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BRICS समिट में बिहार के सत्तू का जलवा: मेहमानों को मिला खास बैग

नई दिल्ली: राजधानी के भारत मंडपम में शनिवार, 12 सितंबर 2026 से 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य आगाज हो गया है। इस सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, शीर्ष राजनयिक और दुनिया भर से आए 1,200 से अधिक विदेशी पत्रकार भाग ले रहे हैं। इस कूटनीतिक आयोजन के बीच सोशल मीडिया पर जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और पत्रकारों को भेंट किया गया विशेष उपहार हैंपर। इस किट में भारतीय विविधता की अनूठी झलक पेश की गई है, जिसमें बिहार के पारंपरिक सत्तू और मिथिला के मखाने ने वैश्विक मंच पर सबका दिल जीत लिया है।

भारत मंडपम में ‘टेस्ट ऑफ इंडिया’: 9 नायाब उपहारों का संगम

Free Press Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स सम्मेलन को कवर करने पहुंचे विदेशी मीडियाकर्मियों और राजनयिकों के लिए विशेष गुड्डी बैग तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि संपदा, हथकरघा और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

इस किट में देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से चुने गए 9 विशेष उत्पाद शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान बिहार के पारंपरिक पौष्टिक आहार सत्तू और जीआई टैग प्राप्त मखाने ने खींचा है। भुने चने से तैयार सत्तू अपने उच्च प्रोटीन, फाइबर और शीतलता प्रदान करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। अब यह देसी सुपरफूड विदेशी पत्रकारों की मेज तक पहुंच चुका है, जिसे मेहमान उत्सुकता से चख रहे हैं।

ब्रिक्स गुड्डी बैग के प्रमुख उत्पादों का विवरण

विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की सांस्कृतिक और पाक कला विविधता से रूबरू कराने के लिए तैयार किए गए इस विशेष हैंपर में शामिल मुख्य उत्पादों का विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

उत्पाद / वस्तु का नाम मूल राज्य / क्षेत्र सांस्कृतिक एवं पोषण महत्व विदेशी मेहमानों के बीच आकर्षण
भुना चना सत्तू (Sattu) बिहार (Bihar) उच्च प्रोटीन युक्त पारंपरिक भारतीय सुपरफूड पौष्टिक देसी ड्रिंक और स्थानीय खानपान का स्वाद
मिथिला मखाना (Fox Nuts) बिहार (मिथिलांचल) जीआई टैग प्राप्त जैविक सुपर स्नैक हल्का, कुरकुरा और स्वास्थ्यवर्धक स्नैक
अरेबिका जनजातीय कॉफी कोरापुट, ओडिशा (Odisha) 100% शुद्ध अरेबिका स्पेशल कॉफी प्रीमियम सुगंध और जैविक भारतीय कॉफी
हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल गुजरात (Gujarat) कच्छ की पारंपरिक अजरख और ब्लॉक छपाई भारतीय पारंपरिक टेक्सटाइल और शिल्प कला
स्मार्ट चार्जिंग टोट बैग भारतीय नवाचार (Inbuilt Port) गैजेट्स चार्ज करने की आधुनिक सुविधा वाला बैग सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के लिए उपयोगी
सिरेमिक आर्टिसनल मग भारतीय हस्तशिल्प भारतीय कला शैली से सुसज्जित स्मृति चिन्ह दैनिक उपयोग का यादगार भारतीय सोवेनियर
ऑर्गेनिक हर्बल चाय और मसाले पूर्वोत्तर एवं दक्षिण भारत प्राकृतिक सुगंध और औषधीय गुणों से भरपूर ब्लेंड भारतीय मसालों और चाय संस्कृति का अनुभव

बिहार के सत्तू और मखाने का अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव

Times Now News की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक आयोजनों में आमतौर पर परिष्कृत पश्चिमी उपहार देने की परंपरा रही है, लेकिन भारत ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में अपनी मिट्टी से जुड़ी स्थानीय धरोहर को प्रस्तुत करने की मिसाल पेश की है। बिहार के सत्तू को अंतरराष्ट्रीय मीडिया किट में शामिल करना न केवल राज्य के किसानों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि भारतीय खानपान को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

सत्तू के साथ-साथ बिहार के मिथिलांचल का प्रसिद्ध मखाना भी विदेशी मेहमानों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में मखाने को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम और ग्लूटन-फ्री सुपरफूड के रूप में स्वीकार्यता मिली है। सम्मेलन में मौजूद पोषण विशेषज्ञों ने विदेशी प्रतिनिधियों को सत्तू का शरबत तैयार करने और मखाने के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी, जिससे विदेशी डेलिगेट्स काफी प्रभावित दिखे।

ओडिशा की जनजातीय कॉफी और गुजरात का पारंपरिक स्टोल

ब्रिक्स गुड्डी बैग केवल खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हस्तशिल्प और समावेशी विकास का भी प्रतीक है। किट में शामिल 100 प्रतिशत अरेबिका स्पेशलिटी कॉफी ओडिशा के कोरापुट जिले की पहाड़ियों में रहने वाले जनजातीय किसानों द्वारा जैविक रूप से उगाई गई है। इसके जरिए भारत सरकार ने यह संदेश दिया है कि देश के आदिवासी समुदाय भी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की उपज तैयार कर रहे हैं।

साथ ही गुजरात की हथकरघा परंपरा को प्रदर्शित करने वाला हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल विदेशी प्रतिनिधियों को खूब लुभा रहा है। प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के पारंपरिक ठप्पों से तैयार यह स्टोल भारतीय कारीगरी का बेजोड़ नमूना है। कई विदेशी राजनयिकों और पत्रकारों ने सम्मेलन हॉल में ही इस स्टोल को धारण कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी रुचि दिखाई।

पत्रकारों के लिए स्मार्ट टोट बैग: आधुनिक तकनीक और सुविधा

इस उपहार पैक की सबसे उपयोगी विशेषता इसका विशेष टोट बैग है। सम्मेलन को कवर करने वाले पत्रकारों को घंटों भारत मंडपम के मीडिया सेंटर और हॉलों के बीच भागदौड़ करनी पड़ती है, जिससे उनके फोन और कैमरों की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए टोट बैग में एक इन-बिल्ट यूएसबी चार्जिंग पोर्ट जोड़ा गया है।

पत्रकार बैग के भीतर पावर बैंक लगाकर चलते-फिरते उपकरण चार्ज कर सकते हैं। विदेशी पत्रकारों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिला सबसे व्यावहारिक और विचारशील उपहार करार दिया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई भारतीय मेहमाननवाजी

शनिवार सुबह मीडिया सेंटर में इन बैग्स का वितरण शुरू होते ही एक्स और इंस्टाग्राम पर तस्वीरें वायरल होने लगीं। रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के कई पत्रकारों ने गुड्डी बैग की अनबॉक्सिंग करते हुए वीडियो साझा किए। वीडियो में विदेशी पत्रकार बिहार के सत्तू के पैकेट और गुजराती स्टोल को उत्सुकता से देखते और भारतीय विविधता की तारीफ跨 करते नजर आए।

विदेशी मेहमानों का कहना है कि यह किट केवल औपचारिक उपहार नहीं है, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने का खूबसूरत परिचय है। पत्रकारों ने पारंपरिक अनाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता देने की सराहना की है।

निष्कर्ष: स्थानीय उत्पादों का वैश्विक मंच पर परचम

18वें ब्रिक्स सम्मेलन के इस गुड्डी बैग ने दिखा दिया है कि जब स्थानीय उत्पादों को सही सम्मान और पैकेजिंग के साथ पेश किया जाता है, तो वे दुनिया के बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ते हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) विजन को इससे अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। बिहार के सत्तू और मखाने से लेकर ओडिशा की कॉफी और गुजरात के स्टोल तक, इस किट ने भारत के अतुल्य वैभव का सशक्त संदेश दुनिया को दिया है।

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