नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक सेवारत कर्मचारियों और भविष्य के पेंशनभोगियों के करियर विकास तथा वेतन संरचना को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत प्रस्ताव सामने आया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के समक्ष प्रमुख राष्ट्रीय कर्मचारी यूनियनों ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना में बड़े सुधार की औपचारिक मांग प्रस्तुत की है। Livemint की विशेष रिपोर्ट और The Sunday Guardian के वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने 7वें वेतन आयोग की वर्तमान 10, 20 और 30 वर्ष की व्यवस्था समाप्त कर सेवाकाल में 5 वित्तीय अपग्रेड (5 MACP Upgrades) देने और इसे अगले पे-लेवल के बजाय सीधे पदोन्नति पदानुक्रम (Promotional Hierarchy) से जोड़ने की मांग की है। पुडुचेरी परामर्श पूरा होने के बाद 16 से 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में होने वाली अगली बैठक से पहले यह मुद्दा कर्मचारियों के बीच चर्चा के केंद्र में आ गया है।
MACP योजना में वर्तमान विसंगतियां और करियर गतिरोध (Stagnation)
केंद्रीय सेवा में लंबे समय से कार्यरत तकनीकी और गैर-राजपत्रित संवर्गों के लिए नियमित पदोन्नति के सीमित अवसर हमेशा से बड़ी समस्या रहे हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा संचालित मौजूदा एमएसीपी व्यवस्था के तहत पदोन्नति न मिलने पर 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पर 3 वित्तीय उन्नयन दिए जाते हैं। हालांकि कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि 10 वर्ष का लंबा अंतराल सेवा में भारी ठहराव पैदा करता है, जिससे कर्मचारियों के मनोबल और कार्यकुशलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसके अलावा, 7वें वेतन आयोग के नियमों में एमएसीपी का लाभ पे-मैट्रिक्स के केवल अगले क्रमिक स्तर (Immediate Next Level) में मिलता है, जो कई विभागों में वास्तविक प्रमोशनल पद के वेतन स्तर से कम होता है। उदाहरण के लिए, सर्वे ऑफ इंडिया या रेलवे में लेवल-7 पर कार्यरत कर्मचारी को एमएसीपी के तहत लेवल-8 दिया जाता है, जबकि विभागीय कैडर में उसका अगला वास्तविक प्रमोशनल पद सीधे लेवल-10 पर होता है। इस विसंगति के कारण कर्मचारियों को हर महीने भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तावित 5 MACP फॉर्मूले
8वें वेतन आयोग के समक्ष अलग-अलग विभागों की मान्यता प्राप्त यूनियनों ने ठोस विकल्प रखे हैं। मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने सेवा के 8वें, 15वें, 22वें, 28वें और 32वें वर्ष में 5 वित्तीय उन्नयन की मांग की है। वहीं डाक विभाग के फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) ने प्रत्येक 6 वर्ष में यानी 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष पर वित्तीय अपग्रेड का फॉर्मूला दिया है।
नेशनल काउंसिल जेसीएम (NC-JCM Staff Side) ने भी आयोग के समक्ष दृढ़ता से पक्ष रखा है कि 30 वर्ष के कुल सेवाकाल में कम से कम 5 वित्तीय अवसर सुनिश्चित किए जाएं और वेतन निर्धारण प्रमोशनल पे-स्केल के अनुसार हो। रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसायटी (RSCWS) ने भी 5-वर्षीय अंतराल वाली लचीली प्रणाली का समर्थन किया है।
मौजूदा बनाम प्रस्तावित MACP व्यवस्था का तुलनात्मक विश्लेषण
नीचे दी गई तालिका में 7वें वेतन आयोग की वर्तमान व्यवस्था और 8वें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी यूनियनों द्वारा प्रस्तुत 5-स्तरीय एमएसीपी प्रस्तावों का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत है:
| मानदंड / संगठन | वित्तीय अपग्रेड | प्रस्तावित सेवा अवधि | वेतन निर्धारण का आधार | पदोन्नति अस्वीकार पर नियम |
|---|---|---|---|---|
| 7वां वेतन आयोग (वर्तमान) | 3 वित्तीय अपग्रेड | 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा | पे-मैट्रिक्स का अगला क्रमिक स्तर | MACP लाभ स्थगित या रद्द होता है |
| MSA, सर्वे ऑफ इंडिया | 5 वित्तीय अपग्रेड | 8, 15, 22, 28 और 32 वर्ष | वास्तविक प्रमोशनल पद का वेतन स्तर | वरिष्ठता के आधार पर पूर्ण वित्तीय सुरक्षा |
| FNPO (डाक कर्मचारी संघ) | 5 वित्तीय अपग्रेड | 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष | विभागीय पदोन्नति पदानुक्रम अनुसार | पदोन्नति इनकार पर MACP रद्द न किया जाए |
| NC-JCM (स्टाफ साइड) | न्यूनतम 5 अपग्रेड | 30 वर्ष में प्रत्येक 5-6 वर्ष | फंक्शनल प्रमोशनल पे-स्केल आधार | समान अवसर एवं निष्पक्ष करियर सुरक्षा |
| RSCWS (रेलवे वेलफेयर) | 5 वित्तीय अपग्रेड | प्रत्येक 5 वर्ष का अंतराल | गतिरोध-मुक्त डायनामिक वेतनमान | पेंशन व ग्रेच्युटी में पूर्ण गणना लाभ |
प्रमोशन अस्वीकार करने पर MACP न रोकने की मांग
कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाया गया दूसरा प्रमुख मुद्दा पदोन्नति अस्वीकार करने से संबंधित है। वर्तमान नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी पारिवारिक कारणों, बच्चों की शिक्षा या माता-पिता की देखभाल के चलते दूरदराज स्थानांतरण वाली पदोन्नति से इनकार करता है, तो उसका एमएसीपी लाभ रोक दिया जाता है। यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक पदोन्नति और सेवा सुरक्षा हेतु मिलने वाला वित्तीय उन्नयन दो अलग-अलग विषय हैं।
संगठनों का कहना है कि पदोन्नति ठुकराने पर प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी भले न मिले, लेकिन कर्मचारी की वर्षों की समर्पित सेवा के आधार पर मिलने वाले वित्तीय लाभ को नहीं छीना जाना चाहिए। यदि आयोग इस सिफारिश को स्वीकार करता है, तो यह दूरदराज तैनात कर्मचारियों के लिए बड़ी पारिवारिक राहत साबित होगी।
8वें वेतन आयोग की समयसीमा और आगामी परामर्श बैठकें
3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि प्रो. पुलक घोष अंशकालिक सदस्य और पंकज जैन सदस्य सचिव हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। 10 महीने बीतने के बाद परामर्श प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत आयोग 9 सितंबर को पुडुचेरी बैठक पूरी कर चुका है। अब 16, 17 और 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में उत्तर भारत के कर्मचारी संगठनों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा होगी। इसके बाद आयोग 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में परामर्श करेगा।
वेतन और पेंशन पर 5 MACP का संभावित वित्तीय प्रभाव
यदि 8वां वेतन आयोग 5 एमएसीपी अपग्रेड की मांग को मंजूरी देता है, तो इसका सीधा लाभ पे-लेवल 1 से 12 तक के कर्मचारियों को मिलेगा। 10 वर्ष के बजाय प्रत्येक 6 या 8 वर्ष में वेतन वृद्धि मिलने से बेसिक पे तेजी से बढ़ेगा, जिससे महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) में भी भारी इजाफा होगा। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के समय अंतिम मूल वेतन अधिक होने से ग्रेच्युटी और पेंशन में 25 से 30 प्रतिशत की सीधी वृद्धि दर्ज होगी।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग के समक्ष 5 एमएसीपी अपग्रेड और प्रमोशनल पे-स्केल की मांग केंद्रीय कर्मचारियों के करियर में बड़ा सुधार ला सकती है। दशकों से पदोन्नति की कमी झेल रहे कर्मचारियों के लिए यह प्रस्ताव वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार है। 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ बैठक के दौरान होने वाली चर्चा पर अब देश भर के कर्मचारियों की निगाहें टिकी हैं।













