमुख प्रशासनिक कदम इस प्रकार हैं:
- पूर्णतः सरकारी और राष्ट्रीय एजेंसियों का नियंत्रण: भविष्य की सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं का आयोजन विवादित निजी वेंडरों के बजाय सीधे सरकारी संस्थाओं अथवा राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से कराया जाएगा।
- कड़े भर्ती कानून और संपत्ति कुर्की का प्रावधान: प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक की रोकथाम के लिए गैर-जमानती धाराओं और आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे।
- नया परीक्षा कैलेंडर: रद्द की गई सभी परीक्षाओं के लिए जल्द ही नई तिथियों, परीक्षा केंद्रों और आवेदन सत्यापन का समयबद्ध कैलेंडर जारी किया जाएगा ताकि निष्ठावान छात्रों का बहुमूल्य समय बर्बाद न हो।
राजनीतिक मायने और भविष्य का परिदृश्य
राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल और आगामी विधानसभा सत्र के मद्देनजर यह फैसला अत्यंत दूरगामी माना जा रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले को छात्रों के ऐतिहासिक संघर्ष और जनदबाव की जीत बताया है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन का कहना है कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं करेगी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती व्यवस्था स्थापित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
फिलहाल राजधानी रांची सहित सभी प्रमुख जिलों में प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है, और छात्र संगठन नई भर्ती प्रक्रियाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।












