नई दिल्ली / चंडीगढ़: केंद्र सरकार के 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत घटनाक्रम सामने आया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की तीन दिवसीय चंडीगढ़ परामर्श बैठक शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को संपन्न हो गई है। इस बैठक में केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और पेंशनर महासंघों ने मौजूदा महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) व्यवस्था में बड़े नीतिगत बदलाव की आधिकारिक मांग रखी है। Livemint की आधिकारिक रिपोर्ट और GovtStaff 8th CPC बुलेटिन के अनुसार, भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) ने आयोग के समक्ष विस्तृत मांग पत्र सौंपकर साल में दो बार होने वाले डीआर संशोधन को बदलकर हर तीन महीने में करने, मुद्रास्फीति का शत-प्रतिशत पॉइंट-टू-पॉइंट मुआवजा देने और डीआर 25% पार होते ही उसे मूल पेंशन में स्वतः विलय करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही आयोग ने अपने अगले परामर्श दौर के लिए 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में बैठक तय की है。
8वें वेतन आयोग का दायरा और परामर्श प्रक्रिया की प्रगति
केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को 18 महीने के वैधानिक कार्यकाल के साथ गठित 8वें वेतन आयोग में अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, अंशकालिक सदस्य पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन शामिल हैं। अपने 10 महीने के कार्यकाल में आयोग ने दिल्ली, लद्दाख, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, पुडुचेरी और अब चंडीगढ़ में विभिन्न कर्मचारी व पेंशनर संघों के साथ पारदर्शी लोकतांत्रिक संवाद पूरा कर लिया है。
Staff News पेंशनर्स अपडेट के अनुसार, चंडीगढ़ दौरे के समापन के साथ ही आयोग ने दक्षिणी राज्यों के संगठनों के लिए बेंगलुरु बैठक का मंच तैयार कर लिया है। इस दौरान पेंशनरों के डीआर फॉर्मूले, कम्यूटेशन बहाली और फिटमेंट फैक्टर को लेकर आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक तर्क बेहद विचारणीय और मजबूत माने जा रहे हैं。
वर्तमान महंगाई राहत (DR) नियम और गणना फॉर्मूला कैसे करता है काम?
केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (CPAO) के नियमों के अनुसार, सेवारत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) की तर्ज पर ही पेंशनरों को महंगाई राहत (DR) दी जाती है। केंद्र सरकार वर्ष में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई से) अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीनों के औसत के आधार पर नई दरें अधिसूचित करती है。
7वें वेतन आयोग के तहत डीआर की गणना का आधिकारिक फॉर्मूला निम्नलिखित है:
डीआर प्रतिशत = [(AICPI-IW का पिछले 12 महीनों का औसत – 261.41) ÷ 261.41] × 100
यहां 261.41 वह आधार सूचकांक है जिसे 7वें वेतन आयोग ने 1 जनवरी 2016 को आधार मानकर तय किया था। इसके आधार पर प्रत्येक माह बैंक द्वारा देय शुद्ध डीआर राशि की गणना की जाती है:
मासिक डीआर राशि = मूल पेंशन × वर्तमान डीआर दर ÷ 100
उदाहरण के लिए, यदि किसी पेंशनर की मूल पेंशन ₹40,000 है और वर्तमान डीआर दर 60% है, तो उसे ₹24,000 मासिक डीआर मिलता है। इस प्रकार कम्यूटेशन कटौती से पहले उसकी कुल सकल पेंशन ₹64,000 प्रति माह बनती है。
8वें वेतन आयोग: मौजूदा डीआर नियम बनाम पेंशनरों की प्रमुख मांगें
नीचे दी गई तालिका में वर्तमान व्यवस्था और 8वें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी व पेंशनर संगठनों द्वारा प्रस्तुत प्रमुख सुधारों को दर्शाया गया है:
| नीतिगत प्रावधान | वर्तमान व्यवस्था (7वां CPC) | 8वें वेतन आयोग से मांग (BPS / FNPO) |
|---|---|---|
| संशोधन की आवृत्ति (Frequency) | वर्ष में 2 बार (जनवरी व जुलाई में 6-6 माह पर) | हर 3 महीने में त्रैमासिक संशोधन (3 माह के औसत पर) |
| मुद्रास्फीति मुआवजा (Inflation) | 12 महीने के अंतराल पर आंशिक समायोजन | शत-प्रतिशत पॉइंट-टू-पॉइंट रीयल-टाइम मुआवजा |
| डीआर का विलय (Merger) | 10 साल के वेतन आयोग तक कोई विलय नहीं | डीआर 25% पार होते ही स्वतः मूल पेंशन में विलय |
| पुनः नियोजित पेंशनर नियम | पुनः नियोजन अवधि के दौरान डीआर बंद रहता है | पारिवारिक पेंशनरों की तरह पूर्ण डीआर चालू रखने की मांग |
| पेंशन समीक्षा तंत्र | प्रत्येक 10 वर्ष में तदर्थ वेतन आयोग | स्थायी समीक्षा निकाय; 50% DA/DR पर फिटमेंट पुनरीक्षण |
तिमाही संशोधन और 25% पर डीआर विलय का आर्थिक तर्क
भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने आयोग के समक्ष दलील दी है कि वरिष्ठ नागरिकों और पारिवारिक पेंशनरों का अधिकांश घरेलू बजट भोजन, दैनिक दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है। इन आवश्यक वस्तुओं की मुद्रास्फीति दर सामान्य खुदरा महंगाई से कहीं अधिक तीव्र गति से बढ़ती है। 6 महीने के लंबे अंतराल पर डीआर संशोधन होने से वरिष्ठ नागरिकों को बढ़ी हुई कीमतों का वित्तीय बोझ कई महीनों तक खुद उठाना पड़ता है। यदि हर तीन महीने में डीआर संशोधित हो, तो उन्हें समय पर वास्तविक राहत मिल सकेगी。
वहीं डाक कर्मचारी संघ (FNPO) का तर्क है कि 10 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बजाय एक स्थायी व्यवस्था बननी चाहिए। जब भी महंगाई भत्ता या राहत 25 प्रतिशत पार करे, उसे स्वतः मूल पेंशन में मिला दिया जाए। इसके अलावा जब यह 50 प्रतिशत पहुंचे, तो फिटमेंट फैक्टर की नई समीक्षा की जानी चाहिए。
विभिन्न मूल पेंशन स्लैब पर डीआर गणना का व्यावहारिक मॉडल
नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है कि वर्तमान 60% डीआर दर पर पेंशनरों को कितनी राशि मिल रही है और यदि प्रस्तावित सुधार लागू होते हैं तो वित्तीय संरचना किस प्रकार होगी:
| मूल पेंशन (Basic Pension) | वर्तमान मासिक DR (60% पर) | वर्तमान सकल मासिक पेंशन | 25% विलय के बाद संशोधित बेसिक |
|---|---|---|---|
| ₹25,000 (ग्रुप ‘सी’ सेवानिवृत्त) | ₹15,000 | ₹40,000 | ₹31,250 |
| ₹35,000 (पर्यवेक्षक / अनुभाग स्तर) | ₹21,000 | ₹56,000 | ₹43,750 |
| ₹40,000 (राजपत्रित अधिकारी शुरुआती) | ₹24,000 | ₹64,000 | ₹50,000 |
| ₹50,000 (वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी) | ₹30,000 | ₹80,000 | ₹62,500 |
| ₹65,000 (उच्च प्रशासनिक संवर्ग) | ₹39,000 | ₹1,04,000 | ₹81,250 |
पुनः नियोजित पेंशनरों के साथ समानता का प्रश्न
वर्तमान नियमों में यदि कोई सेवानिवृत्त कर्मचारी पुनः नियोजित होता है, तो पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत रोक दी जाती है। संगठनों ने इसे विसंगति बताते हुए मांग की है कि जिस प्रकार पारिवारिक पेंशनरों को नौकरी के बावजूद पूरी महंगाई राहत मिलती है, उसी प्रकार पुनः नियोजित पेंशनरों को भी निर्बाध डीआर मिलना चाहिए ताकि उनके अनुभव का समुचित सम्मान हो सके。
आगामी बेंगलुरु बैठक और भविष्य की रूपरेखा
चंडीगढ़ बैठक पूरी करने के बाद 8वां वेतन आयोग 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में अपनी अगली परामर्श बैठक करेगा। आयोग वित्तीय इनपुट एकत्र करने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा। 1 जनवरी 2026 से संभावित प्रभावी होने वाले इस नए वेतन और पेंशन ढांचे से देश भर के करोड़ों परिवारों को ठोस राहत मिलने की उम्मीद है。













