चंडीगढ़ / नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और करियर संवर्धन से जुड़े ऐतिहासिक सुधारों के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की परामर्श प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित आयोग की उच्चस्तरीय समिति ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 से चंडीगढ़ में तीन दिवसीय क्षेत्रीय बैठक शुरू कर दी है, जो 18 सितंबर तक चलेगी। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन कार्यरत केंद्रीय कर्मचारी महासंघों, रेलवे यूनियनों, रक्षा कर्मियों और पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष अपने प्रस्ताव रखे हैं। NDTV Profit की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ बैठक में कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग मौजूदा एमएसीपी (MACP) व्यवस्था में सुधार कर 3 के बजाय 5 वित्तीय अपग्रेड (5 Financial Upgradations) देने और इसे सीधे प्रमोशनल पदानुक्रम से जोड़ने की है। इसके अतिरिक्त 2.86 से 3.83 के बीच फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के स्वतः विलय पर भी मंथन हो रहा है。
चंडीगढ़ में 3 दिवसीय महामंथन: उत्तर भारत के कर्मचारियों की आवाज
8वें वेतन आयोग का गठन केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को किया गया था और इसे सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव और आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य हैं। दिल्ली, जयपुर, चेन्नई और पुडुचेरी में परामर्श पूरा करने के बाद आयोग का यह 15वां औपचारिक क्षेत्रीय दौरा है。
उत्तर भारत के इस तीन दिवसीय सम्मेलन में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि देश के 50 लाख से अधिक सेवारत कर्मियों और 65 लाख पेंशनरों के जीवन स्तर को सुरक्षित रखने के लिए आयोग को सेवाकाल में करियर ठहराव (Stagnation) समाप्त करने का तंत्र बनाना चाहिए। 18 महीने की समय-सीमा के तहत आयोग की रिपोर्ट मई 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपी जानी है。
MACP योजना में बड़े सुधार की मांग: 3 के बजाय 5 अपग्रेड क्यों जरूरी?
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग और डीओपीटी (DoPT) के नियमों के अनुसार कर्मचारियों को संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP) योजना के तहत 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूरी करने पर तीन वित्तीय अपग्रेड मिलते हैं। हालांकि, कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि यह व्यवस्था आज के समय में अपर्याप्त साबित हो रही है。
Livemint के विशेष विश्लेषण के अनुसार, कई केंद्रीय विभागों, डाक सेवाओं, वैज्ञानिक संस्थानों और रेलवे में पदोन्नति के पद सीमित हैं। इसके चलते कर्मचारी 15 से 20 साल तक एक ही पद पर अटके रहते हैं। 10 वर्ष का लंबा इंतजार कर्मचारियों के मनोबल और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर डालता है। इसलिए यूनियनों ने मांग की है कि अपग्रेड की संख्या बढ़ाकर 5 की जाए और अंतराल घटाया जाए。
विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तावित MACP सुधार मॉडल
चंडीगढ़ में आयोग के समक्ष कर्मचारी संघों ने एमएसीपी के व्यावहारिक फॉर्मूले सुझाए हैं:
1. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA): इस संगठन ने सेवा के 8, 15, 22, 28 और 32 वर्ष में कुल 5 वित्तीय अपग्रेड देने का प्रस्ताव रखा है। इनका तर्क है कि एमएसीपी को केवल पे-मैट्रिक्स के अगले स्तर तक सीमित न रखकर वास्तविक पदोन्नति पद (Promotional Post) के वेतनमान से जोड़ा जाए。
2. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO): डाक कर्मचारियों के संघ ने सेवा के 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष में 5 अपग्रेड देने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा कि पदोन्नति अस्वीकार करने पर कर्मचारी का एमएसीपी लाभ नहीं छीना जाना चाहिए क्योंकि दोनों अलग विषय हैं。
3. नेशनल काउंसिल – जेसीएम (स्टाफ साइड): केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की शीर्ष परिषद ने 30 वर्ष की सेवा में न्यूनतम 5 वित्तीय उन्नयन की मांग करते हुए इसे संवर्ग के पदानुक्रम के अनुसार लागू करने की वकालत की है。
मौजूदा बनाम प्रस्तावित MACP व्यवस्था का तुलनात्मक ढांचा
नीचे दी गई तालिका में 7वें वेतन आयोग की वर्तमान एमएसीपी व्यवस्था और 8वें वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संघों द्वारा प्रस्तुत 5 अपग्रेड प्रस्तावों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| प्रणाली / संगठन का नाम | वित्तीय अपग्रेड की कुल संख्या | प्रस्तावित सेवा अंतराल (वर्ष) | पे-स्केल का निर्धारण पैमाना | पदोन्नति इनकार पर प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| 7वां वेतन आयोग (वर्तमान) | 3 वित्तीय अपग्रेड | 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पर | केवल पे-मैट्रिक्स का अगला लेवल | लाभ से वंचित या स्थगित करने का नियम |
| MSA (सर्वे ऑफ इंडिया प्रस्ताव) | 5 वित्तीय अपग्रेड | 8, 15, 22, 28 और 32 वर्ष की सेवा पर | सीधे अगले पदोन्नति पद का पे-लेवल | नियमों में ढील और वरिष्ठता का सम्मान |
| FNPO (डाक कर्मचारी संघ) | 5 वित्तीय अपग्रेड | 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष की सेवा पर | पदानुक्रम आधारित उच्चतर वेतनमान | पदोन्नति इनकार पर लाभ रद्द नहीं होगा |
| NC-JCM (स्टाफ साइड मांग) | 5 वित्तीय अपग्रेड | प्रत्येक 5 या 6 वर्ष के नियमित अंतराल पर | संवर्ग की वास्तविक प्रमोशनल हायरार्की | वित्तीय प्रगति का सुरक्षित अधिकार |
प्रमोशनल पदानुक्रम से MACP को जोड़ने की मुख्य मांग
कर्मचारी यूनियनों ने वर्तमान व्यवस्था की विसंगति उजागर की। मौजूदा नियम में यदि कोई कर्मचारी लेवल 7 (मूल वेतन ₹44,900) पर कार्यरत है और पदोन्नत नहीं होता, तो एमएसीपी के तहत उसे केवल लेवल 8 (मूल वेतन ₹47,600) मिलता है। जबकि विभाग में उसका अगला वास्तविक पदोन्नति पद लेवल 10 (मूल वेतन ₹56,100) का होता है। इससे कर्मचारी को हर महीने लगभग ₹8,500 मूल वेतन और डीए-एचआरए का नुकसान होता है। यूनियनों का आग्रह है कि एमएसीपी को हमेशा संवर्ग के अगले पद स्तर पर ही तय किया जाए。
चंडीगढ़ बैठक में फिटमेंट फैक्टर, DA और पेंशन पर मंथन
चंडीगढ़ की बैठक में एमएसीपी के अलावा फिटमेंट फैक्टर पर भी मंथन हुआ। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने 2.86 से 3.25 के फिटमेंट की मांग दोहराई ताकि न्यूनतम मूल वेतन ₹51,480 से ऊपर तय हो। साथ ही, महंगाई भत्ते (DA) के 25% या 50% पर पहुंचते ही मूल वेतन में विलय के नियम पर भी विचार हुआ。
उत्तर भारत के शहरों—जैसे मोहाली, पंचकूला और शिमला—में बढ़ते आवास खर्च को देखते हुए एचआरए (HRA) दरों के पुनरीक्षण की मांग उठी। पेंशनर संगठनों ने कम्युटेड पेंशन की बहाली 15 के बजाय 12 वर्ष में करने और 65, 70 व 75 वर्ष की आयु में अतिरिक्त पेंशन देने की पुरजोर मांग की। आयोग 18 सितंबर तक बैठकों में प्राप्त सुझावों को अपनी मसौदा रिपोर्ट में शामिल करेगा。













