मुंबई: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और देश के सबसे बड़े वित्तीय एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ऐतिहासिक ₹22,569 करोड़ के मेगा IPO की शुरुआत के बीच गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुले। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की नरमी से घरेलू निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन अमेरिकी ब्याज दरों में सख्ती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी से बढ़त सीमित दायरे में रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती सौदों में 86.49 अंक चढ़कर 74,422.94 के स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 50.10 अंक की मजबूती के साथ 23,267.70 के स्तर पर पहुंच गया।
यूएस फेड ने 3 साल बाद बढ़ाई दरें: वैश्विक बाजारों पर असर
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक के समापन पर नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल फंड्स रेट बढ़कर 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंच गया है। पिछले तीन वर्षों में अमेरिकी फेड द्वारा की गई यह पहली दर वृद्धि है। फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने संकेत दिए कि अमेरिका में स्थिर मुद्रास्फीति और मजबूत रोजगार परिदृश्य को देखते हुए चालू वर्ष के भीतर एक और दर वृद्धि की संभावना पूरी तरह खुली हुई है।
शोध एवं निवेश फर्म एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसैलवन राधाकृष्णन के अनुसार, अमेरिकी फेड द्वारा दरें बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी की लागत बढ़ेगी और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में मजबूती आएगी। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह दोहरी चुनौती है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकालकर अमेरिकी सुरक्षित प्रतिभूतियों में लगाने का दबाव बढ़ता है, जिससे भारतीय रुपये की विनिमय दर पर कमजोरी का सीधा असर पड़ता है।
मार्केट ओपनिंग डेटा: प्रमुख सूचकांक और वित्तीय संकेतक
गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को शुरुआती सत्र के दौरान प्रमुख इक्विटी बेंचमार्क, करेंसी और कमोडिटी बाजारों में दर्ज आधिकारिक आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
| वित्तीय संकेतक / सूचकांक | वर्तमान स्तर (17 सितंबर 2026) | पिछला बंद (16 सितंबर 2026) | शुद्ध बदलाव (अंक / %) | बाजार पर प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) | 74,422.94 | 74,336.45 | +86.49 अंक (+0.12%) | शुरुआती सत्र में सीमित बढ़त और सतर्कता |
| एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty) | 23,267.70 | 23,217.60 | +50.10 अंक (+0.22%) | 23,250 के अहम स्तर से ऊपर टिकने का प्रयास |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) | $104.70 – $105.70 / बैरल | $108.70 / बैरल | -0.12% (हल्की नरमी) | चार महीने के उच्च स्तर से आंशिक गिरावट |
| यूएस फेडरल फंड्स रेट | 3.75% – 4.00% | 3.50% – 3.75% | +25 bps (0.25% वृद्धि) | 3 साल बाद पहली दर वृद्धि, नकदी पर दबाव |
| भारतीय रुपया (USD / INR) | ₹96.08 प्रति डॉलर | ₹95.79 प्रति डॉलर | -29 पैसे की कमजोरी | डॉलर मजबूती के चलते ₹96 के पार फिसला |
| विदेशी निवेशक प्रवाह (FII) | -₹2,032.61 करोड़ | शुद्ध बिकवाल (16 सितंबर) | निकासी जारी | घरेलू संस्थागत फंड्स द्वारा आंशिक सहारा |
| एनएसई मेगा आईपीओ (NSE IPO) | ₹22,569 करोड़ आकार | बोली हेतु खुला | प्राइस बैंड सक्रिय | घरेलू पूंजी बाजार का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम |
₹22,569 करोड़ का ऐतिहासिक NSE IPO खुला: निवेशकों में भारी उत्साह
HDFC Sky की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, आज के कारोबारी दिन का सबसे बड़ा आकर्षण नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित ₹22,569 करोड़ का सार्वजनिक निर्गम रहा। नियामक संस्थाओं से सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद देश का प्रमुख एक्सचेंज सार्वजनिक भागीदारी के लिए खुल गया है। संस्थागत और खुदरा निवेशकों की ओर से बोली प्रक्रिया के पहले ही घंटे में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी गई है। इस निर्गम के जरिए एक्सचेंज के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी की बिक्री (OFS) कर रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एनएसई का यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के परिपक्व होने का स्पष्ट प्रमाण है। खुदरा निवेशकों की बढ़ती संख्या और दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम में उछाल के चलते एक्सचेंज के वित्तीय नतीजे लगातार मजबूत रहे हैं। हालांकि जानकारों ने यह आगाह भी किया कि आईपीओ में बड़ी नकदी खिंचने से द्वितीयक बाजार के स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में कुछ समय के लिए लिक्विडिटी का दबाव महसूस किया जा सकता है।
सेक्टरवार उतार-चढ़ाव: डिफेंस और ऑटो चमके, आईटी में गिरावट
गुरुवार की सुबह शेयर बाजार में सेक्टरवार मिला-जुला रुख रहा। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में ऑटोमोबाइल, डिफेंस और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में खरीदारी देखी गई। प्रमुख बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में इटर्नल, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज फिनसर्व और इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) सबसे आगे रहे। कच्चे तेल के भाव में $108 से घटकर $105 प्रति बैरल पर आने से विमानन कंपनियों की ईंधन लागत को लेकर राहत मिली, जिससे इंडिगो के शेयरों को सहारा मिला।
Kotak Neo के मार्केट अपडेट के मुताबिक, दूसरी तरफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और निजी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। यूएस फेड की दर वृद्धि से वैश्विक आईटी खर्च में मंदी की चिंता के चलते एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिन्द्रा 1 से 2 प्रतिशत तक टूटकर नुकसान में रहे। साथ ही प्रमुख निजी बैंक एचडीएफसी बैंक में भी मुनाफावसूली दर्ज की गई।
विदेशी निवेशकों की निकासी और एशियाई बाजारों का रुख
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉल स्ट्रीट में गिरावट के बाद गुरुवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखा गया। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और जापान का निक्केई 225 बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग लाल निशान में रहे। घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को ₹2,032.61 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे तेजी सीमित रही। विदेशी निकासी और मजबूत डॉलर के चलते भारतीय रुपया 29 पैसे गिरकर ₹96.08 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर आ गया।
निष्कर्ष और आगामी कारोबारी रणनीति
17 सितंबर 2026 का बाजार सत्र विपरीत घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है। जहां एनएसई आईपीओ का उत्साह और कच्चे तेल में नरमी बाजार को सहारा दे रही है, वहीं यूएस फेड की दर वृद्धि और विदेशी निकासी ऊपरी स्तरों पर रुकावट डाल रही है। तकनीकी जानकारों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर मजबूत आधार बना हुआ है, जबकि 23,400 पर तात्कालिक प्रतिरोध देखने को मिल सकता है। निवेशकों को अत्यधिक सतर्कता बरतते हुए चुनिंदा लार्जकैप शेयरों में ही सीमित जोखिम के साथ निवेश बनाए रखने की सलाह दी जाती है।













