नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और रक्षा कर्मचारी महासंघों (BPMS और AIDEF) ने आयोग के समक्ष कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन को वर्तमान ₹18,000 से बढ़ाकर ₹52,600 से लेकर ₹72,000 तक करने और 2.92 से 4 गुना (4x) तक फिटमेंट फैक्टर लागू करने का विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है।
नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन के पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। देश भर के विभिन्न कर्मचारी संघों और प्रमुख रक्षा कर्मचारी महासंघों—जैसे भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF)—ने वेतन आयोग के समक्ष अपने विस्तृत मांग पत्र (मेमोरेंडम) प्रस्तुत किए हैं। इन प्रस्तावों में 7वें वेतन आयोग के मौजूदा ₹18,000 के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर ₹52,600 से लेकर ₹72,000 तक करने तथा फिटमेंट फैक्टर को 2.92 से लेकर 4.0 (4 गुना) तक तय करने की जोरदार वकालत की गई है।
यूनियनों ने किस फॉर्मूले के आधार पर मांगा ₹72,000 वेतन?
Livemint और Sunday Guardian की आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारी यूनियनों ने न्यूनतम वेतन की गणना के लिए 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) और डॉ. एक्रॉयड फॉर्मूले (Aykroyd Formula) को आधार बनाया है। वर्तमान में भोजन, आवास, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा और बिजली-पानी जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं की लागत में भारी इजाफा हुआ है। यूनियनों का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग में 3 सदस्यों की उपभोग इकाई मानी गई थी, जबकि वास्तविक जीवन में आश्रित माता-पिता सहित परिवार का आकार बड़ा होता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में हुई ऐतिहासिक वृद्धि को भी सरकारी कर्मचारियों के पे-मैट्रिक्स में दर्शाया जाना आवश्यक है।
फिटमेंट फैक्टर: 2.57 से बढ़कर 4.0 तक की मांग
7वें वेतन आयोग में मूल वेतन तय करने के लिए 2.57 का एक समान (यूनिफॉर्म) फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुआ था। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के लिए संगठनों ने ग्रेडेड और उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। रेलवे कर्मचारियों के संगठन IRTSA ने पे लेवल 1 से 5 के लिए न्यूनतम 2.92 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की है, जिससे शुरुआती बेसिक पे ₹52,600 बनती है। वहीं, रक्षा कर्मचारी महासंघ BPMS ने उच्च तकनीकी जिम्मेदारियों और महंगाई के दबाव को देखते हुए 4 गुना (4x) तक फिटमेंट मल्टीप्लायर का प्रस्ताव दिया है, जिससे लेवल-1 का न्यूनतम वेतन सीधे ₹72,000 के स्तर पर पहुंच जाएगा।
किन कर्मचारियों पर होगा इस बदलाव का सीधा असर?
इस वेतन पुनरीक्षण का प्रभाव केंद्र सरकार के सभी 18 पे लेवल्स (पे मैट्रिक्स लेवल 1 से लेवल 18) के तहत आने वाले लगभग 50 लाख नियमित केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। इसके दायरे में रक्षा प्रतिष्ठानों के सिविलियन कर्मचारी, रेलवे, डाक विभाग, केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS), अर्धसैनिक बल और अन्य सभी केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों के कार्मिक शामिल हैं। आमतौर पर केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही बाद के चरणों में राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग और महंगाई भत्तों का पुनरीक्षण करती हैं।
आयोग की देशव्यापी परामर्श बैठकें और आगामी समयसीमा
Outlook Money और संबंधित आधिकारिक अपडेट्स के अनुसार, 8वां वेतन आयोग वर्तमान में विभिन्न राज्यों में कर्मचारी यूनियनों और हितधारकों के साथ प्रत्यक्ष परामर्श बैठकें आयोजित कर रहा है। दिल्ली परामर्श के बाद अब आयोग की अगली महत्वपूर्ण बैठकें 31 अगस्त और 1 सितंबर को जयपुर में तथा 16 से 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में निर्धारित की गई हैं। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों में बढ़ती जीवन यापन लागत और मुद्रास्फीति को पूरी तरह संतुलित करेगा।












