नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले एक अनूठी सांस्कृतिक पहल सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रेंड कर रही है। सम्मेलन को कवर करने आ रहे 1,200 से अधिक विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए भारत सरकार द्वारा एक विशेष ‘गुडी बैग’ तैयार किया गया है। इस खास हैम्पर में बिहार के पारंपरिक सत्तू और मिथिला के प्रसिद्ध मखाने को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुख स्थान दिया गया है। वैश्विक कूटनीति के इस मंच पर भारतीय खान-पान, लोक परंपराओं और स्वदेशी उत्पादों की यह झलक विदेशी प्रतिनिधियों के बीच भारी कौतूहल और चर्चा का विषय बन चुकी है。
भारत मंडपम में सत्तू और मखाने का जलवा: क्या है खास बैग में?
Free Press Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों और पत्रकारों को भारत की विविधता से रूबरू कराने के लिए नौ चुनिंदा वस्तुओं का विशेष उपहार संपुट तैयार किया गया है। इस हैम्पर का मुख्य आकर्षण बिहार का देसी चना सत्तू और मखाना है। भारत में सदियों से पोषण का स्रोत रहा सत्तू अब ग्लोबल सुपरफूड के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान दर्ज करा रहा है。
विदेश मंत्रालय और पर्यटन एजेंसियों ने इस बार पारंपरिक उपहारों की जगह ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और स्वदेशी शिल्प को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की रणनीति अपनाई है। बिहार का सत्तू न केवल उच्च प्रोटीन प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की कृषि का प्रतीक भी है। वहीं जीआई टैग प्राप्त बिहार का मखाना दुनिया भर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बन रहा है। विदेशी पत्रकार स्थानीय ग्रामीण उत्पादों को इतने सुरुचिपूर्ण अंदाज में पाकर काफी प्रभावित हैं。
ब्रिक्स 2026 उपहार बैग: प्रमुख उत्पादों का तुलनात्मक विवरण
ब्रिक्स 2026 के आधिकारिक उपहार बैग में विभिन्न राज्यों की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आधुनिक तकनीकी विशेषताओं का शानदार संतुलन साधा गया है। नीचे दी गई तालिका में इस हैम्पर की मुख्य सामग्री और उनके महत्व का ब्योरा प्रस्तुत है:
| उपहार सामग्री / उत्पाद | मूल राज्य / क्षेत्र | उत्पाद की श्रेणी | प्रमुख विशेषता और महत्व |
|---|---|---|---|
| देसी चना सत्तू (Sattu) | बिहार | पारंपरिक सुपरफूड | उच्च प्रोटीन, फाइबर युक्त ऊर्जा से भरपूर पौष्टिक आहार। |
| ऑर्गेनिक मखाना (Fox Nuts) | बिहार (मिथिला) | जीआई टैग कृषि उत्पाद | एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित स्नैक। |
| 100% अरेबिका स्पेशल कॉफी | ओडिशा (कोरापुट) | जनजातीय उपज | पहाड़ियों में आदिवासियों द्वारा उगाई गई ऑर्गेनिक कॉफी। |
| हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल | गुजरात | हस्तशिल्प वस्त्र | कच्छ के प्राकृतिक रंगों और ब्लॉक प्रिंटिंग का उत्कृष्ट नमूना। |
| स्मार्ट टेक टोट बैग | भारत (मेक इन इंडिया) | आधुनिक लाइफस्टाइल | पर्यावरण-अनुकूल बैग, जिसमें इन-बिल्ट मोबाइल चार्जिंग पोर्ट है। |
| सिरेमिक कॉफी मग | उत्तर प्रदेश (खुर्जा) | हस्तनिर्मित पॉटरी | पारंपरिक रूपांकनों और ब्रिक्स 2026 लोगो युक्त स्मृति चिन्ह। |
| हर्बल वेलनेस टी किट | असम / दार्जिलिंग | पेय पदार्थ | सुगंधित पत्तियां और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सम्मिश्रण। |
ओडिशा की आदिवासी कॉफी और गुजरात का ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल
Times Now News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस उपहार किट में देश के विभिन्न राज्यों की विरासत को प्रमुखता दी गई है। कॉफी प्रेमियों के लिए ओडिशा के कोरापुट जिले की पहाड़ियों से 100 प्रतिशत अरेबिका कॉफी शामिल की गई है। यह कॉफी आदिवासी समुदायों द्वारा जैविक पद्धति से उगाई जाती है और अपनी समृद्ध खुशबू के लिए पहचानी जाती है。
इसके अलावा वस्त्र शिल्प में गुजरात के विश्वप्रसिद्ध हैंड ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल को शामिल किया गया है। यह स्टोल विदेशी मेहमानों को भारत की प्राचीन बुनाई और हस्तशिल्प परंपरा से जोड़ता है। सूती धागों पर प्राकृतिक रंगों से की गई छपाई भारतीय कलात्मकता की बेजोड़ मिसाल है। भोजन और वस्त्रों का यह संगम दर्शाता है कि भारत की कूटनीति अपनी लोक-संस्कृति के माध्यम से दुनिया को जोड़ने का प्रयास कर रही है。
हाई-टेक टोट बैग: इन-बिल्ट चार्जिंग पोर्ट ने खींचा सबका ध्यान
इस पूरे उपहार संग्रह में सबसे अधिक चर्चा उस हाई-टेक टोट बैग की हो रही है जिसमें यह सामग्री दी गई है। लंबी रिपोर्टिंग ड्यूटी के दौरान पत्रकारों के सामने मोबाइल और कैमरों की बैटरी डिस्चार्ज होना आम बात है। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने टोट बैग में आधुनिक इन-बिल्ट यूएसबी चार्जिंग पोर्ट दिया है。
इस सुविधा से मीडिया कर्मी भारत मंडपम में घूमते हुए अपने उपकरणों को आसानी से चार्ज कर सकते हैं। विदेशी पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर इस विचारशीलता की जमकर सराहना की है। कई संवाददाताओं ने इंस्टाग्राम और एक्स पर इस स्मार्ट बैग के वीडियो पोस्ट किए हैं। पत्रकारों का कहना है कि यह बैग केवल स्मृति चिन्ह नहीं है, बल्कि डिजिटल युग के अनुकूल एक उपयोगी साधन है。
सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ सत्तू: बिहार के लोगों में भारी गर्व
जैसे ही ब्रिक्स गुडी बैग में सत्तू और मखाना होने की जानकारी सामने আসতে आई, भारतीय सोशल मीडिया पर खुशी की लहर दौड़ गई। लोग गर्व से साझा कर रहे हैं कि जिस सत्तू को कभी देहात का साधारण भोजन समझा जाता था, आज वह ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष राजनयिकों के हाथों में पहुंच रहा है。
ट्विटर पर ‘#SattuAtBRICS’ और ‘#BiharPride’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। फूड विशेषज्ञों का कहना है कि सत्तू का इनसोल्यूबल फाइबर और प्रोटीन इसे दुनिया के किसी भी महंगे सप्लीमेंट से बेहतर बनाते हैं। यह कदम ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का जीवंत उदाहरण बन गया है。
वैश्विक कूटनीति में ‘गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी’ का बढ़ता दायरा
विशेषज्ञ इसे भारत की सफल ‘गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी’ यानी खान-पान के जरिए प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। पूर्व में जी-20 सम्मेलन में मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया गया था, और अब ब्रिक्स 2026 में क्षेत्रीय व्यंजनों को केंद्र में रखा गया है। भोजन किसी भी देश की सॉफ्ट पावर का सशक्त माध्यम होता है। जब विदेशी मेहमान अपने देशों में लौटकर सत्तू और मखाने की चर्चा करेंगे, तो इससे भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात और फूड स्टार्टअप्स को भी नया संबल मिलेगा。
निष्कर्ष: परंपरा और आधुनिक नवाचार का सुंदर संगम
निष्कर्षतः 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का यह गुडी बैग केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का परिचायक है। इसमें जहां एक ओर बिहार की मिट्टी से उपजा सत्तू और मखाना देश के प्राचीन पोषण दर्शन को व्यक्त करता है, वहीं इन-बिल्ट चार्जिंग पोर्ट वाला टोट बैग तकनीकी सोच को दिखाता है। वैश्विक प्रतिनिधियों के लिए यह उपहार भारत की विविधता और आतिथ्य सत्कार की एक अविस्मरणीय सौगात साबित हो रहा है。













