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BRICS 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र पास, भारत के 5 अहम प्रस्ताव मंजूर

नई दिल्ली: भारत की आधिकारिक अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित दो-दिवसीय 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार, 13 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हो गया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों, जारी युद्धों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ (New Delhi Declaration) को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस घोषणापत्र में भारत द्वारा प्रस्तावित चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और सतत विकास (Sustainability)—पर व्यापक सहमति बनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपन्न हुए इस सम्मेलन ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण और ग्लोबल साउथ (Global South) की सशक्त आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया है।

नई दिल्ली घोषणापत्र की ऐतिहासिक स्वीकृति और मुख्य बिंदु

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली घोषणापत्र का सर्वसम्मति से अंगीकार किया जाना कूटनीतिक रूप से भारत की बहुत बड़ी जीत है। विभिन्न जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद भारत ने कुशल कूटनीतिक वार्ता से सभी पक्षों को एक साझा मंच पर लाने में सफलता पाई। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों में तत्काल व्यापक सुधार की पुरजोर मांग की गई है, ताकि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक उभरती तकनीकों और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के राजनीतिक हथियारीकरण के गंभीर खतरों के प्रति आगाह किया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को पारदर्शी व लचीला बनाने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त, ब्रिक्स नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद से मुकाबले, साइबर सुरक्षा और जलवायु वित्त के व्यावहारिक समाधानों पर भी संयुक्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई।

घोषणापत्र के 5 प्रमुख स्तंभ और भारत के स्वीकृत प्रस्ताव

नई दिल्ली घोषणापत्र के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख रणनीतिक स्तंभों, आर्थिक सुधारों और सांस्कृतिक-खेल पहलों का आधिकारिक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:

रणनीतिक स्तंभ / क्षेत्र घोषणापत्र में स्वीकृत प्रमुख निर्णय भारत द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव वैश्विक एवं क्षेत्रीय प्रभाव
वैश्विक शासन में सुधार सुरक्षा परिषद और डब्ल्यूटीओ में संरचनात्मक सुधार की मांग ग्लोबल साउथ को स्थायी और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व देने की वकालत विकासशील देशों की निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार निपटान का विस्तार ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इनिशिएटिव को बढ़ावा देना डॉलर पर निर्भरता में कमी और विनिमय जोखिमों से सुरक्षा
खेल और पारंपरिक खेल ब्रिक्स गेम्स का नियमित आयोजन और स्वदेशी खेलों का संवर्धन कबड्डी, मलखंब और पारंपरिक खेलों को ब्रिक्स स्तर पर मान्यता युवा आदान-प्रदान और सांस्कृतिक खेलों का प्रचार-प्रसार
सांस्कृतिक धरोहर व पुरावशेष प्राचीन विरासतों का संरक्षण और चोरी हुई मूर्तियों की वापसी तस्करी की गई कलाकृतियों को मूल देशों को लौटाने का तंत्र अवैध रूप से लूटी गई राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षित वापसी
महत्वपूर्ण खनिज व तकनीक सप्लाई चेन व्यवधान रोकने और एआई के सुरक्षित नियमन पर सहमति क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक के हथियारीकरण पर रोक का आह्वान ऊर्जा संक्रमण और आधुनिक तकनीक में आत्मनिर्भरता

खेल जगत में भारत की बड़ी जीत: ब्रिक्स गेम्स और स्वदेशी खेल

News On AIR का आधिकारिक बुलेटिन बताता है कि नई दिल्ली घोषणापत्र में भारत के खेल प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है। भारत के युवा मामले और खेल मंत्रालय के प्रस्ताव के तहत सदस्य देशों के बीच खेल सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाएगा। घोषणापत्र में विशेष रूप से कहा गया है कि ब्रिक्स देश अपनी सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने के लिए पारंपरिक खेलों का परस्पर आदान-प्रदान करेंगे।

इसके तहत भारत के पारंपरिक खेल कबड्डी और मलखंब के साथ-साथ रूस के साम्बो और ब्राजील के कैपाइरा जैसे खेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा युवा एथलीटों के प्रशिक्षण, आधुनिक खेल विज्ञान और एंटी-डोपिंग सहयोग में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी आम सहमति बनी है, जिससे जमीनी स्तर के उदीयमान खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और ऐतिहासिक कलाकृतियों की वापसी

सम्मेलन का एक अत्यंत संवेदनशील पहलू सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण रहा। नई दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों ने युद्ध, औपनिवेशिक शोषण और तस्करी के कारण लूटी गई ऐतिहासिक कलाकृतियों और पुरावशेषों (Antiquities) को उनके मूल देशों को लौटाने के लिए साझा संस्थागत तंत्र बनाने पर जोर दिया है। भारत ने बीते वर्षों में विदेशों से सैकड़ों प्राचीन मूर्तियां वापस लाने में बड़ी सफलता पाई है और अब ब्रिक्स मंच से इसे अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा दिया गया है।

घोषणापत्र में यूनेस्को के ऐतिहासिक 1970 कन्वेंशन का कड़ाई से पालन करने और कलाकृतियों की अवैध तस्करी रोकने हेतु कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की रूपरेखा तय की गई है। साथ ही ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव और हेरिटेज टूरिज्म को गति दी जाएगी, जिससे सदस्य देशों के नागरिकों के बीच आपसी रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय स्वायत्तता की दिशा में कदम

नई दिल्ली सम्मेलन का दूसरा बड़ा आकर्षण पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों और डॉलर के प्रभुत्व को संतुलित करने के प्रयासों से जुड़ा रहा। घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच स्थानीय मुद्राओं में वित्तीय लेन-देन सुगम बनाने के लिए डिजिटल भुगतान अवसंरचना के एकीकरण पर विशेष बल दिया गया। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के जरिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए स्थानीय मुद्राओं में ऋण आवंटन बढ़ाने की योजना को भी मंजूरी दी गई, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मुद्रा उतार-चढ़ाव और प्रतिबंधों के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।

चीन को सौंपी गई ब्रिक्स की अध्यक्षता: दिल्ली समिट का संदेश

समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल समापन की आधिकारिक घोषणा की और 19वें शिखर सम्मेलन (2027) के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता का प्रतीक चिन्ह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सौंपा। पीएम मोदी পুনরায় विश्वास जताया कि नई दिल्ली घोषणापत्र की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स संगठन विश्व में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि का मजबूत संवाहक बनेगा। उपस्थित सभी विदेशी प्रतिनिधियों ने भारत के भव्य आयोजन, सुरक्षा प्रबंधन और पारंपरिक आतिथ्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

निष्कर्ष: ग्लोबल साउथ के नए युग का शंखनाद

संक्षेप में कहा जाए तो 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद और सशक्त नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है। दुनिया के बंटे होने के इस दौर में भी भारत ने सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों को एक मेज पर लाकर सर्वसम्मति का ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार कराया। ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ वैश्विक संतुलन, सांस्कृतिक न्याय और आर्थिक सहयोग का स्पष्ट रोडमैप है। खेल, संस्कृति, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में लिए गए ये युगांतरकारी निर्णय आने वाले समय में विकासशील देशों के करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे।

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