नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit 2026) के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान ने दुनिया भर से आए गणमान्य प्रतिनिधियों का दिल जीत लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे 1300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कर्मियों और विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भारत सरकार द्वारा एक विशेष मीडिया किट व ‘गुडी बैग’ (Goodie Bag) तैयार किया गया। इस खास उपहार बैग में बिहार का पारंपरिक सत्तू और मखाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कौतूहल और आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर विदेशी पत्रकारों द्वारा इस अनूठे उपहार हैंपर के अनबॉक्सिंग वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं。
भारत मंडपम में लोकल टू ग्लोबल: 9 खास भारतीय उत्पादों का संगम
Free Press Journal की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स सम्मेलन में पधारे अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधियों को ‘ए टेस्ट ऑफ इंडिया’ (A Taste of India) का जीवंत अनुभव कराने के लिए इस विशेष हैंपर को सुरुचिपूर्ण ढंग से तैयार किया गया। विदेश मंत्रालय और उद्योग संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा तैयार इस गुडी बैग में देश के विभिन्न राज्यों के 9 चुनिंदा पारंपरिक, जैविक और हस्तशिल्प उत्पादों को शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है。
इस हैंपर में बिहार के भुने चने के सत्तू और मिथिला मखाने के अलावा ओडिशा की कोरापुट जनजातीय पहाड़ियों की 100 प्रतिशत अरेबिका कॉफी, गुजरात का पारंपरिक बांधनी स्टोल, हस्तनिर्मित सेरेमिक मग और जैविक हर्बल चाय शामिल है। यह पहल भारत के स्थानीय किसानों, बुनकरों और ग्रामीण कारीगरों की सदियों पुरानी मेहनत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का एक सराहनीय कूटनीतिक प्रयास है。
गुडी बैग में शामिल 9 खास उपहारों की विस्तृत सूची
ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के विशेष मीडिया हैंपर में शामिल सभी नौ उत्पादों, उनके मूल राज्यों और सांस्कृतिक महत्व का आधिकारिक ब्योरा नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| उपहार सामग्री (Item Name) | मूल राज्य / क्षेत्र | उत्पाद की श्रेणी | विशेषता एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व |
|---|---|---|---|
| बिहार का चना सत्तू (Chana Sattu) | बिहार (मगध / भोजपुर) | पारंपरिक सुपरफूड | 100% प्राकृतिक प्लांट प्रोटीन, त्वरित ऊर्जा और पाचन हितैषी |
| मिथिला मखाना (Fox Nuts) | बिहार (दरभंगा / मधुबनी) | जीआई टैग प्राप्त स्नैक | एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर हल्का, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक आहार |
| कोरापुट अरेबिका कॉफी | ओडिशा (कोरापुट) | 100% अरेबिका कॉफी | आदिवासी किसानों द्वारा उगाई गई दुर्लभ और सुगंधित जैविक कॉफी |
| बांधनी ब्लॉक-प्रिंट दुपट्टा | गुजरात (कच्छ / सौराष्ट्र) | पारंपरिक हथकरघा वस्त्र | प्राकृतिक रंगों से तैयार ऐतिहासिक वस्त्र कला का उत्कृष्ट नमूना |
| स्मार्ट टेक टोट बैग (Tote Bag) | नई दिल्ली (इनोवेशन) | इको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल | इन-बिल्ट मोबाइल व लैपटॉप यूएसबी चार्जिंग पोर्ट युक्त आधुनिक बैग |
| हस्तनिर्मित सेरेमिक कॉफी मग | उत्तर प्रदेश (खुर्जा) | हस्तशिल्प / पॉटरी | प्राचीन मिट्टी कला उद्योग का परिचायक सुरुचिपूर्ण स्मृति चिह्न |
| असमिया जैविक चाय | असम (ब्रह्मपुत्र घाटी) | प्रीमियम बेवरेज | विश्व प्रसिद्ध कड़क स्वाद और ताजगी देने वाली शुद्ध ब्लैक टी |
| आयुर्वेदिक वेलनेस किट | केरल / उत्तराखंड | हर्बल देखभाल उत्पाद | अश्वगंधा, तुलसी और प्राकृतिक तत्वों से निर्मित स्वास्थ्य मिश्रण |
| ब्रिक्स आधिकारिक डायरी व पेन | भारत सरकार (आधिकारिक) | स्टेशनरी सामग्री | पुनर्चक्रित हस्तनिर्मित कागज से निर्मित पर्यावरण अनुकूल सम्मेलन किट |
विदेशी मीडिया में छाया बिहार का सत्तू: सुपरफूड की वैश्विक पहचान
Times Now News की रिपोर्ट के अनुसार, गुडी बैग में सबसे अधिक कौतूहल और आकर्षण बिहार के सत्तू को लेकर देखा गया। जब विदेशी पत्रकारों ने पैकेट पर अंकित पोषण मूल्य देखा, तो वे हैरान रह गए। भुने हुए काले चने से तैयार यह पारंपरिक खाद्य पदार्थ प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम का उत्कृष्ट प्राकृतिक स्रोत है। भारत में इसे पारंपरिक ऊर्जा पेय के रूप में जाना जाता है, जिसे ठंडे पानी में मिलाकर नमकीन या मीठे रूप में तुरंत तैयार किया जा सकता है。
सम्मेलन में पहुंचे विदेशी प्रतिनिधियों ने मीडिया सेंटर में प्रदर्शित लाइव डेमो के दौरान सत्तू शर्बत का स्वाद चखा और इसे आधुनिक कृत्रिम प्रोटीन शेक का बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प बताया। कई अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लंबे और थकाऊ रिपोर्टिंग सत्रों के दौरान सत्तू का सेवन शरीर को ऊर्जावान और हाइड्रेटेड रखने में बेहद असरदार साबित हुआ。
मिथिला मखाना और कोरापुट कॉफी: स्वाद और सेहत का मेल
सत्तू के साथ-साथ बिहार का दूसरा प्रमुख उत्पाद यानी मिथिला का जीआई-टैग प्राप्त मखाना भी विदेशी मेहमानों के बीच खूब लोकप्रिय हुआ। कम कैलोरी, शून्य कोलेस्ट्रॉल और उच्च पोषण से भरपूर मखाने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘ग्लूटेन-फ्री सुपर स्नैक’ के रूप में व्यापक सराहना मिली। भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार का 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है और ब्रिक्स जैसे बड़े मंच पर इसकी मौजूदगी से इसके वैश्विक निर्यात को नया संबल मिलेगा。
वहीं ओडिशा के कोरापुट की पहाड़ियों में जनजातीय किसानों द्वारा उगाई जाने वाली 100 प्रतिशत अरेबिका कॉफी ने भी विदेशी प्रतिनिधियों को बहुत प्रभावित किया। जनजातीय महिलाओं द्वारा उत्पादित और प्रसंस्कृत यह जैविक कॉफी अपनी अनूठी प्राकृतिक सुगंध और बेहतरीन स्वाद के लिए पहचानी जाती है। इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय जनजातीय उत्पादों की प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि हुई है。
स्मार्ट टोट बैग की तकनीक: इन-बिल्ट चार्जिंग पोर्ट ने जीता दिल
पारंपरिक उत्पादों के अलावा इस मीडिया किट का सबसे व्यावहारिक आकर्षण इसका आधुनिक टोट बैग रहा। सम्मेलन कवर कर रहे मीडिया कर्मियों की गैजेट्स चार्जिंग की समस्या को ध्यान में रखते हुए इस बैग में एक सुरक्षित यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और पावरबैंक स्लॉट जोड़ा गया। पर्यावरण अनुकूल जूट और कैनवास से बने इस बैग की मजबूती और उपयोगी डिजाइन की विदेशी पत्रकारों ने खूब तारीफ की। यह नवाचार दर्शाता है कि भारतीय आयोजक वैश्विक आयोजनों में तकनीक और पर्यावरण संतुलन का कितना सटीक ध्यान रखते हैं。
गुजरात का बांधनी दुपट्टा और सांस्कृतिक कूटनीति
भारत की समृद्ध कपड़ा परंपरा को दर्शाने के लिए बैग में गुजरात का पारंपरिक बांधनी दुपट्टा शामिल किया गया। प्राकृतिक रंगों और हाथ की गांठों से सुसज्जित यह स्टोल विदेशी महिला प्रतिनिधियों के बीच खास आकर्षण बना। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति देश के स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा दिला रही है, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर का दुनिया भर में विस्तार हो रहा है。
निष्कर्ष: लोकल उत्पादों की वैश्विक उड़ान
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल कूटनीतिक वार्ताओं और संयुक्त घोषणापत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत के स्वाद, शिल्प और सूझबूझ का वैश्विक प्रदर्शन बन गया। 1300 से अधिक विदेशी पत्रकारों के जरिए बिहार का सत्तू और मखाना दुनिया भर में सुर्खियों में आ गया है। यह घटनाक्रम सिद्ध करता है कि भारत की पारंपरिक धरोहर जब आधुनिक सोच के साथ दुनिया के सामने पेश की जाती है, तो वह वैश्विक स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ती है。













