नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) को लेकर देश भर में भारी उत्साह और कौतूहल का माहौल है। दुनिया भर से आ रहे लगभग 1,300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों और राजनयिकों के स्वागत के लिए भारत सरकार ने खास तैयारियां की हैं। विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्वादों से रूबरू कराने के लिए एक अनूठा गुड्डी बैग तैयार किया गया है। इस किट में सबसे ज्यादा चर्चा और आकर्षण का केंद्र बिहार का पारंपरिक सत्तू और मिथिला का विश्वप्रसिद्ध मखाना बन गया है, जो अब वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत की शान बढ़ा रहा है。
भारत मंडपम में सत्तू और मखाने का स्वाद: कूटनीति में ‘देसी टच’
Free Press Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स सम्मेलन की व्यापक कवरेज के लिए रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र और यूएई समेत कई देशों से 1,300 मीडिया प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय और आयोजन समिति ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को एक ऐसी यादगार भेंट देने की अनूठी योजना बनाई, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को साकार करे। इसी सोच के तहत तैयार विशेष उपहार हैंपर में बिहार के भुने चने से बने पौष्टिक सत्तू और मखाने को प्रमुखता से शामिल किया गया है。
बिहार में सत्तू केवल एक भोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनशैली और ऊर्जा का सदियों पुराना प्रतीक है। उच्च प्रोटीन और फाइबर से भरपूर सत्तू को दुनिया भर में ‘देसी सुपरफूड’ के रूप में नई वैश्विक पहचान मिल रही है। वहीं जीआई टैग प्राप्त मिथिला का বাতাসে मखाना अपने असाधारण पोषण और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। ब्रिक्स किट में इन दोनों उत्पादों की मौजूदगी ने स्थानीय किसानों और कुटीर उद्योगों के बीच गर्व की नई लहर पैदा कर दी है。
ब्रिक्स 2026 स्पेशल गुड्डी बैग: 9 अनूठे उपहारों का विवरण
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और पत्रकारों को भेंट किए जा रहे इस विशेष हैंपर में देश के विभिन्न राज्यों की लोककला, क्षेत्रीय स्वाद और तकनीकी नवाचार का संतुलित संगम दिखता है। नीचे दी गई तालिका में गुड्डी बैग की सभी 9 प्रमुख वस्तुओं और उनके महत्व का विवरण दिया गया है:
| उपहार सामग्री (Item) | उत्पत्ति राज्य / क्षेत्र | उत्पाद की श्रेणी | सांस्कृतिक एवं व्यावहारिक विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| भुना चना सत्तू (Sattu) | बिहार | पारंपरिक सुपरफूड | उच्च प्रोटीन युक्त प्राकृतिक ऊर्जा पेय, बिहार का प्रतिष्ठित खानपान |
| मिथिला मखाना (Fox Nuts) | बिहार | जीआई टैग ड्राई फ्रूट्स | कम कैलोरी, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर प्रीमियम स्नैक |
| अरेबिका स्पेशलिटी कॉफी | ओडिशा (कोरापुट पहाड़ियां) | आदिवासी जैविक उत्पाद | 100% अरेबिका कॉफी, जनजातीय महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित |
| हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल | गुजरात | हथकरघा वस्त्र कला | प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक वुडन ब्लॉक कला से तैयार रेशमी स्टोल |
| स्मार्ट इन-बिल्ट चार्जिंग बैग | भारतीय नवाचार | इलेक्ट्रॉनिक लाइफस्टाइल | यूएसबी चार्जिंग पोर्ट युक्त मजबूत इको-फ्रेंडली टोट बैग, सहज चार्जिंग |
| हस्तनिर्मित सेरेमिक मग | उत्तर प्रदेश (खुर्जा) | भारतीय हस्तशिल्प | पारंपरिक रूपांकनों और ब्रिक्स 2026 लोगो से सुसज्जित कलात्मक स्मारिका |
| असमिया जैविक ग्रीन टी | असम | प्रीमियम बागानी चाय | पूर्वोत्तर भारत की सुगंधित पत्तियों से तैयार ताजगी भरा स्वास्थ्य पेय |
| सुगंधित मसाला किट | केरल (मालाबार तट) | मसाला एवं वेलनेस | इलायची, दालचीनी और लौंग का प्राकृतिक खुशबूदार और प्रामाणिक मिश्रण |
| हैंडमेड डायरी और ब्रास पेन | राजस्थान (सांगानेर) | हस्तनिर्मित स्टेशनरी | पुनर्चक्रित हस्तनिर्मित कागज और पीतल की नक्काशीदार खूबसूरत कलम |
स्मार्ट टोट बैग: पत्रकारों के लिए यूएसबी चार्जिंग पोर्ट की सुविधा
Times Now की लाइफस्टाइल रिपोर्ट के अनुसार, इस उपहार किट का सबसे व्यावहारिक और आधुनिक पहलू इसका स्मार्ट टोट बैग है। विदेशी पत्रकारों को शिखर सम्मेलन के दौरान लगातार फील्ड रिपोर्टिंग और लाइव प्रसारण करना पड़ता है, जिससे उनके डिजिटल उपकरणों की बैटरी तेजी से खत्म हो जाती है। इस गंभीर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए टोट बैग में एक इन-बिल्ट यूएसबी चार्जिंग पोर्ट दिया गया है。
पत्रकार बैग के अंदर पावर बैंक जोड़कर बाहरी पोर्ट से सीधे अपने फोन, रिकॉर्डर या टैबलेट को आसानी से चार्ज कर सकते हैं। यह स्मार्ट डिजाइन रिपोर्टिंग को बेहद सुविधाजनक बनाता है और आधुनिक भारतीय सोच को दर्शाता है। इसके अलावा बैग को पर्यावरण-अनुकूल जैविक सूती और जूट के कपड़े से तैयार किया गया है, जो प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण और हरित भारत के संकल्प को मजबूती देता है。
कोरापुट की आदिवासी कॉफी से गुजरात के हैंडलूम तक की झलक
गुड्डी बैग में केवल बिहार के स्वाद तक सीमित न रहकर देश के अन्य कोनों की अनूठी पहचान भी शामिल की गई है। ओडिशा के कोरापुट की पहाड़ियों में आदिवासी समुदायों द्वारा उगाई जाने वाली 100 प्रतिशत अरेबिका स्पेशलिटी कॉफी इसमें शामिल है। ट्राइफेड के सहयोग से यह कॉफी जनजातीय आजीविका को सशक्त बना रही है और वैश्विक पहचान दिला रही है。
हथकरघा परंपरा के रूप में गुजरात का प्रामाणिक हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल विदेशी मेहमानों को दिया जा रहा है। कच्छ और पाटन के कारीगरों द्वारा तैयार यह स्टोल भारतीय वस्त्र कला की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। इसके साथ खुर्जा का सेरेमिक मग और असम की जैविक चाय मिलकर विदेशी प्रतिनिधियों को भारत के विविध शिल्पों और स्वादों की एक अविस्मरणीय यात्रा कराते हैं。
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘सत्तू डिप्लोमेसी’
अंतरराष्ट्रीय मीडिया सेंटर में इस गुड्डी बैग के वितरण के साथ ही सोशल मीडिया पर ‘सत्तू डिप्लोमेसी’ तेजी से ट्रेंड करने लगा। एक्स और इंस्टाग्राम पर लोगों ने इस पर उत्साहपूर्वक प्रतिक्रियाएं दीं। यूजर्स ने लिखा कि जो पौष्टिक आहार कभी आम जनता का भोजन माना जाता था, वह आज वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर विदेशी मेहमानों की पसंद बन चुका है。
बिहार और पूर्वांचल के लोगों ने इस ऐतिहासिक पहल की खुले दिल से सराहना की। सोशल मीडिया पोस्ट्स में कहा गया कि भारत अब अपनी जड़ों, स्थानीय खानपान और पारंपरिक पहचान पर गर्व कर रहा है। जी-20 में मिलेट्स को जिस तरह पहचान मिली थी, उसी तरह ब्रिक्स 2026 में सत्तू और मखाने का यह पदार्पण देश के खाद्य और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है。
निष्कर्ष: स्थानीय स्वाद से वैश्विक प्रतिष्ठा की ओर भारत
संक्षेप में कहें तो नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल आर्थिक संधियों और कूटनीतिक वार्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और पाक कला कूटनीति का भी जीवंत उत्सव बन गया है। बिहार के सत्तू-मखाने से लेकर ओडिशा की कॉफी और गुजरात के हैंडलूम तक, यह गुड्डी बैग विदेशी मेहमानों के दिलों पर भारत की एक अमिट छाप छोड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय पत्रकार अपने देशों को लौटते समय भारत की माटी का यह अनमोल उपहार भी अपने साथ संजोकर ले जाएंगे。













